ब्लड ऑफ कैबिनेट खुदा के सात आसमानी बाप के साथ हमारा रिश्ता ईमान के वसीले मसीह के रू के वसीले खून का रिश्ता। इसलिए कि आज के इस टॉपिक का नाम रखा है। उसकी मेमोरी में से हम सब ने पाए। यानी फसल पर फसल, फसल और सच्चाई इमारत पहुंची। के रिश्ते जन्म। सांझा वंछा या वंछावली के माध्यम से व्यक्तियों के बीच के संबंधों को कहते हैं। जिनमें माता पिता, भाई, बहन, बुआ, चाचा और चचेरे भाई बहन शामिल है। पंजाबी में। पगड़ी का अदान परदान जिससे पगड़ी बदलना, एक्स्चेंज करना कहा जाता
है। पंजाब की एक गहरी जड़ें जमाई हुई संस्कृति है, शरा है, परंपरा है। जो एक स्थाई भाईचारा के रिश्ते को मजबूत करने का प्रतीक है, जिसे आमतौर पर भाईचारा कहा जाता है। पगड़ी का ये आदान प्रदान दो व्यक्तियों और उनके परिवारों को अक्सर पीढ़ियों तक एक साथ बांधता है जो। हर परिस्थिति में सुख दुख सांझा करने की प्रतिबन्धता को दर्शाता है। पगड़ी का प्रतीकात्मक महत्त्व पगड़ी पुरुष के समान आदर और गरिमा का प्रतीक है। इसे धारण करना उस सम्मान को साझा करने और दूसरे व्यक्ति को भाई के
रूप में स्वीकार करने का संकेत है यानी साइन है, सिंबल है भाईचारा और सम्मान एक बार पगड़ी का आदान प्रदान हो जाने के बाद दोनों। पुरुष एक दूसरे को खून के भाई की तरह मानते हैं और उनके परिवार भी एक दूसरे को प्रति समान सम्मान प्रदर्शित करते हैं। इतिहास के संदर्भ हालांकि इसे अक्सर मित्रता से जोड़ा जाता है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से इस कार्य ने गठबंधन और भाईचारों को मजबूत किया जिससे आपसी समर्थन और सुरक्षा सुनिश्चित हुई। मुँह बोला भाई का अर्थ है ऐसा भाई जो यानी वाचा मुँह की वाचा जुबान
की वाचा ऐसा भाई जो सगा रक्त संबंधी न हो, जिसके साथ ब्लड रिलेशनशिप कुछ नहीं है बल्कि स्नेह सामान्य वचन के कारण बनाया गया हो। ये एक पवित्र रिश्ता है जिसमें बिना खून के रिश्ते के भी भाई बहन की तरह प्यार और सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई जाती है। इसे बनाया हुआ है भाईया दीन भाई धर्मी साधक। भाई भी कहा जाता है। मुँह बोला भाई का अर्थ जो खून का रिश्ता ना होने पर भी मुँह से कहकर भाई माना गया है भावर्त जिसे सगा ना होते हुए वे दिल से भाई बनाया हो। और डॉक्टर ब्रदर।
अब कलाम के मुताबिक और तकरीबन सारी चीजें शरीयत के मुताबिक खून से पाक की जाती है यानी आदमा इब्रानी में कहते हैं और बगैर खून बहे मुनाफी नहीं होती नहीं होता क्योंकि जिस्म की जान खून में। है और मैंने मजबा पर तुम्हारी जानों के कफारे के लिए उसे तुम को दिया है कि उससे तुम्हारी जानों के लिए कफारा हो, क्योंकि जान रखने ही के सबब से खून कफारा देता है। इब्राहिम, जो मेरा दोस्त है। और ये नवस्ता पूरा हुआ कि इब्राहिम खुदा पर इमाल लाया और ये यानी उनके वादों को सच्चा माना
सच्चाई के रू से कुबूल किया और ये उसके लिए रास्तेबाजी गिना गया और वो खुदा का दोस्त कहलाया और मैं अपने और तेरे दरमियां और तेरे बा तेरी नस्ल के दौरान उनकी सब पुस्तों के लिए अपना अहद जो अबदी अहद होगा हमेशा का अहद होगा बंदू गा ता की मैं तेरा और तेरे बा, तेरी नस्ल का खुदा रहूँ और मैं तुझको और तेरे बा तेरी नस्ल को कनन का तमाम मुल्क। जिसमें तू परदेसी है, ऐसा दूंगा कि वो दाहिमी मल्कियत हो जाए और मैं उनका खुदा होऊंगा। फिर खुदा ने अब्राहम से कहा कि तू मेरे अहद को मान और तेरे बा, तेरी
नस्ल पुश्त दर पुश्त उसे माने और मेरा अहद जो। मेरे और तेरे दरमियां और तेरे बात तेरी नस्ल के दरमियां है और जिसे तुम मानोगे सो ये है कि तुम में से हर एक फरजंदे नरीना का। हतना किया जाए और तुम अपने बदन की खलड़ी का खतना किया करना और ये उस आहट का निशान होगा जो मेरे और तुम्हारे दरमयान है तुम्हारे यहाँ पुष्प, हर लड़के का खतना जब वो आठ रोज़ का हो। किया जाए। ख्वा वो घर में पैदा हो ख्वा उसे किसी परदेसी से खरीदा हो, जो तेरी नस्ल से नहीं लाजिमी है कि तेरे खानाजाद और तेरे जरखिरत का खतना किया जाए।
और मेरा अहद तुम्हारे जिस्म में अब्दी अहद होगा और वो फरजंदे नरीना जिसका खतना ना हुआ हो, अपने लोगों में से काट डाला जाए, क्योंकि उसने मेरा अहद तोड़ा। खुदाबंद फरमाता है। क्योंकि तुने यह काम किया कि अपने बेटे को भी जो तेरा इकलौता है, दरज न रखा है इसलिए मैंने भी अपनी जात की कसम खाई है कि मैं तुझे बरकत पर बरकत दूंगा और तेरी नस्ल को। बढ़ाते बढ़ाते आसमान के तार और समुंदर के किनारों की रेत की माननी कर दूंगा और तेरी औलाद अपने दुश्मनों के फाटक की मालिक होगी और तेरी नस्ल के वसीले से जमीन की सबक में।
बरकत पाएंगे। क्योंकि तुने मेरी बात मानी और ना इब्राहिम की नस्ल होने के सब से सब फर्जंद ठहरे बल्कि बल्कि ये लिखा है कि इस हाक ही से तेरी नस्ल कहलाएगी बस। इब्राहिम और उसकी नस्ल से वादे किए गए। वो ये नहीं कहता कि नस्लों से जैसा बहुतों के वास्ते कहा जाता है, बल्कि जैसा एक के वास्ते की तेरी नस्ल को और वो मसीह है और जो। मसीका है अगर उसमें मसीकी रू है तो वो मसीका है अगर मसीकी रू नहीं, वो मसीका नहीं। मेरा ये मतलब है कि जीस आहत की खुदा ने पहले से तसदीक की थी।
उसको शरियत 430 बरस के बाद आकर बात नहीं कर सकती कि वो वादा ला हासिल हो। ना खत, ना कोई चीज़ है ना नमक तुनी बल्कि खुदा के हुक्मों पर चलना ही सब कुछ है। हर शख्स जीस। हालत में बुलाया गया हो, उसी में रहे पर मसीयश्या में ना तो खतना कुछ काम का है, मसीयश्या में ना खतना कुछ काम का है, ना ना मक्तूनी। मगर इमान जो मोहब्बत की राह से असर करता है, इमान जो मोहब्बत की राह से असर करता है क्योंकि ना खतना कुछ चीज़ है। ना ना बल्कि नए सिरे से मख़लुक होना जो कोई मसीम है वो नहीं
श्रेष्ठ है इसलिए कि अगर कोई मसीम में आया तो वो नया मख़लुक है। पुरानी चीजें जाती रही देखो वो नहीं हो गई और सब चीजें खुदा की तरफ से है जिसने मसीह के वसीले से अपने साथ। हमारा मेल मिलाप कर लिया और मेल मिलाप की खिदमत हमारे स्पर्द्ध की। इस वास्ते वो निरास ईमान से मिलती है ताकि फसल के तौर पर हो और वो वादा कुल नस्ल के लिए कायम रहे। ना सिर्फ उस नस्ल के लिए जो शरियत वाली है बल्कि उसके लिए भी जो इब्राहिम की मानद ईमान वाली है, वो ही हम सबका बाप है।
बस क्या ये मुबारकवादी मक्तुनों ही के लिए है या नामक तुनों के लिए भी? क्योंकि हमारा दावा ये है कि इब्राहिम के लिए उसका इमार रास्त बाजी गिना गया? बस किस हालत में गिना गया मक्तुनी में या नामक तुनि में मक्तूनी में नहीं बल्कि नामक तुनि में और उसने?
खतना का निशान पाया कि उस ईमान की रास्तेबाजी पर मोहर हो जाए जो उसे नामकतुनी की हालत में हासिल था ताकि वो उन सब का बाग ठहरे जो बावजूद नामकतुं होने के ईमान लाते हैं और उनके लिए भी रास्तेबाजी महसूस की जाए। और उन मकतूनों का बाप हो जो ना सिर्फ मकतून है बल्कि हमारे बाप इब्राहिम के उस ईमान की भी पैरवी करते हैं जो उसे ना मकतूनी की हालत में हासिल था क्योंकि यह वादा कि वो। दुनिया का वारिस होगा, ना इब्राहिम से, ना उसकी नस्ल से शरियत के वसीले से किया गया था।
बल्कि ईमान की रास्तेबाजी के वसीले से क्योंकि अगर शरियत वाले ही वारिस हों। तो ईमान बेफाईदा रहा और वादा ल हासिल ठहरा। क्योंकि शरियत और गजब पैदा करती है और जहाँ शरियत नहीं वहाँ अदूल हुक्मी भी नहीं। इस वास्ते वो मिरास ईमान से मिलती है ताकि फसल के तौर पर हो और वो वादा कुल नस्ल के लिए कायम रहे। ना सिर्फ उस नस्ल के लिए जो शरियत वाली है बल्कि उसके लिए भी जो इब्राहिम की मानद ईमान वाली है वो ही हम सब का बाप है। खतरे से फायदा तो है बशर्ते कि तू शरियत पर अमल करे। लेकिन जब तू ने शरियत से अधूल
किया तो तेरा। खतना नामक तुनी डेरापस अगर नामक तुन शरियत के हुक्मों पर अमल करे तो क्या उसकी नामक तुनी खतने के बराबर ना गिनी जाएगी? और जो शख्स कौमियत के सबब से नामक तू रहा अगर वो शरियत को पूरा करे तो? क्या तुझे जो बावजूद कलाम और खत्ने के शरीर से अदूल करता है?
कसूरवार ना ठहराएगा क्योंकि वो यहूदी नहीं जो ज़ाहिर का है और ना वो खतना है जो जहरी और जिसमानी है बल्कि यहूदी। वो ही है जो बात इन में और खतना वही है जो दिल का और रूहानी है ना की लफ्ज़ी। ऐसे की तारीफ आदमियों के तरफ से नहीं बल्कि खुदा की तरफ से होती है। उसी में तुम्हारा ऐसा खतना हुआ जो हाथ से नहीं होता यानी मसीह का खतना। जिससे जिस्मानी बदन उतारा जाता है और उसी के साथ में दफन हुए और इसमें खुदा की कुवत पर ईमान लाकर जिसने उसे मुर्दो में से जलाया, उसके साथ जी भी उठे।
और उसने तुम्हें भी जो अपने कसूरों और जिस्म की नामक तुनी के सबब से मुर्दा थे उसके साथ जिंदा किया और हमारे सब कसूर मुहाव् किये और हुक्मों की वह दस्तावेज मिटा डाली जो हमारे नाम पर और हमारे खिलाफ़ थी। और उसको सलीब पर कीलों से जड़कर सामने से हटा दिया। उसने हुकूमतों और इकतियारों को अपने ऊपर से उतारकर उनका बरमाला तमाशा बनाया और सलीब के सबब से उन पर फतेहाबी का शादियां न बजाया। फिर उसने अहदनामा लिया। और लोगों को पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि जो कुछ खुदाबों
ने फ़रमाया शरिया तो मूसा की मारफत दी गई कुछ खुदाबों ने फ़रमाया उस सबको हम। करेंगे और ताबी रहेंगे कि जो कुछ खुदा ने शरीयत में मूसा की मारफत फरमाया है, उस सबको हम करेंगे और ताबी रहेंगे। तब मूसा ने उस खून को लेकर लोगों पर छिड़का और कहा, देखो, ये उस अहद का खून है। जो खुदा ने इन सब बातों के बारे में तुम्हारे साथ बांधा है। तब मूसा और हारून और नदाब और अबीहो और बनी इजरायल के 70 बुजुर्ग ऊपर गए। और उन्होंने इजरायल के खुदा को देखा और उसके पांव के नीचे नीलम के पत्थर का चबूतरा सा था जो
आसमान की मानिन शफाफ था। लेकिन जब मसीह आइंदा की अच्छी चीजों का सरदार काइन होकर आया तो उस बुजुर्ग तर और कामिल तर खेमे की राह से जो हाथों का बना हुआ यानी इस दुनिया का नहीं और बकरों और बछड़ों का खून लेकर नहीं बल्कि अपना ही खून लेकर पाक मकान में एक ही बार दाखिल हो गया और अब दी खलासी कराई क्योंकि जब बकरों और बैलों के खून और गायें की राख नापाकों पर छिड़के जाने से ज़ाहिर पकीज़ की हासिल होती है तो मसीह का खून जिसने अपने आप को अजली रुके वसीले खुदा के सामने ब्याब कुर्बान कर दिया।
तुम्हारे दिलों को मुर्दा कामों से क्यों ना पाक करेगा ताकि जिंदा खुदा की इबादत करें और इसी सबब से वो नए इहता का दरमियानी है ताकि उस मौत के वसीले से जो पहले के वक्त के कसूरों की माफी के लिए हुई है, बुलाए हुए लोग वादे के बा मुजीब अब्दी को हासिल करें क्योंकि जहाँ वसीयत है, वहाँ वसीयत। करने वाले की मौत भी साबित होनी जरूर है। इसलिए की वसीयत मौत के बाद ही जारी होती है और जब तक वसीयत करने वाला जिंदा रहता है, उसका इजरा नहीं होता। इसीलिए पहला अहद भी बगैर खून के नहीं बांधा गया।
चुनाची जब मूसा तमाम उम्मद को शरियत का हर एक हुक्म सुना चुका तो बछड़ों और बकरों का खून लेकर पानी और लाल ऊन और जूफा के साथ उस किताब और तमाम उम्मद पर छिड़क दिया और कहा कि ये उस सेहत का खून है जिसका हुक्म खुदा ने तुम्हारे लिए दिया है और इसी तरह उसने खेमे और इबादत की तमाम चीजों पर खून छिड़का और तकरीबन सारी चीजें शरियत के मुताबिक खून से पा की जाती है। और बगैर खून बहाए माफी नहीं होती। पर जरूर था कि आसमानी चीजों की नकलें तो इनके वसीले से पाग की जाए।
मगर खुद आसमानी चीजें इनसे बेहतर कुर्बानियों के वसीले से क्योंकि मसीह उस। हाथ के बनाए हुए पाक मकान में दाखिल नहीं हुआ, जो हकीकी पाक मकान का नमूना है। बल्कि आसमान ही में दाखिल हुआ था कि अब खुदा के रूबरू हमारी खातिर हाजिर हो क्योंकि मुमकिन नहीं। कि बैलों और बकरों का खून गुनाहों को दूर करें। इसलिए वो दुनिया में आते वक्त कहता है कि तुने कुर्बानी और नजर को पसंद ना किया बल्कि मेरे लिए एक बदन तैयार किया। पूरी शोकतनी, कुर्बानियों और गुनाह की कुर्बानियों से तू कुछ ना हुआ।
उस वक्त मैंने कहा कि देख मैं आया हूँ। किताब के वर्करों में मेरी निजबत लिखा हुआ है ताकि ये खुदा तेरी मर्जी पूरी करूँ। बस जीस तरह की रूल कुछ फरमाता है। अगर आज तुम उसकी आवाज सुनो तो अपने दिलों को सख्त ना करो। जीस तरह की गुस्सा दिलाने के वक्त आजमाइश के दिन जंगल में किया था। जहाँ तुम्हारे बाप दादा ने मुझे जांचा और आजमाया और 40 बरस तक मेरे काम देखे इसीलिए मैं उस पुश से नाराज हुआ और कहा कि इनके दिल हमेशा गुमराह होते रहते हैं और इन्होंने मेरी राहों को नहीं
पहचाना यानी ईमान की राह को। ने कहा, राहक जिंदगी मैं हूँ यानी चुनाची मैंने अपने गज़ब में कसम खाई ये मेरे आराम में दाखिल ना होने पाएंगे। ए भाइयों खबरदार तुम में से किसी का ऐसा बुरा और बेईमान दिल ना हो जो जिंदा खुदा से फिर जाए बल्कि जीस। रोज़ तक आज का दिन कहा जाता है। हर रोज़ आपस में नसीहत किया करो ताकि तुम में से कोई गुनाह के फरेब में आकर सख्त दिल ना हो जाए क्योंकि हम मसीह में शरीक हुए हैं। बाशर्ते की। अपने इब्तदायी भरोसे पर आखिर तक मजबूती से कायम रहे चुनाची कहा
जाता है कि अगर आज तुम उसकी आवाज सुनो तो अपने दिलों को सख्त ना करो। जीस तरह की गुस्सा दिलाने के वक्त किया था। किन लोगों ने आवाज सुनकर गुस्सा दिलाया? क्या उन सबने नहीं जो मूसा के वसीले मिसर से निकले थे और वो किन लोगों से 40 बरस तक नाराज रहा? क्या उनसे नहीं जिन्होंने गुनाह किया और उनकी लाशें भी या बान में
पड़ी रही? और किनकी बाबत उसने कसम खाई कि वो मेरे आराम में दाखिल ना होने पाएंगे, सिवा उनके जिन्होंने ना फरमानी की गरज हम देखते हैं कि वो बेईमाननी के सबक दाखिल ना हो सके अब से। मैं तुम्हें नौकर ना कहूंगा क्योंकि नौकर नहीं जानता कि उसका मालिक क्या करता है बल्कि तुम्हें मैंने दोस्त का है इसलिए कि जो बातें मैंने अपने बाप से सुनी वो सब तुमको बता दी। तुमने मुझे नहीं चुना बल्कि मैंने तुम्हें चुन लिया और तुमको मुकरर किया कि जाकर फलो और तुम्हारा फल
कायम रहता कि मेरे नाम से जो कुछ बाप से मांगो वो तुमको दे, मैं तुमको इन बातों का हुक्म इसलिए देता हूँ कि तुम एक दूसरे से मोहब्बत रखो। इसी तरह उसने खाने के बाद प्याला भी लिया और कहा कि ये प्याला मेरे खून में नया अहद है। जब कभी पियो, मेरी यादगीदी के लिए यही किया करो, क्योंकि जब कभी तुम ये रोटी खाते और इस प्याले में से पीते हो। तो खुदावन की मौत का इजहार करते हो। जब तक वो ना आए फिर उसने रोटी ली और शुक्र करके तोड़ी और ये कहकर उनको दी कि ये मेरा बदन है जो तुम्हारे वास्ते दिया जाता है
मेरी यादगिरी के लिए। यही किया करो और इसी तरह खाने के बाद प्याला ये कह कर दिया कि ये प्याला मेरे उस खून में नया अहद है जो तुम्हारे वास्ते बहाया जाता है। शेरशाह में आप सबों की सलामती हो।
