फजल और सच्चाई की रूह के अधीन मोहब्बत क्योंकि खुदा ने दुनिया से ऐसी मोहब्बत रखी कि उसने अपना इकलौता बेटा। बख्श दिया ताकि जो कोई उस पर इमाम लाए हलक न हो, बल्कि हमेशा की ज़िन्दगी पाए खुदाबद मेरे लिए सब कुछ करेगा और मैं दाऊद के घराने और येरूसलम के बाशिंदों पर फजल। और मुनाजत की रूह नाज़िल करूँगा और वो उस पर जीसको उन्होंने छेदा है नजर करेंगे और उसके लिए मातम करेंगे जैसा कोई अपने इकलौते के लिए करता है और उसके लिए। तलख्वाम होंगे जैसे कोई अपने पलौठे के लिए होता है।
उसकी मामूरी में से हम सबने पाया। यानी फजल पर फजल, मगर फजल और सच्चाई ये सुमसी की इमारत पहुंची। जो मोहब्बत खुदा को हमसे है। वो इससे ज़ाहिर हुई कि खुदा ने अपने इकलौते बेटे को दुनिया में भेजा है ताकि हम उसके सबब से जिंदा रहे। मोहब्बत इसमें नहीं कि हमने खुदा से मोहब्बत की। मूसा के 10 हुक्मों के अधीन शरियत के अधीन बल्कि इसमें है कि उसने हमसे मोहब्बत की फजल और सच्चाई के रुके अधीन और हमारे गुनाहों के कफारे के लिए अपने बेटे को भेजा। ए अज़ीज़ो जब खुदा ने हमसे ऐसी
मोहब्बत की। तो हम पर भी एक दूसरे से मोहब्बत करने का फर्ज है। खुदा को कभी किसी ने नहीं देखा। अगर हम एक दूसरे से मोहब्बत करते हैं तो खुदा हम में रहता है और उसकी मोहब्बत हमारे दिल में शामिल हो गई है क्योंकि उसने। अपनी रूह में से हमें दिया है। इसे हम जानते हैं कि हम उसमें कायम रहते हैं और वो हम में जो कोई इकरार करता है कि यीस्सु खुदा का बेटा है। हुदा उसमें रहता है और वो खुदा में। जो मोहब्बत खुदा को हमसे है, उसको हम जान गए और हमें उसका यकीन है। खुदा मोहब्बत है और जो मोहब्बत
में कायम रहता है वो खुदा में कायम रहता है और खुदा उसमें कायम रहता है। इसी सब से। मोहब्बत हम में कामिल हो गई है। मोहब्बत में खौफ नहीं होता बल्कि कामिल मोहब्बत खौफ को दूर कर देती है क्योंकि खौफ से अजब होता है और कोई खौफ करने वाला मोहब्बत में कामिल नहीं हुआ। हम और शरियत क्या करती है, गज़ब पैदा करती है घबराह। खौफ पैदा करती है। हम इसलिए मोहब्बत करते हैं कि पहले उसने हमसे मोहब्बत की क्योंकि खुदा ने हमें दहशत की रू नहीं क्योंकि खुदा ने हमें दहशत की रू नहीं, दहशत की रू शरीयत के
अधीन। पैदा होती है। मुसा के 10 बल्कि कुदरत और मोहब्बत और तरबियत की रू दी है। क्योंकि रूल कुछ जो हम को बक्सा गया है उसके मसले से खुदा की मोहब्बत हमारे दिलों में डाली गई है। मोहब्बत सबिर है और मेहरबान मोहब्बत हसद नहीं करती, मोहब्बत शेख ही नहीं मारती। और फूलती नहीं नजीबा काम नहीं करती, अपनी बेहतरीन नहीं चाहती झुंझुलाती नहीं बदगुमानी नहीं करती बदकारी से खुश नहीं होती बल्कि रास्ते से खुश होती है। सब कुछ सह लेती है, सब कुछ यकीन करती है, सब बातों की उम्मीद रखती
है। सब बातों की बर्दाश्त करती है। देखो बाप ने हमसे कैसी मोहब्बत की है कि हम खुदा के सृजंद कहलाए और हम हैं भी। दुनिया हमें इसलिए नहीं जानती की उसने उसे भी नहीं जाना। हमने मोहब्बत को इसी से जाना है कि उसने हमारे वास्ते अपनी जान दे दी और हम पर भी भाइयों के वास्ते जान देनी फंस, क्योंकि जब हम कमजोर ही थे तो ऐन वक्त पर मसी बेदिनियों। की खातिर मोया लेकिन खुदा अपनी मोहब्बत की खूबी हम पर यूं ज़ाहिर करता है कि जब हम गुनहगार ही थे तो मसीह हमारी खातिर मोया पज़ हम उसके।
खून के 22 अब रास्ता बाज ठहरे तो खुदा का फज़ल और उसकी जो बख्शिश एक ही आदमी यानी सुमसी के फज़ल से पैदा हुई। बहुत से आदमियों पर जरूरी इफ़रत से नाज़िर हुई। क्योंकि जब एक शख्स के कसूर के सब मौत ने उस एक के जरिए से बादशाही की तो जो लोग फजल और रास्तेबाजी की बख्शिश इफ़रत से हासिल करते हैं वो एक शख्स यानी यस्सुमसी के वसीले से। हमेशा की जिंदगी में जरूर ही बादशाही करेंगे। उसी तरह फजल भी हमारे खुदावन यसु मसीह के वशीले से हमेशा की जिंदगी के लिए राष्ट्रबाजी के जरिए से बादशाही करें क्योंकि मसीह की
मोहब्बत हमको। मजबूर कर देती है। इसलिए कि हम ये समझते हैं कि जब एक सबके वास्ते मोया तो सब मर गए और वो इसलिए सबके वास्ते मोया कि जो जीते हैं वो आगे को अपने लिए ना जिए। बल्कि उसके लिए जो उनके वास्ते मोया और फिर जी उठा वो आप हमारे गुनाहों को अपने बदन पर लिए हुए सलीब पर चढ़ गया ताकि हम गुनाहों के ऐतबार से, मरकर रस बाजी के ऐतबार से जिए। और उसी के मार खाने से तुमने सिपा पाई, मगर खुदा ने अपनी रहम की दौलत से उस बड़ी मोहब्बत के सबब जो उसने हमसे की जब कसूरों के सबब मुर्दा ही थे तो हमको मसीह के साथ
जिंदा किया तुमको फजल ही से निजात मिली है। और मसी यसू में शामिल करके उसके साथ जलाया और आसमानी मुकामों पर उसके साथ बिठाया ताकि वो अपनी उस मेहरबानी से जो मसी यसू में हम पर है आने वाले ज़मानों में। अपने फसल की बे निहायत दौलत दिखाई क्योंकि हमको ईमान के वसीले फसल ही से निजात मिली और ये तुम्हारी तरफ से नहीं, खुदा की बख्शिश है क्योंकि हम उसकी कारीगरी है और मसीयससु में उन्हें एक अमाल के वास्ते मखलूक हुए। जिनको खुदा ने पहले से हमारे करने के लिए तैयार किया था।
बस याद करो की तुम जिस्म के रू से गैरको वाले हो और वो लोग जो जिस्म में हाथ से किए हुए खत्मे के सबब मक्तून कहलाते हैं। तुमको ना मक्तून कहते हैं। अगले जमाने में मसीह से जुदा और इजरायल की सल्तनत से खारिज और वादे के अहदों से नावाकिफ और ना उम्मीद और दुनिया में खुदा से अलहिदा थे। मगर तुम जो पहले दूर थे अब मसीह यसु में। मसीह के खून के सबब से नजदीक हो गए हो क्योंकि वो ही हमारी सुलह है जिसने दोनों को एक कर लिया और जुदाई की दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। चुनौती उसने अपनी जिस्म के जरिए
से दुश्मनी यानी वो शरियत। जिसके हुक्म जाबी के तौर पर थे, मकफ कर दी ताकि दोनों से अपने आप में एक नया इंसान पैदा करके सुलाह करा दे और सलीब पर दुश्मनी को मिटाकर और उसके सब से दोनों को एक तन बनाकर खुदा से मिलाएं और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे और। उन्हें जो नजदीक थे, दोनों को सुलह की खुशखबरी दी, क्योंकि उसी के वसीले से हम दोनों की एक ही रूप में बाप के पास रसाई होती है। बस अब तुम परदेसी और मुसाफिर नहीं रहे बल्कि मुकद्दसों के हम वतन और खुदा के। घराने के हो गए और रसूलों और
नबियों की नींव पर जिसके कोने के सिरे का पत्थर कुदमसी यसु है, तामीर किये गए हो, उसी में हर एक इमारत मिल मिलाकर खुदावन में पाक मकदस बनती जाती है और तुम भी उसमें बाहम तामीर किये जाते हो?
ताकि रूह में खुदा का मस्कन बनो। सबसे बढ़कर ये है की आपस में बड़ी मोहब्बत रखो क्योंकि मोहब्बत बहुत से गुनाहों पर पर्दा डाल देती है। खुदा रूह है बल्कि खुदा सच्चा ठहरे और हर एक आदमी झूठा और मोहब्बत इसमें है। कि उसने हमसे मोहब्बत की और हमारे गुनाहों के खफारे के लिए अपने बेटे को भेजा, लेकिन जब वक्त पूरा हो गया तो खुदा ने अपने बेटे को भेजा ज़िन्दगी के दमकों। जो औरत से पैदा हुआ और शरियत के मताहत पैदा हुआ ताकि शरियत के मताहतों को मोड़ लेकर छुड़ा ले और हमको पालक होने का दर्जा मिले।
बच्चों के तुम बेटे हो इसलिए खुदा ने अपने। बेटे की रूह हमारे दिलों में भेजी जो अब्बा यानी ए बाप कह कहकर पुकारना यानी जिंदगी का दम इसके पास बेटा है, उसके पास जिंदगी है, जिसके पास बेटा नहीं उसके पास जिंदगी भी नहीं मस्सी जो हमारे लिए लाती बना। उसने हमें मोल लेकर शरियत की लालत से छुड़ाया, क्योंकि लिखा है कि जो कोई लकड़ी पर लटकाया गया वो लांती है। तहकीमसी यसु में इब्राहिम की बरकत गैरकुमो तक भी पहुंचे और हम ईमान के वसीले से उस रूह को हासिल करें जिसका वादा हुआ है। तुम किताबें मुकदस में ढूंढ़ते हो
क्योंकि समझते हो कि उसमें हमेशा की जिंदगी तुम्हें मिलती है और ये वो है जो मेरी गवाही देती है। ये ना समझो कि मैं तुरेत यानी मूसा की पहली पांच किताबें। यह नबियों की, किताबों को मनसूख करने आया मनसूख करने नहीं बल्कि पूरा करने आया हूँ क्योंकि क्योंकि सारे कामकाज किसने पूरे किए?
बाप ने खुदा उन खुदा ने क्योंकि मैं तुमसे सच कहता हूँ। की जब तक आसमान और जमीन टल ना जाए एक नुख्ता या एक शोषा तुरे से हरगिज ना टलेगा। जब तक सब कुछ पूरा ना हो जाए। फिर उसने फिर उसने उनसे कहा कि ये मेरी वो बातें हैं जो मैंने तुमसे उस वक्त कही थी। जब तुम्हारे साथ था की जरूर है की जितनी बातें मूसा के तुरेत और नबियों के शरीफों और ज़बूर में मेरी बाबत लिखी है पूरी हों। फिर उसने उनका जेहन खोला ताकि किताबे मुकद्दस को समझें। और उनसे कहा, यूं लिखा है कि
मस्जिद दुख उठाएगा और तीसरे दिन मुर्दो में से जी उठेगा और येरुशलम से शुरू करके सारी। कौमों में तौबा और गुनाहों की मुआफ़े की मनादी उसके नाम से की जाएगी। तुम इन बातों के गवाह हो। उसने उनसे कहा कि ए नादानों और नभियों की सारी बातों के। मानने में सुस्त इतका दो क्या मसीह को ये दुख उठाकर अपने जलाल में दाखिल होना जरूर न था?
फिर मूसा से और सबनब्बियों से शुरू करके सारे नविश्ते में जितनी बातें उसके हक में लिखी हुई हैं, वो उनको समझा दी। क्योंकि जिंदगी की रूह की शरियत ने मसी यसु ने मुझे गुनाह और मौत की शरियत से आजाद कर दिया। इसलिए की जो कम शरियत जिस्म के सबब कमजोर होकर ना कर सकी वो खुदा ने किया। यानी उसने। अपने बेटे को गुनाह अलुदा जिस्म की सूरत में और गुनाह की कुर्बानी के लिए भेज कर जिस्म में गुनाह की सजा का हुकुम दिया ना की शरीयत का तकाजा हमें बुरा हो जो जिस्म के
मुताबिक नहीं बल्कि रू के मुताबिक चलते हैं खुदा की शरीयत। खुदा पूरी करता है खुदा की शरियत है फज़ल की शरियत यानी फज़ल और इत्मिनान, जिंदगी और इत्मिनान जो इमान से जिंदगी और इत्मिनान की शरियत है रूहानी शरियत, तुम एक दूसरे का भार उठाओ और यूं। मसीह की शरियत को पूरा करो। इस सब से मैं उस भाब के आगे घुटने टेकता हूँ जिससे आसमान और जमीन का हर एक खानदान नामजद है कि वो अपने जलाल की दौलत के मुहाफित में ये इनायत करे कि तुम उसकी रूह से?
अपनी बातीनी इंसानियत में बहुत ही जुराव हो जाओ और ईमान के बुशीले से मसी तुम्हारे दिलों में सकून करे ताकि तुम मौहब्बत में जड़ पकड़ के और बुनियाद कायम करके सब मुकद्दसों समेत बखूबी मालूम कर सको कि उसकी चौड़ाई और लम्बाई और उचाई और गहराई कितनी है। परमसीह की उस मोहब्बत को जान सको जो जानने से बाहर है ताकि तुम खुदा की सारी ममूरी तक ममूर हो जाओ। अब जो ऐसा कादिर है की उस कुदरत के मुआफ़िक जो हम में तासीर करती है, हमारी और ख्याल से बहुत ज्यादा काम करता है।
कलिसिया में और मसीयसू में पुष्प दरपुष्क और अब्दुल आबाद उसकी तमजीद होती रहे। आमीन मसीयस में आप सबों की सलामती हूँ।
