लाम सियासा में आप सबको भी सलामती हो उसकी ममूरी में से हम सब निभाए। यानी फसल पर फसलों, सचाई कंट्रोल का दूसरा नाम बैलेंस। बैलेंस का दूसरा नाम कंट्रोल है। कहने का मतलब कंट्रोल से बैलेंस आता है। अगर बैलेंस है तो इसका मतलब कंट्रोल कायम है तो?
जो पंजाब पावरहाउस है, जो सबसे बड़ा है, बिजली उत्पादन को मेगावॉट या गीगावाट घंटे में मापा जाता है। वोल्टेज में नहीं क्योंकि वोल्टेज ट्रांसमिशन सिस्टम की एक विशेषता है जैसे 400 किलोवॉट 2025 की हालिया रिपोर्टों के आधार पर 600। 60 मेगावॉट की तीन इकाइयों, 2025 में 1806 मेगावॉट बिजली उत्पन्न की है। सितंबर 2025 में आई एक रिपोर्ट में एक निश्चित। अवधि के लिए इसकी पारित उत्पादन क्षमता 8500 सतविंजा यानी 8000। 557 मुस यानी मिलियन यूनिट के बराबर का उल्लेख किया गया था जो मजबूत उत्पादन का संकेत देता है।
परंतु ये बिजली घर तक चीजों को चलाने के लिए। नियंत्रण और संतुलन वोल्टेज के कंट्रोल में कंट्रोल के साथ पहुंचाई जाती है। जीस तरह, 245 200। 45 वोल्ट का कंट्रोल एक घर को रोशन होता है। एक कार इंजन कितने सीसी का होता है, कितनी पावर होती है उसमें स्पीड के साथ मगर एक। बैलेंस और कंट्रोल स्पीड यानी की 70 किलोमीटर है। चाहे इंजन 1000 सीसी का हो या 5000 सीसी। अगर कंट्रोल और बैलेंस ना हो तो वो ताकत हादसा बन सकती है। लेकिन अगर कंट्रोल और बैलेंस हो
सबर और शांति संयम की रूह की मदद से हम सफर करने में सफल और मंजिल तक पहुँच पाते। सही सलामत। इंसान के अंदर कितनी एनर्जी है जब इसपे इंसान कंट्रोल होता है, बैलेंस नहीं रख पाता तो फिर गुस्से में नुकसान कर बैठता है। और लस्त जो हवस में बदल जाती है और ये मौत और जुर्म और नुकसान और समाज का माहौल खराब और डर का माहौल पैदा करती है, चाहे नशा है। उसके विचार में आने से लेकर यानी इंसान के विचार में आने से लेकर, बुरे से बुरे तरीके से अंजाम देने तक, जिससे दुनिया में और दुनिया।
दिल में दहशत और डर का माहौल पैदा होता है। दुनिया में क्या कुछ नहीं होता, चोरी होती है खून लड़ाईयाँ रेप जैसे जुर्म? बुरे से बुरा नशा और ये एनर्जी तो सब वो ख्याल दीजनीयत इरादे ख्याल पर डिपेंड करती है यानी उस एनर्जी को थॉट यूज़ करता है। मगर डिपेंड करता है इंसान का इरादा, नीयत, दिल, ख्याल तो सब्र जस्मानी है या रूहानी खुदा कदूस। अब्बा की तरफ से या अब प्लीज़ शैतान शरीर की तरफ से अगर तो नेगेटिव एविल थॉट है, शैतानी विचार उस एनर्जी को पकड़ लेता है
तो? जिस्म के काम तो ज़ाहिर है यानी हरामकारी नपा की शबद प्रस्ती भूत प्रस्ती जादूगरी अदावती झगड़ा हसन गुस्सा तफरी के जुदाईयाँ बिद्यते बुग़ज। नशेबाजी, नाच, रंग और और इनकी माने अगर डिवाइन थॉट खुदा बाप कदूस का विचार उस नज्जी को इस्तेमाल करता है, मगर रूह का फल मोहब्बत। खुशी इत्मीना, तहमूल, मेहरबानी, नेकी, ईमानदारी हिल और ये एनर्जी है, ऊर्जा है, खून में होती है और जो। रगों में नशों में खून के द्वारा काम करती है और फिर जिस्म के वसी इसलिए की खुदा आई है जिसने फरमाया
की तारीख में। से नूर चमके और वो ही हमारे दिलों में चमका ताकि खुदा के जलाल की पहचान का नूर इस मसीह के चेहरे से जलवा कर हो। खून में जो एनर्जी है जान इसको। यु तसव्वुर ख्याल के द्वारा काम करती है खून में जो एनर्जी है,
जान है उसे तसव्वुर ख्याल? जो है उनके द्वारा काम करती है, जमीने जिस्मानी ख्याल से ये जान खर्च होती है, खपत होती है। रूहानी इस्मानी नियत ख्याल इस जान को महफूज रखते हैं बलवंत बनाते हैं पॉज़िटिव थॉट हमारे खून को जो जान है दिल की शांति से। कंट्रोल करती है। यानी दिल में सब्र कितना है, शांति कितनी है तो ये कुदरत का न। जब कभी जहाँ भी किसी भी वजह से अपना कंट्रोल या बैलेंस होती है तो जमीन पर कितना नुकसान होता है?
जीसको हम अक्सीडेंट कहते हैं हादसा कहते हैं यानी हादसा। कहते हैं की कुदरत अपनी धुन और ताल में चल रही है, अपनी रफ्तार में और उसमें वक्त के अधीन इंसान चल रहा है। और इंसान के अंदर सोच ख्याल है। बहुत सा तो जब हम बैलेंस और कंट्रोल खोते हैं तभी नुकसान का सामना करना पड़ता है। चाहे कोई हमारे। सामने हो जाए। हम किसी के सामने तो नुकसान का सामना करना पड़ता है तो लाइफ नेचर स्पिरिचुअलिटी इससे कंट्रोल एंड बैलेंस सैयां इंसान। के पास सोच, ख्याल, ख्वाहिश और चुनाव करने की समर्थ है, ताकत है,
स्ट्रेंथ है, हालांकि कोशिश ही कर रहा है। हर इंसान अंडर थॉट ख्याल ख्वाहिश। इंसान की जिंदगी जितनी सब्र से और शांति से मामूर है, उतना ही लाइफ में बैलेंस कंट्रोल होगा और वो सब्र और शांति जिस्मानी है। यारुहानी। अगर जशमानी है तो उसकी एक उम्र होगी यानी कुछ वक्त तक ही रहेंगी। अगर रूहानी है तो वो वक्त के अधीन नहीं होती है, वरना रूह मरती है तो रूहानी शख्स कभी। अपना बैलेंस और कंट्रोल यानी सब शलोंग संयम नहीं होता। काम इंसान को लगता है मेरे साथ
जिंदगी में चीजें बुरी हो रही हैं या अच्छी हो रही हैं, बट नहीं। वो सिर्फ हो रहा है वक्त के गति, ना वो अच्छा है, ना बुरा, वो सिर्फ हो रहा है। अच्छा, बुरा हमारे ही ख्याल है और किस ख्याल और नियत से कुबूल करते हैं?
तो हमारी काबुलियत पे डिपेंड करता है वेलकम पर डिपेंड करता है सबर पर टिका हुआ है शांति पर और सबर और शांति ना होने पर टिका हुआ है। दूसरा ये है इंसान जब जीने की कोशिश। करना छोड़ता है, उम्मीद और ईमान छोड़ता है तब वो मौत को कुबूल करता है। असल में जब इंसान बुजुर्ग होता है तो हर तरह से अपनी ताकत खो चुका होता है। देखना, बोलना, चलना, सोचना खाना। तो फिर उसे जीने से बेहतर मौत अच्छी लगती है। वो इससे अच्छा मौत को बेहतर समझता है, कुबूल करना पसंद करता है या नतीजा हम मौत के साये में हर एक।
पल उम्मीद और विश्वास में वक्त के अधिक जिंदगी में कायम रहते हैं और जिंदगी को अपने आप में मगर जीस दिन जीस समय समर्थ खो देते हैं और उम्मीद का ना रहना, विश्वास का ना रहना और जीस तरह हम बाकी दुनिया। भागदौड़ में लगी हुई है। वैसे ना रह पाना ही बहुत है। मतलब कि हम जीने की कोशिश करते हैं। अगर कोशिश और उम्मीद भरकर आ रहे हैं तो इंसान कभी नहीं मर सकता। मतलब कि हम। क्या एक्सेप्ट कर रहे हैं या डिनै
कर रहे हैं? मौत और जिंदगी उस पे काम करता है और कंट्रोल और बैलेंस जुड़ा है। ईमान के साथ और। ईमान जुड़ा है हमारी कल्पना और ख्याल नियत इरादे दिली ख्वाहिश के साथ और दिल ही इरादे जुड़े हैं। हम क्या देखते हैं, क्या सुनते हैं, क्या बोलते हैं, हम प्रोड्यूस क्या करते हैं, क्या कर रहे हैं? और रस्सी यानी कबूल क्या कर रहे
है? दान प्रदान के 1 टेक एंड किस नीयत से किस इरादे से इंसान मरता नहीं बल्कि अच्छी और बुरी याद बन के जिंदा रहता है। अपनों में, अपनों के ख्याल में, दिल में, भावनाओं के तौर पर और समाज उसे याद रखता है।
उसने काम क्या किए? और वो अपना एक असर छोड़ता है जमीन पर। कामों के वसीले और यादों के वसीले पैदा होना और मर जाना इस संसार की अपनी मान्यता है कि संसार की एक अपनी रूह है। संसार एक अपने आप में ही अलग इंसान है। उसकी एक अपनी। वे उसका एक अपना नजरिया है, अपना किरदार है, अपनी ठाठ है, अपना ख्याल है, नियत है, संसार टिका है, चलता है जिस्मानी अभिलाष पर जो संसारिक जीवन जीना चुन लेता है, कबूल कर लेता है वो इंसान। कब भगवान संसार का भगवान है इंसान इसके अधीन ही नहीं यानी संसार
जिसकी अपनी हीरो ख्याल इरादे का इंसान है। सांसारिक जीवन जीने वाला जो सांसारिक जीवन की चॉइस। करता है, कुबूल करता है उसका ये भगवान एक संसारिक ईश्वर है, खुदा है डिस्मानी जिंदगी जीने वाले का नीयत इरादे रखने वाले का खुदा।
