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APOSTLE प्रेरित sheliach

Dec 20, 202527 min
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APOSTLE प्रेरित sheliach

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Transcript

एल ऐफ़ तब पंजाबी कायदा एल ऐफ़ तब पंजाबी कायदा नाम तो लाइव है। यशरी मेल ए फ्लिपकार्ट, जेडी शॉपिंग एप्लिकेशन या। फ्लिपकार्ट और अमेज़ॅन दे तो सी बाई कर सक देओ, खरीद सक देओ, उस ऐप्लिकेशैन तो ऑर्डर कर सक देओ, शब्द है जो इंग्लिश जुबान में तो तू सी जरूर। सुनयें समझ देवियो अपोस्टल यानी हिंदी विच प्रेरित उर्दू विच रसूल यानी रूहानी असूल। रूहानी असूल सिखाने वाला बताने वाला सुनाने वाला जीतने रूल कुछ के हद से चलते है। वो ही खुदा के बेटे है।

इब्रानी में अपोस्टल को प्रेरित को कहते हैं शैली आंख शैली आंख आह जो इब्रानी में पूरा शब्द है रू आंख यानी स्पिरिट। यानी रूह कुत की हदई से चलने वाला शैलिया यानी रुआख मतलब यानी जो रूह में एक हो जिसमें खुदा की रुहिल कुत हो, सो। अब आ मैं तुझे फिर उनके पास भेजता हूँ इब्रानी का शब्द है शैलिया खुदा रूह की तरफ से भेजा गया व्यक्ति। कि तू मेरी कॉम बनी इजराइल को मिस्र से निकाल ले, किसको कहा नूसा मोशेको देखो मैं अपने रसूल यानी शैलिया शैलिया रुएलकुस की हदाय से। चलने वाला रूलकुत की हदाय देने

वाला शैली आंख जो भेजूंगा यानी भेजा हुआ और वो मेरे आगे राह दुरुस्त करेगा। यानी ये जो। बुक्तिस्मा देने वाला यानी शरियत का आखिरी नबी, शरियत का शरियत तो मूसा की मार फट दी गई। शरियत का आखिरी नबी यन्ना बुक्तिस्मा देने वाला के हक में लिखा गया है, जो एलिया की रूह में चला जब से। तुम्हारे बाबदादा मूल के मिस्र से निकल आई अब तक मैंने तुम्हारे पास अपने सब खादिमोई यानी नभियों को भेजा, मैंने उनको हमेशा बरबख्त भेजा। लेकिन उन्होंने मेरी ना सुनी और कान न लगाया बल्कि अपनी गर्दन

सख्त की। उन्होंने अपने बाप दादा से बुराइ की। और अगर हमारी खुशखबरी पर पर्दा पड़ा है तो हलाक होने वालों ही के वास्ते यानी उन बेईमानों के वास्ते जिनकी अकल को इस जहाँ के खुदा ने अंधा कर दिया। तांकी मसीह जो खुदा की सूरत है, उसके जलाल की खुशखबरी कि रौशनी उन पर न पड़े। यानी आँखों को बंद किया हुआ। इस तरह पहले जमीनी जिस्मानी आदम और हवा की आँखों को बंद किया गया था और उसने फरमाया जा और इन लोगों से क्या है कि तुम सुना करो पर समझो नहीं तुम देखा करो और भूजो नहीं।

तू इन लोगों के दिलों को चरबा दे और उनके कानों को भारी कर और उनकी आंखें बंद कर दे, तना हो कि वो अपनी आँखों से देखे और। अपने कानों से सुनें और अपने दिलों से समझ लें और बाज आएं और शिफा पर उन्हें छोड़ दो। वो अंधेरा बताने वाले हैं और अगर अंधे को अंधा रहा बताएगा तो दोनों गड़े में गिर पड़ेंगे। और उनके हक में यशा या यानी यशया कि ये पशनगोई पूरी होती है कि तुम कानों से सुनोगे और हरगिज न समझोगे। और आँखों से देखोगे और हरगिज मालूम ना करोगे क्योंकि इस उम्मद

के दिल पर चर्बी छा गई है और वो कानों से ऊंचा सुनते हैं और उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली है। कहीं ऐसा ना हो कि आँखों से मालूम कर और कानों से सुनें और दिल से समझे और रज़ूल है और मैं उन्हें शिफाबकचू लेकिन मुबारक हैं तुम्हारी आँखें इसलिए कि वो देखती हैं और तुम्हारे कान जिसके कान हो वो सुने रूक्लिसियों से क्या कहते हैं?

और तुम्हारे कान इसलिए कि वो सुनते हैं कि मैं तुमसे सच कहता हूँ कि बहुत से डबियों और रास्ते बाजों को आरज़ू थी कि जो बातें तुम देखते हो देखें मगर ना देखें और जो बातें तुम सुनते हो। सुने मगर ना सुने यानी फ़ज़ल और सच्चाई की बात है फ़ज़ल और सच्चाई के प्रकाशन। मगर आज तक जब कभी मूसा की किताब पढ़ी जाती यानी शरियत तो मूसा की मार फट दी गई। यानी मूसा की पहली पांच किताबें यानी तोरा तो उनके दिल पर पर्दा पड़ा रहता है। लेकिन जब कभी उनका दिल खुदावन की

तरफ फेरेगा यानी फसल और सच्चाई के अधीन हो जाएगा दिल दिल की बात हो रही है जिस्म की नहीं वो पर्दा उठ जाएगा। अगले जमाने में खुदा ने बाब दादा से हिस्सा बाहिस्सा और तरह बतरहा। नबियों की मार्फत कलम करके इस जमाने के आखिर में हमसे बेटे की मार्फत कलम किया बेटे की रूह, जिसे उसने सारी चीजों का वारिस ठहराया और जिसके वसीले से उसने आलम भी पैदा किए। वो उसके जलाल का प्रस्ताव और उसकी ज़ात का नक्श होकर सब चीजों को अपनी कुदरत के कलाम से संभालना है।

वो गुनाहों को धोकर आलमी बाला पर कीबिया की दानी तरफ़ जा बैठा और रिश्तों से इस कदर बुजुर्ग हो गया। जीस कदर। उसने मिरास में उनसे अफज़ल नाम पाया अफज़ल है मोहब्बत मोहब्बत है खुदा उस वक्त उस वक्त मैंने खुदावन की आवाज़ सुनी जिसने फरमाया मैं किसको भेजूं? यानी शैलिया। और हमारी तरफ से कौन जगा? तब मैंने अर्ज की। मैं हाजिर हूँ, मुझे भेज इब्रानी में शैलियां बस जगीदों ने आपस में कहा, क्या कोई उसके लिए कुछ खाने

को लाया है या सुने? उनसे कहा, मेरा खाना यह है कि अपने भेजने वाले यानी शैलिया की भेजने वाला शैलिया की मर्जी के मुआफिक अमल करो और उसका काम करो। पसियेसु ने हेकल में तालीम देते वक्त पुकार कर कहा कि। तुम मुझे भी जानते हो और ये भी जानते हो कि मैं कहाँ का हूँ और मैं आप से नहीं आया, मगर जिसने मुझे भेजा यानी शैलियाक है वो। सच्चा यानी सच्चाई को इब्रानी में कहते हैं अमित यानी अमित, वो सच्चा है, उसको तुम नहीं जानते। मैं उसे जानता हूँ इसलिए कि मैं उसकी तरफ से हूँ और उसी ने मुझे

भेजा क्योंकि मैं आसमान से उतरा हूँ। ना इसलिए कि अपनी मर्जी के माफी अमल करूँ बल्कि इसलिए कि अपनी भेजने वाली यानी इब्रानी में शैलिया की मर्जी के माफी अमल करूँ। और मेरे भेजने वाले की मर्जी ये है कि जो कुछ उसने मुझे दिया है मैं उसमें से कुछ खो ना दू बल्कि उसे आखिरी दिन फिर जिंदा करूँ। आखिरी दिन सलीब के बाद शुरू होता है यानी ये शमशी केजी उठने से के दिन शुरू होते हैं। यसु ने उनसे कहा, अगर खुदा तुम्हारा बाप होता तो तुम मुझसे मोहब्बत रखते हो, इसलिए कि मैं खुदा में से निकला और आया हूँ

क्योंकि मैं आप से नहीं आया बल्कि उसी ने मुझे भेजा। यानी शैलिया मैं और बाप एक। क्या तू यकीन नहीं करता कि मैं बाप में हूँ और बाप मुझमें ये बातें जो मैं तुमसे कहता हूँ, अपनी तरफ से नहीं कहता, लेकिन बाप मुझमें रहकर अपने काम करते, मेरा यकीन करो कि मैं बाप में हूँ। और बाप मुझमें है, मेरा यकीन करो कि मैं बाप में हूँ और बाप मुझमें बाप मुझमें रहकर अपने काम करता है। और उन दिनों में ऐसा हुआ कि वो पहाड़ पर दुआ मांगने को निकला। और खुदा से दुआ मांगने में सारी रात गुजारी। जब दिन हुआ तो उसने अपने शगिरदों

को पास बुलाकर उनमें से 12 चुन्नी और उनको रसूल का लकप दिया। रूल कुत्स की अदाई से चलने वाले रसूल ने फिर उनसे कहा कि तुम्हारी सलामती हो जीस तरह बाप ने मुझे भेजा है उसी तरह मैं भी तुम्हें भेजता हूँ यानी शैलियाक ने मुझे भेजा। उसी तरह मैं भी तुम्हें भेजता हूँ। और ये कहकर उन पर फूंका, ये कहकर पर फूंका और उनसे कहा कि रूह कुछ लोग यानी कदूस यानी पवित्र पाक और जब तक। वो भेजे न जाएं। मनादी क्यों कर करें जो नाच लिखा है कि क्या ही खुशनुमा है उनके कदम जो अच्छी चीज़ों की खुशखबरी

देते यानी जो शैलियाक की तरफ से भेजे हुए होते हैं जीस तरह यशवमसी और यशवमसी के भेजे हुए। वो अच्छी चीजों की खुशखबरी देते हैं, घबरा नहीं देते, डराते नहीं हैं, दोष नहीं लगाते, वो दोषी व एक नहीं पैदा करते, वो खुशखबरी देते हैं, आजाद करते हैं। फिर उसने जाते में एक शख्स को देखा जो जन्म का अंधा था और उसके शगिरदों ने उससे पूछा कि ए रब्बी उस्ताद किसने गुनाह किया था, जो

ये अंधा पैदा हुआ इस शख्स ने? या इसके माँ बाप देखो उस वक्त शरियत का वक्त था, सब लोग शरियत के अधीन था। वो शरियत का वक्त है। सलीब से पहले यस्सु ने जवाब क्या दिया कि ना इसने गुनाह किया था, ना इसने गुनाह किया था? ना इसके माँ बाप, अब ये शमसीह अनुग्रह पर अनुग्रह अनुग्रह और सच्चे अनुग्रह क्या बोल रहा है अलफताब क्या बोल रहा है?

बल्कि ये इसलिए हुआ कि खुदा के काम उसमें ज़ाहिर हों। जिसने मुझे भेजा यानी शैलियाक ने जिसने मुझे भेजा है, हमें उसके काम दिन ही दिन में करने जरूरी है। वो रात आने वाली है जिसमें कोई शख्स काम नहीं कर सकता। वो इस रात की बात नहीं कर रहा है जो हमारे ऊपर आती है। संसारिक रात दिन की नहीं। यानी नूर के फर्ज़द नूर के फर्ज़द जब तक मैं दुनिया में हूँ, दुनिया का नूर हूँ और हम भी हैं फसलों और सच्चाई के यदि जिसमें जिनमें बेटे की रूप है जिनमें जिंदगी की रूप है ये कहकर। उसने जमीन पर थूका और थूक से

मिट्टी सानी और वो मिट्टी अंधे की आँखों पर लगाकर उससे कहा जा शिलो शैलियाँ। शिलोग के हौज में धोले जिसका दर्ज़मा भेजा हुआ है बस यानी भेजा हुआ यानी अपोस्टल यानी शैलिया यानी प्रेरित यानी रसूल बस उसने जाकर। धोया और बीना होकर वापस आया ये निशान किनको दिखाया गया यहूदियों को क्योंकि यहूदी निशान चाहते हैं और देखो उसी दिन उनमें से दो आदमी उस गांव की तरफ जा रहे थे जिसका नाम इम्माउस है, वो यरुश्लेम से कोई साथ मील के। फासले पर है और वो इन सब बातों के बाबत जो वाकया हुई थी आपस में बातचीत करते जाते थे।

जब वो बातचीत और पूछ्ताछ कर रहे थे तो ऐसा हुआ कि येसु आप नजदीक आकर उनके साथ हो लिया, लेकिन उनकी? आँखें बंद की गई थी कि उसको ना पहचान। उसने उनसे कहा ये क्या बात है जो तुम चलते चलते आपस में करते हो? वो गमगीन से खड़े हो गए। फिर एक ने जिसका नाम। क्लिप था। जवाब में उससे कहा यशमसी से जो तीसरे दिन मुर्दा में से जिंदा हो चुका है। शरीयत के मुताबिक सब काम को पूरा करके क्या तू यरु शिलम में अकेला मुसाफिर है, जो नहीं जानता कि। इन दिनों उसमें क्या क्या हुआ है?

उसने उनसे कहा क्या हुआ है? उन्होंने उससे कहा ये सुनासरी का मजारा जो खुदा और सारी उन्मद के नजदीक काम और कलाम। कुदरत वाला नबी था और सरदार काहिनो और हमारे हाकिमों ने

हुकूमत किसकी थी? उस वक्त रोमियो की उसको पकड़वा दिया ताकि उस पर कतल का हुक्म दिया जाए और उसे सलीब दिलाई। लेकिन हमको उम्मीद थी कि इजरायल को मखलसी यहीं देगा। और इलावा इन सब बातों के इस मझारे को आज तीसरा दिन हो गया और हम में से चंद औरतों ने भी हमको हैरान कर दिया है। जो सवेरे की खबर पर गई थीं और जब उसकी लाश ना पाई तो ये कहती हुई आई कि हमने रोया में फरिश्ते को भी देखा। उन्होंने कहा कि वो जिंदा है। प्रभास हमारे साथियों में से कब्र पर गए और। जैसा औरतों ने कहा था, वैसा ही

पाया मगर उसको ना देखा। उसने उनसे कहा कि ए यानी यशवंत की ए नदानु। और नदियों की सारी बातों को मानने में सुस्त इतका दो अनाधानु और नदियों की सारी बातों के मानने में सुस्त ईमान वालो। जो ईमान में सोए हुए है। क्या मसीह को ये दुख उठा कर अपनी जलाल में दाखिल होना जरूरत ना था? फिर मूसा यानी मूसा की पहली पांच किताबें से?

और सब नबियों से शुरू करके सारे नवविश्तों में जितनी बातें उसके हक में लिखी हुई हैं, उनको समझा दी। इतने में वो उस गांव के नजदीक पहुँच गए जहाँ जाते थे और उसके ढंग से ऐसा मालूम हुआ कि। वो आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने उसे ये कहकर मजबूर किया कि हमारे साथ रह कि शाम हुआ चाहती है और दिन अब बहुत ढल गया। बस वो अंदर गया ताकि उनके साथ रहे। जब वो उनके साथ खाना खाने को बैठा तो ऐसा हुआ कि उसने रोटी लेकर बरकत चली और तोड़कर उनको देने लगा। इस पर उनकी आंखें खुल गईं और

उन्होंने उसको पहचान लिया। और वो उनकी नजर से गायब हो कि हमारे खुदा उन युसुमसीह का खुदा जो जलाल का बाप है। अब्बा हाशमई अब्बा उर तुम्हें अपनी पहचान में हकमत और मुगाशिफे की रू बक्शे। और तुम्हारे दिल की आँखें रोशन हो जाएं ताकि तुमको मालूम हो कि उसके बुलवाने से कैसी कुछ उम्मीद है। यानी बुलाहट यानी कालिंग और उसकी मिराज़ के जलाल की दौलत जलाल के दौलत प्रकाश के दौलत। मुकदसों में कैसी कुछ है और हम इमान लाने वालों के लिए उसकी बड़ी कुदरत क्या है?

बेहद उसकी बड़ी कुवत की तासीर के माफिक, जो उसने मशीन में की, जबकि। उसे मुर्दोमे से जिलाकर अपनी दाईनी तरफ आसमानी मुकाम पर बैठाया। अपोस्टल शब्द को अगर हम तीन भाग करें यानी तीन भाग करके एक प्रॉपर सेन्टेन्स के तौर पर समझे। आ?

यानी ए यानी एक यानी वो कोई भी हो सकता है यानी एक व्यक्ति और वो कोई भी हो सकता है। पोस्ट यानी मसीयशुआ की खुशखबरी। टेल का मतलब है सुनाने वाला बताने वाला। अब हम इसको पूरे प्रॉपर सेन्टेन्स में समझें। वो एक व्यक्ति शल्याक यानी पोस्टर ए पोस्ट टेल ए पोस्ट टेल। वो एक व्यक्ति वो कोई भी हो सकता है। ए पोस्ट टेल यानी वो एक व्यक्ति रूल कुसदा ममूर्या वो एक व्यक्ति वो कोई भी हो सकता है जो रूल कुत्से ममूर्या जो खुशखबरी। का यानी मसीह यशव की खुशखबरी का प्रचार सुनाता है, बताता है,

फैलाता है जैसे हमारे यहाँ पोस्ट ऑफिस पोस्टमैन है। यानी डाकिया चिट्ठी लेके आने वाला मैसेज पहुंचाने वाला ये ग्रीक शब्द अपोस्टोलॉज से निकला है। इसका मतलब है भेजा गया व्यक्ति संदेशवाहक। खुदा के बेटे यसुन से की खुशखबरी का शुरू यसु ने क्लील में आकर खुदा की खुशखबरी की, मनादी की और कहा कि वक्त पूरा हो गया है और खुदा की बादशाह नजदीक आ गई। यानी रूल कुछ तौबा करो। और खुशखबरी को मानो खुशखबरी को मानना ही तोब करना है। लेकिन जब वक्त पूरा हो गया तो खुदा ने अपने बेटे को भेजा जो औरत से पैदा हुआ।

और शरीयत के मताहत पैदा हुआ ताकि शरीयत के मतदातों को मोल लेकर छुड़ा ले। अब हो क्या रहा है?

कहा ये जा रहा है कि खुशखबरी पर इमाम तौबा करो मगर सुनाई शरीयत जा रही है। 10 सुख मुँह का प्रचार हो रहा है ताकि शरियत के मताहतों को मूल लेकर छुड़ा ले। इसी शरियत से छुड़ाने के लिए तो यशव ने इतना दुख सहा। इतनी पीड़ा इतनी करूरता से ही अपनी बदन पर लेकिन प्रचार फिर भी 10 सुख मोगा रहा है। मूसा की शरियत का ताकि शरियत के मताहतों को मोल लेकर, शरियत के मताहतों को मूल लेकर और हमको लपालक होने का दर्जा मिले। और क्योंकि तुम बेटे हो इसलिए खुदा ने अपने बेटे के रूप हमारे दिलों में भेजी जो अब्बा यानी है।

बाप कह कहकर पुकारना है। बस अब तो गुलाम नहीं बल्कि बेटा है जो शरीयत के दीन है, वो गुलाम है और जब बेटा हुआ तो खुदा के सुबह बारिश भी हुआ। इसलिए की शरियत तो मूसा की मार फत दी गई, मगर फ़ज़ल और सच्चाई मसीहैशा की मार फत पहुंची और कलाम जसिम हुआ और फ़ज़ल और सच्चाई से महमूर होकर हमारे दरमियां रहा और हमने उसका ऐसा जलाल देखा जैसा बाप के कहौते का जलाल क्योंकि उसकी महमूरी में से हम सबने पाए यानी फ़ज़ल पर फ़ज़ल। चुनौती इब्राहिम खुदा पर ईमान लाया और ये उसके लिए रास्तेबाजी

गिना गया। पर जानलों की जो इमान वाले हैं, वही इब्राहिम के फरज़ाने और किताबें मुकद्दस ने पेशदस्त ये जानकर कि खुदा गैर खोमो को ईमान से रास्तबाज़ ठहराएगा। पहले ही से इब्राहिम को ये खुशखबरी सुना दी। कि तेरे बॉस सारी कौमे बरकत पाएगी। तेरे 22 सारी कौमे बरकत पाएगी पर जो इमान वाले वो ईमानदार इब्राहिम के साथ बरकत पाते हैं, जो रूल कुत की हदाय से चलते हैं वो ही खुदा के बेटे हैं। मैं दाजुक करता हूँ, हैरान होता हूँ। कि जिसने तुम्हें मसीह के फसल से

बुलाया, उसे तुम इस कदर जल्द फिर कर किसी और तरह की खुशखबरी की तरफ माइल होने लगे। मगर वो दूसरी बत्ताबाज ऐसे है जो तुम्हें घबरा देते हैं और मसीह की खुशखबरी को क्या करना चाहते हैं?

बिगाड़ना चाहते हैं? लेकिन अगर हम या आसमान का कोई रिश्ता भी। उस खुशखबरी के सिवा जो हमने तुम्हें सुनाई कोई और खुशखबरी तुम्हें सुनाई तो मालून हो लान्ती हो जैसा हम बेशर कह चूके हैं वैसा ही अब मैं फिर कहता हूँ, अब मैं फिर कहता हूँ। उस खुशखबरी के सिवा जो तुमने कुबूल की थी अगर कोई तुम्हें और खुशखबरी सुनाता है तो मालूम साबित हो। मैं तुम्हें जताया देता हूँ कि जो खुशखबरी मैंने सुनाई वो इंसान की सीन नहीं क्योंकि वो मुझे। सच्चाई की रू से बाप की रू से इंसान की तरफ से नहीं पहुंची और

ना मुझे सिखाई गई वो बाप की रू से सच्चाई की रू से बल्कि यश मसीह की तरफ से। मुझे उसका मुक्काफा हुआ क्योंकि ऐसे लोग झूठे रसूल और दगाबाज़ी से काम करने वाले हैं और अपने आप को मसीह के रसूलों के हम शक्ल बना लेते हैं और कुछ अजब नहीं। कुछ हैरान होने की बात नहीं। क्योंकि शैतान भी अपने आप को नूरानी रिश्ते का हमशक्ल बना लेता है। बस अगर उसके खादमीरात बाजी के खादिमों के हमशक्ल बन जाए तो कुछ बड़ी बात नहीं है, लेकिन उनका अंजाम उनके कामों के माफिक होगा। क्या सबरजूल है? क्या सब नबी है, क्या सब उस्ताद

है? क्या सब मुआवजा दिखाने वाले है क्या सबको शिपा देने की कुबतें नायत हुई क्या? सब तरह तरह की जमाने बोलते हैं, क्या सब तर्जमा करते हैं? कैसे लोग झूठे, रसूल और दगाबाजी से काम करने वाले और अपने आपको के रसूलों के हमशक्ल बना लेते है? क्योंकि शैतान भी अपने आपको नूरानी रिश्ते का हमशक्ल बना लेता है। बस अगर उसके खादिम भी रास्तेबाजी के खादिमों के हमशक्ल बन जाए तो कुछ बड़ी बात नहीं। लेकिन उनका अंजाम उनके कामों की माफी को।

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