चलो सेशा में आप सबगी सलामती हो तो आज का जो विषय है उसका टाइटल है चुना जाना मुलाहट इफ्तार और सिफा कलाम सुनने से नहीं, सच्चाई की रूह से कबूल करने से। काम करता है। कलाम सुनने से नहीं सच्चाई की रूह से रूआख से कबूल करने से काम करता है। सारा ने जब खुदा के वादों को। कलाम को सच्चाई के रूह से कबूल किया तब ही मरे हुए शरीर में मुर्दा गर्भ में उसने संतान को पैदा करने की ताकत पाई। तो मसला कलाम सुनने का नहीं है, मसला है, कलाम को सच्चाई की रू से कबूल करने का है। सच्चाई की रू से कबूल करोगे तो ही
मुर्दापन जो है। हमेशा की अपनी जिंदगी में बदलेगा मुर्दा सेहत जिंदगी में बदलेगी। मसला ये है कि आपका दिल कहाँ लगा हुआ है। बस दिल की हिफाजत करें वही जिंदगी का सर चश्मा है तो ये श मसीहा राफेल आलोही में दो नई है तो जब आपका दिल कलाम में होगा तो सच्चाई से कुबूल करोगे तो कलाम मुजिस्म
होगा आपकी जिंदगी में और आप? में भी काम करेगा और आपके लिए काम करेगा, आपके वसीले काम करेगा। उसी तरह मेरा कलाम जो मेरे मुँह से निकलता है होगा वो बेइंज़ाम मेरे पास वापस ना आएगा बल्कि जो कुछ। मेरी ख्वाहिश होगी वो उसे पूरा करेगा और उस काम में जिसके लिए मैंने उसे भेजा मुअस्सिर होगा क्योंकि तुम खुशी से निकलोगे और सलामती के साथ रवाना किए जाओगे। मसलन एक तरफ आपको बहुत तेज भूख लगी है और आपके मनपसंद का लज़ीज़ खाना है और दूसरी तरफ खुदा का कलाम और बीच में है दिल तो दिल से
ये तो। होगा कि आपका दिल कहाँ है? लज़ीज़ खाने की तरफ खाने का भूखा है या वचन सुनने का?
बेशक जितनी मर्जी ऊंची आवाज़ में कलाम सुनाओ, वो आपके सामने बहरे। की माननिंद है, क्योंकि हमारा दिल लज़ीज़ खाने की तरफ होगा। अब इसके उलट दुनिया भर के बड़े से बड़े चेफ आपके लिए खाना उन्होंने बनाया हो। और दुनिया का लज़ीज़ खाना अगर आपका दिल खुदा के कलाम में लगा हुआ है तो वो खाना और शेफ कुछ मायने नहीं रखते। कुछ भी नहीं तो मसला हमारे दिल का है। मसीह में तो हैं। मसीह में हमें हमारी बुलाहट का कालिंग का पता होना बहुत जरूरी है और उस बुलाहट में हमें क्या इख्तियार है किस बारे में
इख्तियार है इसके बारे में आसमान से आसमानी बाप से मसीहेश में इख्तियार का ज़ाहिर होना बहुत जरूरी है। हमें बच्चन को अपनी कालिंग के मुताबिक फॉलो करना है जो इख्तियार कुदरत मसी में मसी से मसी में हासिल है उसके मुताबिक मसीह में मसीह के रू में चलना है रुलकुच की हदई से सजाई के रू से ना के अंधे, ना समझ गुमराह मसीह की तरह। बगैर कालिंग के बगैर विज़न के, मसी ज़िन्दगी, गैर मसीह से भी बेकार है। बगैर कालिंग के बगैर विज़न के मसीह लाइफ गैर मसीह से भी बेकार है। लिखा है जहाँ रोया नहीं, जहाँ
विजन नहीं, जहाँ कॉलिंग नहीं वहाँ लोग बेकैद हो जाते हैं यानी बेकाबू यानी कहने से बाहर हुक्म से बाहर ना फरमानी के बेटे। स्वाभाविक मुख़ालिफ़े मसीह तबई मोहम्मद से खाली रूल कुच के मुखालिफ सच्चाई किरू के मुखालिफ जोआना ने जवाब में कहा इंसान कुछ नहीं पा सकता जब तक उसको आसमान से न दिया जाए। ये सु ने उससे जवाब दिया कि अगर तुझे ऊपर से ना दिया जाता तो तेरा मुझ पर कुछ तैयार ना होता, तुमने मुझे नहीं चुना बल्कि मैंने तुम्हें चुन लिया और तुमको मुकर्रर किया कि जाकर।
फल, लव और तुम्हारा फल कायम रहता कि मेरे नाम से जो कुछ बाप से मांगो वो तुमको दे बस मैं जो खुदावन में कैदी हूँ तुमसे इल्तिमाज़ करता हूँ कि जीस बुलावे से बुलाहट में कालिंग से तुम बुलाए गए थे। उसके मुनासिब चाल चलो की हदायत से मसीह के रूह में सच्चाई के रूह में मगर जैसा खुदावन ने हर एक को हिस्सा दिया है और जीस तरह खुदा ने हर एक को बुलाया है। ईमान के अंदाजे के मुआफिक ईमान के अंदाजे के मुआफिक बुलाया है, उसी तरह वो चले, नाके अंधे और गुमराह मसीह की तरह जीसको अपनी कालिंगा
कुछ पता नहीं। और जिसके पास रोया नहीं है, विज़न है ही नहीं लेकिन तुम एक बरगुजीदा नस्ल शाही कहिनों का फिरका मुकद्दस कौम और ऐसी मत हो जो खुदा की खास मल्कीयत है तांकी उसकी खूबियाँ ज़ाहिर करो। जिसने तुम्हें तारीकी से अपनी अजीब रौशनी में बुलाया है, बल्कि तुम पहले उसकी बादशाती यानी रूल को सच्चाई की रू हिकमत की रू मुक्कास्वा की रू बादशाहत खुदा की रू। और उसकी रास्तबाजी यानी रास्तबाजी जो ईमान से है, ईमान से है, ईमान के वसीले है, ईमान की रास्तबाजी की तलाश करो, तो ये सब चीजें भी तुम्हें मिल जाएंगी।
किसकी तलाश करनी है बादशाहत? और ईमान की रास्तेबाजी की तो ये सब चीजें भी तुम्हें मिल जाएंगी, लेकिन आज लोग अपने बदन की मशक्कत से चीजों को पाना चाहते हैं। शरीयत के मुताबिक पुराने कानून को 10 हुक्मों को मानकर पाना चाहते हैं। नहीं आसी लोग ए भाइयों, अपने बुलाए जाने पर तो निगाह करो की जिस्म के लिहाज़ से बहुत से हाकिम बहुत से इख्तियार वाले बहुत से अशरफ नहीं बुलाए गए बल्कि खुदा ने दुनिया के बेवकूफों। को चुनरिया की हाकीमों को शर्मिंदा करे और खुदा ने दुनिया
के कमजोरों को, चुनिया की जोरावरों को शर्मिंदा करे और खुदा ने दुनिया के कमीनों और हाकीरों को बल्कि बेवजहों को चुन लिया की मज़दूरों को निस्ता करे ताकि कोई बशर खुदा के सामने फक्र घमंड ना करे, लेकिन तुम उसकी तरफ से मसीह यशव में हो जो हमारे लिए खुदा की तरफ से हिकम ठहरा यानी रास्तेबाजी और पाकीज़गी और मक्लसी?
ताकि जैसा लिखा है वैसा ही हो की जो फक्र करे, घमंड करे वो कुदावन पर फक्र करे। नेमते यानी कालिंग की बात हो रही है बुलाहट की बात हो रही है नेमते तो तारा तारा की हैं, मग रू एक ही है। और खिदमतें भी तरह तरह की हैं मगर खुदाबंद एक ही है यानी कालिंग की बात हो रही है और तासीरें भी तरह तरह की है मगर खुदा एक ही है जो सब में हर तरह का अस्त्र पैदा करता है। लेकिन हर शख्स में रू का जहूर फायदा पहुंचाने के लिए होता है, क्योंकि एक को रू के वसीले से हिकमत का कलाम इनायत होता है और दूसरे को उसी रू की मर्जी के
इलमियाद का कलाम किसी को उसी रू से ईमान। और किसी को उसी एक रूह से शिफा देने की तौफीक किसी को मौजजों की कुदरतें, किसी को नबूवत, किसी को रूहों की इम्तियाज़ किसी को। तरह तरह की जबानी किसी को जुबानों का तर्जमा करना लेकिन ये सब तसीरें वही एक रू करती है और जीसको जो चाहती है बांटती है। और हम में से हर एक परमसी की बख्शिश के अंदाज़े के मुहाफिक फजल हुआ है इसी वास्ते वो कहता है कि जब वो आर्मी बाला पर चढ़ा तो कैदियों को साथ ले गया और आदमियों को इनाम दिए उसके।
चढ़ने से और क्या पाया जाता है? सिवा इसके कि वो जमीन के नीचे के इलाके में उतरा भी था और ये उतरने वाला वो ही है जो सारे आसमानों से भी ऊपर चढ़ गया ताकि सब चीजों को करे। और उसी में बांस को रसूल रसूल होता है जो रूल कुछ की हदाय से चलता है। रसूल और बांस को 90 और बांस को मुबाशिर। और बांस को चरवाहा और उस्ताद बनाकर दे दिया, ताकि मुकद्दस लोग का मिल बने और खिदमत गुजारी का काम किया जाए और मसीह का बदन तरक्की पाए यानी क्लीसिया। जब तक हम सब के सब खुदा के बेटे के ईमान और उसकी पहचान में एक ना
हो जाए और कामिल इंसान ना बने यानी ईमान के बानी और कामिल करने वाले मसेयसिया को तख्त रहे यानी कामिल इंसान ना बने यानी मसीह के। पूरे कद के अंदाज़े तक ना पहुँच जाए और खुदा ने कलिसिया में अलग अलग शख्स मुकरर की है। पहले रसूल दूसरे नब्बी, तीसरे उस्ताद फिर मौजिज़े दिखाने वाले, फिर शिफा देने वाले। मददगार मुन्ताजिम तरह तरह की ज़बानें बोलने वाले क्या सब रसूल है? कहने का मतलब है कि क्या सबको यही कालिंग है? क्या सब नबी हैं क्या सब उस्ताद? क्या सब मौजाद दिखने वाले हैं? क्या सब को इशफा देने की कुबती
नायत हुई क्या? सब तरह तरह की जुबानी बोलते हैं क्या सब पर जुमा करते हैं? तुम बड़ी से बड़ी नीमों की अर्दू रखो। फिर उसने अपने। 12 शगिरतों को पास पहले क्या किया? पास बुलाया पास बुलाकर उन्हें नापाक रूहों पर इख्तियार बख्शा।
क्या बख्शा? इख्तियार बक्सा गुलाहट इख्तियार कि उनको निकालें। और हर तरह की बिमारी हर तरह की कमजोरी को दूर करें। पहले बुलाया इख्तियार बक्सा और ये एक बुलाहट है, कालिंग है और इख्तियार है पहले बुलाहट है और फिर इख्तियार है और इख्तियार किन चीजों पर दिया। नापाक रूहों पर और हर तरह की बिमारी और हर तरह की कमजोरी को दूर करें। किसी को चंगा करना और नापाक रूह इख्तियार ये। खुदा की कुदरत है, यानी नापाक रूहों से लोगों को आजाद करना। शिफा बक्शना यानी मौजजा ये एक बुलाहट है। खुदा की कुदरत है, बक्शिश फजल है।
हर तरह की बिमारी और तरह की कमजोरी को दूर करें तो सबसे पहले अपनी कालिंग को बुलाहट को पहचानना बहुत जरूरी है और मसीह यशया की तरफ से इख्तियार मिलना बहुत जरूरी है। सिंपल शब्दों में अगर कोई पुलिस ऑफिसर है जीस, किसी भी ओहदे पर हो, आर्मी ऑफिसर हो, जब तक हैयर अथॉरिटी से उनको ऑर्डर नहीं आ जाता, वो अपनी मर्जी से ऑफिसर होते हुए भी। लाचार है या उन्हें कोई भी अक्शॅन लेने के लिए हर डिपार्टमेंट को जो उनके ऊपर अथॉरिटी है, उससे इजाजत लेनी पड़ती है बिना इजाजत के फिर?
उस काम के मुताबिक उसका एक एक्स्पर्ट एक्सपीरियंस ऑफिसर नियुक्त किया जाता है और उसके साथ उसके अंडरस्टैंडिंग की टीम इसी तरह। हमारे बच्चे हैं, स्कूल में पढ़ते हैं या कोई भी किसी तरह की स्टडी कर रहे हैं या कोई स्किल सीख रहे
हैं? आप अपने बच्चे के लिए जीस सब्जेक्ट में इन्ट्रेस्ट रखता है उसके लिए उस सब्जेक्ट। का है। एक्सपीरियंस्ड टीचर एक्स्पर्ट को नियुक्त करेंगे। स्किल के तौर पर बच्चा म्यूसिक में इंटरेस्ट रखता है तो म्यूसिक में आ म्यूसिक में। सास है, आवाज़ है और रिदम है। तो जो हमारा बच्चा सीखना चाहता है, जिसमें हमारे बच्चे का इंट्रेस्ट है, हम उस टीचर से उस्ताद से सिखाएंगे तो इस एग्ज़ैम्पल से दृष्टा से आपको समझ आ जाना चाहिए कि मैं क्या कहने की कोशिश कर रहा हूँ।
समझाने की कोशिश कर रहा हूँ कि। हम मसीह में होते हुए कुछ भी अपनी मर्जी से नहीं कर सकते। कुदरत तो मसीह के नाम में है, मगर उस कुदरत से अगर हम इजाज़त लिए बिना उस कुदरत। जैसे कलाम लेखा ने खुदा का व्यर्थ नाम ना लो खुदा का व्यर्थ नाम ना लो और वो इख्तियार दिया जाता है ठीक है वो इख्तियार आसमान से दिया जाता है कुदरत ने। आपको इख्तियार दिया जाता है उस कुदरत का, क्योंकि पहले खुदा चुनता है, ठीक है हम खुदा को नहीं चुनते, खुदा हमें चुनता है, मर्जी खुदा की है, हमारी नहीं।
हमने रूल कुश की हदई से चलना है ना की रूल। कुश ने हमारी हदई से चलना है अगर आप मसीह में होते हुए अपनी मर्जी के मुताबिक चल रहे हैं। अपने स्वाभाविक सोच के मुताबिक अपनी मर्जी से कुछ भी किए जा रहे हैं। कि दिमाग में एक इल्ल्यूशन क्रिएट किया उसके हिसाब से करना शुरू कर दिया। इंसान ने। रूस स्वाभाविक इरादे से तो उसका खामियाजा खामियाजा बोल रहा हूँ। उसका खामियाजा भी उस इंसान को भुगतना पड़ेगा। तो भी उसने हमारी मशक्कतें उठा लीं और हमारे गमों को बर्दाश्त
किया पर हमने उसे खुदा का मारा कूटा सताया हुआ समझा। हालांकि वो हमारी कथाओं के सबब से घायल किया गया और हमारी। बद किरदार के 22 कुचला गया। हमारी ही सलामती के लिए उस पर सियासत हुई ताकि उसके मार खाने से हम शिपा पाएं। वो टूटे दिलवालों को चंगा करता है और उनके घावों पर पट्टी बांधता है। हे मेरे दिल यहवा की स्तुति कर और उसके किसी उपकार को ना भूलना वही तो तेरे सब पापों को शमा करता है और तेरे सब रोगों को चंगा करता है ये यहवा मुझे चंगा कर, तब मैं चंगा हो जाऊंगा। मुझे बचा तब मैं बच जाऊंगा
क्योंकि मैं तेरी स्तुति करता हूँ ए मेरे बेटे मेरी बातों पर तवज्जो कर फोकस ध्यान दे मेरे कलाम पर कान। कॉल लगा उसको अपनी आँख से, अपनी सोच से, ख्याल से, विज़न से थॉट प्रोसेसर से, विचारों से ओझल ना होने दे, उसको अपने दिल में रख। क्योंकि जो इसको पा लेते हैं, ये उनकी हयात है यानी जिंदगी है और उनके सारे जिस्म की सेहत है अपने दिल की खूबी फज़द कर क्योंकि जिंदगी का सर चश्मा वही है खुदावन उसे। बिमारी के बिस्तर पर संभालेगा तो कलाम क्या कहता है की जो बिमारी
का बिस्तर है तू उसकी बिमारी में उसके पूरे बिस्तर को ठीक करता है?
ए प्यारे, मैं ये दुआ मांगता हूँ कि जीस तरह तू रूहानी तरक्की कर रहा है। इसी तरह तू सब बातों में तरक्की करे और तंदरुस्त रहे। जब हम रूहानी तरक्की करते जाते हैं तो ही तंदरुस्त रहेंगे। ए प्यारे, मैं ये दुआ मांगता हूँ कि जीस तरह तू रूहानी तरक्की कर रहा है, रूहानी तरक्की कर रहा है यानी कर रहा है। इसी तरह तू सब बातों में तरक्की करे और तंदरुस्त रहे। यानी रूहानी तरक्की। जैसे जैसे करोगे तो तंदरुस्त रहोगे, क्योंकि मैं फिर तुझे तंदरुस्ती और तेरे जख्मों से शिफा बख्शूंगा खुदावन फरमाता है।
कहने का मतलब अगर तंदरुस्त इंसान नहीं है तो वो। रूहानी तरक्की में नहीं है। अगर रूहानी तरक्की है तो ही तंदरुस्ती उसमें कायम रहती है की मैं फिर तुझे तंदरुस्ती और तेरे जख्मों से शिफा बख्शूँगा खुदावन फरमाता है। अगर तू दिल लगाकर खुदावन अपनी खुदा की बात सुनें ईमान सुनने से पैदा कर सुन ना मसीह के कलाम से और उसको सच्चाई के रूह से कबूल करना है सिर्फ सुनना नहीं है और वो ही काम करे जो उसकी नजर में भला है और उसके हुक्मों को माने और उसके। ऐन पर अमल करे तो मैं अब हुक्म क्या है?
रूलकुस की हदाय से मोहब्बत करना रूलकुस की वसीले खुदा की मोहब्बत हमारे दिलों में डाल गई। जब हुक्म आता है तो लोगों के मैएंड में 10 हुक्म आते हैं। वो हम उसके अधीन नहीं है। इस वक्त सलीब के बाद सलीबी कुर्बानी के बाद हम उसके पूरी दुनिया आदमजात उसके अधीन नहीं रहे। जब हुक्म का मकसद है बेरिया ईमान, बेरिया मान नेक नियत। और पाक दिल से मोहब्बत पैदा हो रूलकुच के वसीले खुदा की मोहब्बतें हमारे दिलों में डाली गई है तो हुक्म को माने यानी रूलकुच के वसीले मोहब्बत करें और उसके ऐन पर अमल करें तो मैं उन
बीमारियों में से जो। मैंने मिस्रियों पर यानी मिश्राइन का जो मतलब है वो है दोगुना स्ट्रेस, जिस्मानी स्ट्रेस, डिप्रेशन, टेंशन जो मैंने गुलामी मिसर। गुलामी का निशान है तो मैंने मिस्रियों पर जो बीमारियां भेदी यानी बीमारियां कहाँ पर है जिस्म में तो मिस्रियों पर भेदी तुझ पर कोई ना भेजूंगा क्योंकि मैं खुदा हूँ, तेरा शाफी हूँ। वो आप हमारे गुनाहों को अपने बदन पर लिए हुए सलीब पर चढ़ गया ताकि हम गुनाहों के अतबार से मरकर रास्तेबाजी के अतबार से जिए और
उसके मार खाने से तुमने सिफा पाई तो उसने तो सिफा दे दी। क्या आपने सच्चाई के रूप में सिफा कबूल की? मसला ये है कि आप ने शिफा कबूल की या नहीं की सच्चाई के रूह से वो अपना कलम नाज़िल फरमा कर उनको शिफा देता है।
क्या कर कर कलम नाज़िल फरमा कर? और उनको उनकी हलाकत से रिहाई बख्शता है और वो कलाम है मासी येशा फजल और सच्चाई से मामूर कलाम उसकी मामूरी में से हम सबने पाए। यानी फसल पर फसल क्योंकि फसल और सच्चाई। हे मेरे परमेश्वर एथोनाई एलोहिम यौवा मैंने सहायता के लिए तुझको पुकारा और तुने मुझे चंगा किया है। जब शाम हुई तो उसके पास बहुत से लोगों। को लाए, जिनमें बदरूएं थीं। उसने रूहों को जबान ही से कहकर निकाल दिया और सब बीमारों को अच्छा कर दिया ताकि जो ये साया नबी की इमारत कहा गया था वो पूरा
हो कि उसने आप हमारी। कमजोरियां ले ली और बीमारियां उठा ली, क्योंकि मैं फिर तुझे तंदरुस्त और तेरे जख्मों से सिफाबख्शुंगा खुदाबुद फरमाता है, बस। जब हमारा एक ऐसा बड़ा सरदार काही है जो आसमानों से गुजर गया यानी खुदा का बेटा यसू तो आओ हम अपने इकरार पर टाइम रहे क्योंकि हमारा ऐसा सरदार काही नहीं जो हमारी कमजोरियों यानी बीमारियों में हमारा हमदर्द ना हो सके। बल्कि सारी बातों में हमारी तरह आजमाया गया था। हम बेगुनाह रहा, बस आओ हम फसल के तख्त के पास दिलेरी से चले ताकि हम पर रहम हो और वो फसल हासिल
करें जो जरूरत के वक्त हमारी मदद करें। इसलिए हम। हिम्मत नहीं हारते बल्कि गो हमारी सारी इंसानियत जायिल होती जाती है फिर भी हमारी बातीनी इंसानियत रोज़ ब रोज़ नहीं होती जाती है क्योंकि हमारी दम भर की हल्की सी मुसीबत हमारे लिए। अजहदत भारी और अवधि जलाल पैदा करती जाती है जीस हाल में की हम देखी हुई चीजों पर नहीं बल्कि अनदेखी चीजों पर नजर करते हैं क्योंकि देखी हुई चीजें चंद रोजा है मगर अनदेखी चीजें अवधि हैं।
