हम इंसान पारिवारिक तौर पर शरीर सांसारिक तौर पर रिश्ते तो रखते हैं, रिश्तों में तो हैं क्या हम इंसान? रिश्ते के मुताबिक यानी हक यानी सच्चाई की रू से और सच्चाई की रू के मुताबिक कलामे मुकद्दस के मुताबिक रुइल कुच के मुताबिक। समझ भी रखते हैं, एहसास भी रखते हैं, जज्बात रखते हैं और अगर सिर्फ रिश्ते ही रखते हैं मगर। रूहे हक यानी वो रिश्ते पाक दिल नेकनीयत बैरिया इमाम से उस रिश्ते में मोहब्बत नहीं रखते तो वो। रिश्ते मुर्दा हैं क्योंकि खुदा पाक मोहब्बत है वो दुनिया का कोई
भी रिश्ता क्यों न हो? एक कलाम में लिखा है कि बिराद राना मोहब्बत कायम रहे। अगर किसी को दूसरों की शिकायत हो यानी गिला शिकवा हो तो एक दूसरे की। बर्दाश्त करे और एक दूसरे के कसूर मुआफ करे मुआफ कबूल करनी है जैसे खुदावन ने तुम्हारे कसूर मुआफ किए, वैसे ही तुम भी करो। और इन सब के ऊपर मोहब्बत को जो कमाल का पटका है बांधो आज का जो प्रकाशन है मुखशपा है वो हमारे जो फैम्ली रिलेशनशिप है, रिश्ते हैं उसके। बारे में है। ये खुदा का फज़ल है कि हम मसीह में मसीह की देह में एक परिवार है
आसमान परिवार है, रूहानी परिवार है फैमिली है बा शर्ते कि हम। मस्सी की रूह से कलाम के मुताबिक समझती हूँ। यानी कोई भी रिश्ता, बाप, बेटा, माँ, भाई, बहन, दोस्त, वाइफ। यानी शौहर, बीवी, शौहर इनसे एक परिवार बनता है इन रिश्तों की वजह से और ये रिश्ते खुदा की बख्शिश है खुदा की बख्शिश। ये खुद की ओर से मगर सवाल ये है क्या हम उन रिश्तों को, खुदा के नज़रिए से यानी रूहे खुदा रूहे हक के मुताबिक समझते हैं?
जानते हैं? और खुदा का फजल समझकर बख्शिश समझकर तोहफा समझकर गिफ्ट समझकर रिश्ते की कदर करते हैं, उस तरह जलाल देते हैं। जीस तरह खुदा को जलाल। देना चाहिए। जीस तरह हम खुदा को जलाल देते है, उसी तरह जो खुदा का गिफ्ट है, बक्शी है हमारी ज़िन्दगी में यानी रिश्ते हैं, खुदा का जलाल इससे है की हम। जो उसकी बख्शिश है यानी जो रिश्ते हैं, अगर उसको खुदा के बराबर, उसको जलाल इज्जत कदर ना करे तो खुदा को जलाल देना भी बेफायदा है। अगर हम रिश्ते को और रिश्ते में जो कोई भी हमारा परिवार का मेंबर
है, खुदा के तुल्य खुदा में नहीं समझते यानी कहने का मतलब क्या है
कि? हम सब यशव के लहू के खरीदे हुए हैं तो हमें किसी को किसी के कैरेक्टर के हिसाब से नहीं देखना, जिससे मान्य तौर पर क्योंकि लिखा है कि अगर हम मसीह को भी जिस्म के तौर पर जानते हैं तो अब से नहीं जायेंगे। क्योंकि हम कर्जदार तो हैं, मगर जिस्म के नहीं, मगर रोके तो हमें एक दूसरे को रूह में देखना है लहू में देखना है लहू किसका है ऐशमसी का रूह में देखना है अगर हम रिश्ते को। और रिश्ते में जो कोई भी हमारा पारिवारिक मेंबर है, जिसके साथ हम रिश्ते में हैं, खुदा के तुल्य खुदा में नहीं समझते तो हम जो
मसीह में हैं और जो कलाम को सुनते हैं, समझते हैं, चाहे पढ़ते हैं। तो अगर रिश्ते या उस रिश्ते को जो कोई पारिवारिक मेंबर कोई भी उसका आदर नहीं करते तो हम किसका निराधर करते हैं खुदा?
बाप की बक्शिश का, खुदा बाप की मिराज का तो हम बाप का ही निरादर कर रहे हैं क्योंकि रिश्ते और रिश्तों का होना और रिश्ते में होना। समझना और निभाना ये एक दूसरे को समझना है और ये रिश्ते जो हैं वो वो बलिदान से चलते हैं। एहसास से चलते हैं। देखिए खुदा ने। नेत नीयत पाकदिल बेरिया ईमान से चलते हैं। देखिए खुदा ने दुनिया से ऐसी मोहब्बत की कि अपना कहौता बेटा बख्श लिया। खुदा ने दुनिया से ऐसी मोहब्बत रखी। कि उसने अपना इकलौता बेटा बक्शी दिया था कि जो कोई उस पर इमाल है हलक न हो, बल्कि हमेशा की जिंदगी
पर बाप का दुनिया के साथ रिश्ता कैसा है?
जीस तरह बेटे का बाप, दुनिया से उतनी मोहब्बत। रखता है। जीस तरह एक बाप अपने बेटे से रखता है और रखी जो शब्द है वो इस बात को ज़ाहिर करता है की शुरू से ही इब्तेदा से ही पैदाइश से ही। वो दुनिया को बेटे के साथ बेटे की मानद मोहब्बत रखता है इसलिए उसने जिससे वो बहुत मोहब्बत रखता है उसको कुर्बान कर दिया सैक्रिफ़ाइस कर दिया। बलिदान कर दिया। यानी रिश्ते में बलिदान करना किस बेटे के लिए जो न फरमान है, जो अण आज्ञाकारी है, न फरमान है। जो बाप के कहने पर कभी नहीं चला, जिसने कभी बाप का हुक्म नहीं माना
बल्कि बाप के साथ हमेशा बगावत की मुखालफत की तो उसके लिए कौन सा बेटा? कुर्बान कर दिया। उसके गुनाहों की मुनाफी के लिए कफारे के लिए कौन सा बेटा कुर्बान कर दिया, जो बाप का प्यारा है? ये मेरा प्यारा बेटा है जिससे मैं
खुश हूँ वो किसके लिए? कुर्बान कर दिया फरमान बरदार बेटा हुक्म को मानने वाला बेटा मर्जी को पूरा करने वाला बेटा बाप की अधीनताई में चलने वाला बेटा यानी मासी यसु बाप की मर्ज़ी को पूरा करने वाला बेटा। हुक्म को पूरा करने वाला बेटा है। पाप मुझ से इसलिए मोहब्बत रखता है की मैं अपनी जान देता हूँ ताकि उसे फिर ले लूँ कोई उसे मुझसे छीनता नहीं बल्कि मैं उसे आप ही देता हूँ मुझे उसके। देने का भी इंतजार है और उसके फिर लेने का भी इंतजार है। ये हुक्म मेरे बाप से मुझे मिला
यानी भाई ने भाई के लिए जान दी। बाप के हुक्म पर यहाँ एक रिश्ता रोशन होता है। ज़ाहिर होता है। जिसमें मोहब्बत है सबसे पहले और इमान है और रूहानियत है और पाकीज़गी है बाप अब्बा का मतलब है। पाक मोहब्बत रूहानी मोहब्बत येसु रूहानी बेटा है यानी फज़ल और सच्चाई की रूप आसमानी बेटा है यानी दूसरा आदम फरमाबरदार बेटा है हुक्म को पूरा करने वाला और बाप की मर्जी को पूरा करने वाला। आज्ञाकारी बेटा और जमीनी जिस्मानी आदम यानी दुनिया है जमीनी जिस्मानी बेटा, जो ना फरमान है, जो हुक्म की खिलाफत करता है,
हुक्म को पूरा नहीं करता। बाप की मर्जी पर नहीं चलता बल्कि अपनी मर्जी बाप में पूरी करता है, अपनी ख्वाहिशों के मुताबिक और बाप से अपनी मर्जी पूरी करवाता है। मैं तुम्हें एक नया हुक्म देता हूँ कि एक दूसरे से मोहब्बत रखो कि जैसे मैंने तुमसे मोहब्बत रखी, तुम भी एक दूसरे से मोहब्बत रखो, अगर आपस में मोहब्बत रखोगे तो इससे सब जायेंगे कि तुम मेरे शागिर्द हो। हुक्म का मकसद ये है ध्यान से सुन लीजिए कि पाक दिल और नेक नीयत और बेरिया इमाम से मोहब्बत पैदा हो। मोहब्बत सबिर है और मेहरबान
मोहब्बत हसन नहीं करती, मोहब्बत शेख ही नहीं मारती। और फूलती नहीं नजेबा काम नहीं करती, अपनी बेहतरी नहीं चाहती, झुंझुलाती नहीं बदगुमानी नहीं करती। बदकारी से खुश नहीं होती, बल्कि रास्ते से खुश होती है। सब कुछ सह लेती है। सब कुछ यकीन करती है, सब बातों की उम्मीद रखती है। सब बातों की बर्दाश्त करती है गरज इमान, उम्मीद, मोहब्बत ये तीनों दाहिमी है मगर अफज़ल इनमें मोहब्बत तुम सुन चूके हो की कहा गया था अपने पड़ोसी से। मोहब्बत रख और अपने दुश्मन से अदावत ये मुसाकी शरियत की तालीम
है। पुराने अहदनामे की तालीम है, लेकिन फ़ज़ल की रु। सच्चाई की रु। यानी ऐशा मसीह की तालीम क्या है? लेकिन मैं तुमसे ये कहता हूँ। की अपने दुश्मनों से मोहब्बत रखो और अपने सताने वालों के लिए दुआ मांगो ताकि तुम अपने बाप के जो आसमान पर है बेटे ठहरों क्योंकि
वो अपने सूरज को बड़ो और नेको? यानी गुनहगारों बंदकरों और जो नेको का रु है दोनों पर चमकाता है सूरज यानी यशमसी जो रास्तेबाजी का सूरज है और रास्ते बाजों और नाराजों दोनों पर नहीं बरसाता है। क्योंकि अगर तुम अपने मोहब्बत रखने वालों ही से मोहब्बत रखो तो तुम्हारे लिए क्या अजहर है? क्या मैं सून लेने वाले भी ऐसा नहीं करते और अगर तुम फखत अपने भाइयों ही को सलाम। करो तो क्या ज्यादा करते हो? क्या गैर कोमों के लोग भी ऐसा
नहीं करते? बस चाहिए की तुम कामिल हो जैसा तुम्हारा आसमानी बाप का मिल है। बहुत आसान शब्दों में समझिए की खुदा, जिसे हम परमेश्वर कहते हैं या। जीस भी नामों से आप अब्बा पिता पुकारना हैं। अब्बा का मतलब है मोहब्बत पिता का मतलब है मोहब्बत मोहब्बत का मतलब है पिता अगर हम खुदा में चलते हैं मगर मोहब्बत नहीं करते। नेक नियत से पाक दिल से किसी दूसरे से तो क्या अपने परिवार में से ही नेक नियत पाक दिल से मोहब्बत नहीं रखते अच्छे इरादे से नेक नियत से फिर जो ये श्व। का खुदा हमारे खुदा ऐशमसी खुदा का
बाप खुदाबंद का बाप आप उसके अधीन नहीं वो कोई और खुदा हो सकता है वो कोई और इस्सू हो सकता है अगरमसी में हो? आपके पास मोहब्बत का प्रकाशन नहीं, आपको मोहब्बत की समझ ही नहीं कलाम ए हक के मुताबिक रूहे हक के मुताबिक फजल और सच्चाई के रूह के मुताबिक अनुग्रह के मुताबिक और वो मोहब्बत हमारे दिल। नीयत, इरादे इच्छा से पाक इरादे की हमारी ज़िन्दगी ही उस मोहब्बत की गवाही नहीं देती, ना ही हमारी जुबान। तो फिर आप जीस भी खुदाबंद का दावा करते हैं येसू नाम में?
आप भी झूठे हैं, आपका यसु भी दुनियाबी है, झूठा है, जिस्मानी है जीस तरह के आप हैं, उस तरह का आपका यसु है और आपका यसु भी झूठा है और आपका खुदा भी झूठा है। उग्र मसीह में होकर कलाम को जानते सुनते समझते हुए भी मोहब्बत का प्रकाशन नूर आपके दिल में रोशन नहीं है, चमका नहीं है तो आप मुर्दा दिल हैं और। मुर्दा मसीह हैं तो जो हम गवाही देते हैं कि मसीह येशवा तीसरे दिन मुर्दो में से जिंदा है, वो भी झूठी है। अगर सच्चे बाप की मोहब्बत ज़ाहिर नहीं करते दुनिया में तो। सब कुछ झूठ है और झूठी मसी ज़िन्दगी है।
शिवाय श मसीह के और आसमानी खुदा बाप के सिवा किसी ने, किसी ने मोहब्बत की ही नहीं जो मूसा की शरीयत है ना? तो उसके 10 हुकुम है, ना ही उसके 613 हुकुम है, खुदा एक रु है और हुकुम भी एक ही है वो क्या है आपस?
की मोहब्बत के सिवा किसी चीज़ में किसी के कर्जदार ना हो। हमें ये सिखाया जाता है ना कि 10 हुक्म है। शेसु तिराहुक्म ना तो 10 हुक्म है ना ही शेसु तिराहुक्म एक ही हुक्म है, एक ही खुदा है, एक ही बेटा है। एक ही रूह है आपस की मोहब्बत के सिवा किसी चीज़ में किसी के कर्जदार ना हो क्योंकि जो दूसरे से मोहब्बत रखता है उसने शरियत पर पूरा अमल किया क्योंकि ये बातें की जिन्ना न कर, खून न कर चोरी न कर लालच न कर और इनके सिवा और जो कोई हुक्म हो, उन सबका खुलासा इस
बात में पाया जाता है कि अपने पड़ोसी से अपनी मानद मोहब्बत रख। मोहब्बत अपने पड़ोसी से बदी नहीं करती। इस वास्ते मोहब्बत शरियत की तामील है और वक्त को पहचान कर ऐसा ही करो क्योंकि सारी शरियत पर एक ही बात से पूरा अमल हो जाता है। यानी इससे। कि तू अपने पड़ोसी से अपनी मानद मोहब्बत रख, लेकिन अगर तुम एक दूसरे को काटते और पाड़े खाते हो तो खबरदार रहना की एक दूसरे का सत्यानाश ना कर दो क्योंकि जिसने सारी शरियत पर अमल किया और एक ही बात में खत की। यानी। मोहब्बत नहीं की वो सारी बातों
में कसूरबा ठहरा। इसलिए कि जिसने ये कहा कि जीना ना कर उसी ने ये भी कहा कि खून ना कर बस अगर तू ने जीना तो ना किया मगर खून किया यानी मोहब्बत ना की। तो भी तू शरियत का अदूल करने वाला ठहरा। इब्रानी का पहला ही शब्द है एल ऐफ़ यानी खुदा एक है जमीनों आसमान को पैदा करने वाला बनाने वाला यानी अलोही मेदोनाही और वो जलाल का बाप नूरों का बाप है। मगर खुदा क्या है? मोहब्बत आसमानी मोहब्बत रूहानी मोहब्बत ए उस्ताद तुरेत में यानी ये शमसी तुरेत में कौन सा हुक्म
बड़ा है? उसने उससे कहा कि खुदाबंद अपने खुदा से। अपने सारे दिल और अपनी सारी जान और अपनी सारी अकल से मोहब्बत रख बड़ा और पहला हुक्म यही है और दूसरा उसकी मानद ये है कि अपने पड़ोसी से अपने बराबर मोहब्बत रख इन्हीं दो हुक्मों पर तमाम तुरेत अरबिया के सहीफों कामदार हैं। यानी एल ऐफ़। यानी हुकुम यानी पहला हुकुम, लेकिन हम इससे भी बेवक्त है। अब इस हुकुम को पूरा करने का वक्त भी गुजर चुका है। शरीयत के अधीन ये न समझो। कि मैं तुरेत या नभियों की किताबों को मनसूख करने आया हूँ,
मनसूख करने नहीं बल्कि पूरा करने आया हूँ कि मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जब तक आसमान और जमीन टल न जाए, एक नुक्ता या एक शोषा तुरेत से हरगिज़ न टलेगा। जब तक सब कुछ पूरा ना हो जाए ये सूने सलीब पर कहा तमाम हुआ पूरा हुआ क्योंकि रुइल कुछ जो हमको बख्शा गया है, उसके वशीले से खुदा की मोहब्बत हमारे दिलों में डाली गई है। क्योंकि जब हम कमजोर ही थे तो ऐन वक्त पर मसी बेदिनियों की खातिर मोया किसी रास्ते बाज धर्मी की खातिर भी मुश्किल से कोई अपनी जान देगा।
मगर शायद किसी ने एक आदमी के लिए कोई अपनी जान तक दे देने की जरूरत करे। लेकिन खुदा अपनी मोहब्बत की खूबी हम पर यूं ज़ाहिर करता है कि जब। हम गुनहगार ही थे तो मसीह हमारी खातिर मंया बस जब हम उसके खून के बस अब रास्तबा चरे तो उसके फुशीले से गज्बे इलाही से जरूर ही बचेंगे, क्योंकि जब बाजू दुश्मन होने के खुदा से उसके बेटे की मौत के फुशीले से हमारा मेल हो गया
तो? मेल होने के बाद तो हम उसकी ज़िन्दगी के सबब से जरूर ही बचेंगे और सिर्फ यही नहीं बल्कि अपने खुदावन यसुमसी के सबब जिसके वशीले से अब हमारा खुदा के साथ मेल हो गया खुदा पर फखर भी। करते हैं। मोहब्बत इसमें नहीं मोहब्बत इसमें नहीं, शरीयत के अधीन के हमने खुदा से मोहब्बत की बल्कि इसमें है फसल और सच्चाई के अधीन कि उसने हमसे मोहब्बत की और हमारे गुनाहों के कफारे के लिए अपने बेटे को भेजा। ए अज़ीज़ ज़ो जब खुदा ने हमसे ऐसी मोहब्बत की तो हम पर भी एक दूसरे
से मोहब्बत करनी फर्ज है। खुदा को कभी किसी ने नहीं देखा। अगर हम एक दूसरे से मोहब्बत करते हैं तो खुदा हम में रहता है और उसकी मोहब्बत हमारे दिल में शामिल हो गई है। रूल कुछ के वसीले क्योंकि उसने अपने रूह में से हमें दिया है। इसे हम जानते हैं कि हम उसमें कायम रहते हैं और वो हम में और हमने देख लिया है और गवाही देते हैं कि बाप ने बेटे को दुनिया का मुनजी करके भेजा है। जो कोई इकरार करता है कि ये सु खुदा का बेटा है खुदा उसमें रहता है और वो खुदा में जो मोहब्बत
खुदा को हमसे है उसको हम जान गए और हमें उसका यकीन है खुदा मोहब्बत है और जो मोहब्बत में कायम रहता है वो खुदा में कायम। रहता है और खुदा उसमें कायम रहता है। इसी सबब से हम मोहब्बत हम में शामिल हो गई है और क्योंकि तुम बेटे हो इसलिए खुदा ने अपने बेटे के रूह हमारे दिलों में भेजी जो अब्बा यानी ये बात क्या है कहकर पुकारना है। हम इसलिए मोहब्बत करते हैं की पहले उसने हमसे मोहब्बत की अगर कोई कहे की मैं खुदा से मोहब्बत रखता हूँ और वो अपने भाई से अदावत
रखे तो झूठा है क्योंकि जो अपने भाई से जिसे उसने देखा है, मोहब्बत नहीं रखता, वो खुदा से भी जिसे उसने नहीं देखा, मोहब्बत नहीं। रख सकता और हमको उसकी तरफ से ये हुक्म मिला है कि जो कोई खुदा से मोहब्बत रखता है वो अपने भाई से भी मोहब्बत रखे। सबसे बढ़कर ये है कि आपस में बड़ी मोहब्बत रखो क्योंकि मोहब्बत बहुत से गुनाहों पर पर्दा डाल देती है। पसगौर से देखो। कि किस तरह चलते हो नादानों की तरह नहीं बल्कि दानाओं की माने चलो और वक्त को गनीमत जानो क्योंकि दिन बुरे हैं। इस सब से नादान ना बनो बल्कि
खुदावंत की मर्जी को समझो कि क्या है?
बस अज़ीज़ फर्जन्दों की तरह खुदा की मानद बनो और मोहब्बत से चलो जैसे मसीह ने तुमसे मोहब्बत की और हमारे वास्ते अपने आप को खुशबू की मानद खुदा की नजर करके कुर्बान किया। इसलिए वो कहता है की ऐश होने वाले जाग और मुर्दो में से जी उठ तो मसीह का नूर तुझ पर चमकेगा बस गौर से देखो की किस तरह चलते हो नादानों की तरह नहीं बल्कि दानाओं की मानी चलो और वक्त को घनी मत जानो क्योंकि। दिन बुरे हैं। इस सबब से नादान ना बनो बल्कि खुदावन की मर्जी को समझो की क्या है और मसीह के खौफ से एक दूसरे किताबे रहो अब बीवी हो अपने
शोहरों की ऐसी ताबी रहो जैसे खुदावन की क्योंकि शौहर बीवी का सिर है। जैसे की मसी क्लीसिया का सर है अब बीवी अपने शोहरों की ऐसी ताबी रहो जैसे खुदाबंद की, क्योंकि शोहर बीवी का सर है जैसे की मसी क्लीसिया का सर है और वो खुद बदन का बचने वाला है, लेकिन जैसे। क्लिसिया मसीह के ताबी हैं, वैसे ही बीवियां भी हर बात में अपने शोहरों के ताबी हूँ ए शोहरू अपनी बीवियों से मोहब्बत रखो। जैसे की मशीन ने भी ग्लिसिया से मोहब्बत करके अपने आप को उसके वास्ते मौत के हवाले कर दिया ताकि
उसको कलाम के साथ, पानी से घुसल देकर और साफ करके मुकद्दस बनाये। और एक ऐसी जलाल वाली कलिसियां बना के अपने पास हाजिर करें जिसके बदन में दाग या झुर्रियां कोई और ऐसी चीज़ ना हो बल्कि पाक और बेअब हो। इसी तरह शोहरों को लाजिम है की अपनी बीवियों से अपने बदन की मानें तो मोहब्बत रखें जो अपनी बीवी से मोहब्बत रखता है वो अपने से मोहब्बत रखता है ये कभी किसी ने अपने जिस्म से?
दुश्मनी नहीं की बल्कि उसको पालता और परवरिश करता है। जैसे कीमसी क्लीसिया को इसलिए कि हम उसके बदन के अज़ू है। बा हर हालः तुम में से भी हर एक अपनी बीवी से अपनी मन्नद मोहब्बत रखे और बीवी इस बात का ख्याल रखे कि अपनी शोहर से डरती रहे। चुनौती सारा इब्राहिम के। हुक्म में रहती और उसे खुदावन कहती थी। तुम ये जान लो कि हर पुरुष का सिर मसीह है और स्त्री का सिर पुरुष है और मसीह का सिर परमेश्वर है।
नेकोकार बीवी किसको मिलती है? क्योंकि उसकी कदर मरजान से भी बहुत ज्यादा है, उसके शोहर के दिल का उस पर इत्तेमाद है और उससे मुनाफा की कमी ना होगी। वो अपनी उम्र के तमाम अय्याम में उससे नेकी ही करेगी। बदी ना करेगी। वो ऊन और कतान ढूंढती है और खुशी के साथ अपने हाथों से काम करती है वो सौदागरों के जहाजों की मानंद है वो अपनी खुरीश। दूर से ले आती है। वो रात ही को उठ बैठती है और अपने घराने को खिलाती है और अपनी लौंडियों को काम देती है। वो किसी खेत की बाबत सोचती है। और उसे खरीद लेती है और अपने
हाथों के नफा से ताकिस्तान लगाती है। वो मजबूती से अपनी कमर बांधती है और अपने बाजुओं को मजबूत करती है। वो अपनी सौदागरी को सुदमंद। पाती है रात को उसका चिराग नहीं बुझता वो तकले पर अपने हाथ चलाती है और उसके हाथ अटेरन पकड़ते हैं वो मुफुलसिया। की तरफ अपना हाथ बढ़ाती है। हाँ वो अपने हाथ मोहताजों की तरफ बढ़ाती है। वो अपने घिरने के लिए बर्फ़ से नहीं डरती क्योंकि उसके खानदान में हर एक सुर्ख पोष है। वो अपने लिए निगारें भालापोश बनाती है। उसकी पोशाक महीन कतानी और अगवानी
है। उसका शौहर फाटक में मशहूर है। जब वो मुल्क के बुजुर्गों के साथ बैठता है, वो महीन कतानी कपड़े बना कर बेचती है। और फट के सौदागरों के हवाले करती है। इज्जत और हुरमत उसकी पोशाक है और वो आइंदा अज्ज़ाम पर हंसती है। उसके मुँह से हिकमत की बातें निकलती हैं। उसकी जबान पर शफाकत की तालीम है। वो अपने घराने पर बखूबी निगाह रखती है और कहली की रोटी नहीं खाती। उसके बेटे उठते हैं और उसे मुबारक कहते हैं। उसका शौहर भी उसकी तारीफ करता है। की बहतेरी बेटियों ने फजीलत दिखाई है लेकिन तू सब पर शबकत ले गई
हुस्न धोखा और जमाल बे सब बात है लेकिन वो औरत जो खुदाबंद से डरती है सितुदा। होगी। उसकी मेहनत का अजहर उसे दो और उसके कामों से मजलिस में उसकी सिफारिश होगी। किसी बड़े उम्र वाले को मुलामत ना कर बल्कि बाप जानकर नसीहत कर। और जवानों को भाई जानकर और बड़ी उमर वाली औरतों को माँ जानकर और जवान औरतों को कमाल पाकी से बहन जानकर उन बेवा औरतों की जो वाकई बेवा हैं, इज्जत कर और अगर किसी
बेवा के बेटे या पोते हों? तो वो पहले अपने ही घराने के साथ दिनदारी का बर्ताव करना और माँ बाप का हक अदा करना सीखें, क्योंकि ये खुदा के नजदीक पसंदीदा है जो वाकई बेवा है और उसका। कोई नहीं वो खुदा पर उम्मीद रखती है और रात दिन मुनाज़त और दुआओं में मशगूल रहती है। अगर कोई अपनों और खासकर अपने घराने की खबर गिरी ना गिरे तो ईमान का मुनकर और बेईमान से बदतर है। अपने पिता और अपनी माता का आदर करना जिसे जो देश तारा परमेश्वर यवा तुझे देता है उसमें तू बहुत
दिन तक रहने पाए बच्चे को उसी मार्ग पर चलना सिखाओ जीस पर उसे चलना चाहिए वह। बूढ़ा होने पर भी उससे नहीं हटेगा। बुद्धिमान पुत्र अपने पिता को अनन्दित करता है, परंतु मूर्ख अपनी माता को तुच्छ जानता है। ए मेरे पुत्र अपने पिता की शिक्षा पर कान लगा और अपनी माता की शिक्षा को ना त्याग। जो अपने घराने को बिगाड़ता है, उसका भाग केवल वायु ही होगा और मूर्ख बुद्धिमान का दास बनेगा। नफा का लालची अपने घराने को परेशान करता है, पर वो जीसको रिश्वत से नफरत है, जिंदा रहेगा। नेक औरत अपने शौहर के लिए ताज है
परंतु निकम्मी पत्नी उसकी हड्डियों में सडन के समान है। अब बीवियों जैसा खुदाबंद में मुनासिब है अपने शौहरों के ताबी रहो ए शौहर अपनी बीवियों से मोहब्बत रखो और उनसे। तल्ख मिजाज़ी ना करो ए फर्जन्दो हर बात में अपने माँ बाप के फ़रमान बर्बाद रहो, क्योंकि ये खुदाबंद में पसंदीदा है। ये बच्चे वालो अपने फर्जन्दो को परेशान दुखी ना करो ताकि वो बेदिल ना हो जाएं। ए नो करो। जो जिस्म के रू से तुम्हारे मालिक हैं। सब बातों में उनके फ़्रमाबदार रहो। आदमियों को खुश करने वालों की तरह दिखावे के लिए नहीं बल्कि साफ
दिली और खुदा के खौफ से जो काम करो जिसे करो। ये जानकर की खुदावन के लिए करते हो ना आदमियों के लिए?
क्योंकि तुम जानते हो की खुदावन की तरफ से इसके बदले में तुम को मिरास मिलेंगे तुम खुदावन मसीह की खिदमत करते हो क्योंकि जो बुरा करता है वो अपनी बुराइ का बदला पायेगा वह किसी की तरफ। दारी नहीं बच्चे इहवा की ओर से विरासत हैं। संतान उसकी ओर से प्रतिफल है और वो मिरास इमान किस से मिलती है ताकि फज़ल के तौर पर हो और फज़ल और से चाहे की मरफत पहुंची उसकी माँ मुरी में से हम सब नहीं पाई यानी फज़ल पर फज़ल। ये बात सच है की जो शख्स निगाहबान का ओहदा चाहता है, वो अच्छे काम
की ख्वाहिश करता है। बस निगाहबान को बेइलज़ाम, एक बीवी का शोहर पहेज़गार मुक्ता की शाइस्ता मुसाफिर परवर। और तालीम देने के लायक होना चाहिए। नशे में गुल मचाने वाला या मारपीट करने वाला ना हो बल्कि हलीम हो, ना तकरारी ना दोस्त अपने घर का बखूबी बंदोबस्त करता हो और अपने। बच्चों को कमाल संजीदा से ताबी रखता है। जब कोई अपने घर ही का बंदोबस्त करना नहीं जानता तो खुदा की कलसिया की क्यों कर खबर गिरी करेगा ना?
मुरीद ना हो ताकि गुरुर करके कहीं की। सी सजा ना पाए और बाहर वालों के नजदीक भी नेक नाम होना चाहिए ताकि मुलाकात में और अब्लिस के फंदे में ना फंसे। इसी तरह खादिमों को भी संजीदा होना चाहिए। दो जबान। और शराबी और नज़ायज नफ़ा के लालची ना हो और ईमान के भेद को पाक दिल में हीफ़ाद से रखें और ये भी पहले आजमाए जाएं। इसके बाद अगर वे इलज़ाम ठहरें तो खिदमत का काम करें। इसी तरह औरतों को भी संजीदा होना चाहिए, तोमत लगाने वाली ना हो बल्कि परहेजगार और सारी बातों में
इमानदार हूँ। खादिम एक एक बीवी के शौहर हूँ और अपने अपने बच्चों और घरों का बखूबी। बंदोबस्त करती हूँ कि जो खिदमत का काम बखूबी अंजाम देते हैं, वो अपने लिए अच्छा मर्तबा और उस ईमान में जो पर है बड़ी दिलेरी हासिल करते हैं। अब फर्ज़ंडो कुदामन में अपने माँ बाप के फरमा बरदार रहो। क्योंकि ये वाजिब है अपने बाप की और माँ की इज्जत करें। ये पहला हुक्म है जिसके साथ वादा भी है ताकि तेरा भला हो और तेरी उम्र जमीन पर दराज़ हो और ए बच्चे वालो, तुम अपने फर्जबों को गुस्सा ना दिलाओ।
बल्कि खुदाबंद की तरफ से तबियत और नसीहत दे देकर उनकी परवरिश करो। ऐन नौकरो जो जिस्म के रूप से तुम्हारे मालिक हैं, अपनी सावदिली से डरते और कांपते हुए उनके। ऐसे फ़रमाबदार रहो जैसे मस्सी के और आदमियों को खुश करने वालों की तरह दिखावे के लिए खिदमत ना करो बल्कि मस्सी के बंदों की तरह दिल से खुदा की मर्जी पूरी करो और उस खिदमत को आदमियों की नहीं बल्कि खुदाबंद की। जानकर जी से करो क्योंकि तुम जानते हो कि जो कोई जैसा अच्छा काम करेगा वह गुलाम हो, वह आजाद खुदावन से वैसा ही पाएगा और ए
मालिक हो तुम भी धमकियों छोड़कर। उनके साथ ऐसा ही सलूकर क्योंकि तुम जानते हो कि उनका और तुम्हारा दोनों का मालिक आसमान पर है और वो किसी का तरफदार नहीं। मैं इसी कारण उस पिता के सामने घुटने टेकता हूँ। जिसे स्वर्ग और पृथ्वी पर हर एक घराने का नाम रखा जाता है कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें ये दान देखी। तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यता में सामर्थ्य पाकर। बलवंत हो तेजव और विश्वास के द्वार मसीह तुम्हारे हृदय में बसे के तुम प्रेम में जड़ पकड़कर और
नींव डालकर सपवित्र लोगों के साथ भलीभाँति समझने की शक्ति पाओ के। उसकी चौड़ाई और लम्बाई और उचाई और गहराई कितनी है और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे कि तुम परमेश्वर की साड़ी भरपूर तक परिपूर्ण हो जाओ। अब जो ऐसा सामर्थ्य है कि हमारी विनती और समझ से। कहीं अधिक काम कर सकता है। उस सामर्थ्य के अनुसार जो हम में कार्य करता है क्लीसिया में और मसीसिया में उसकी महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक जुगानों युग होती रहे आमीन उसी एशिया में।
