201. Kailash Samhita - Adhyay 13 ; कैलाश संहिता - तेरहवाँ अध्याय
"संन्यासग्रहण की शास्त्रीय विधि -गणपति- पूजन, होम, तत्त्व- शुद्धि, सावित्री-प्रवेश, सर्वसंन्यास और दण्ड-धारण आदि का प्रकार"

"संन्यासग्रहण की शास्त्रीय विधि -गणपति- पूजन, होम, तत्त्व- शुद्धि, सावित्री-प्रवेश, सर्वसंन्यास और दण्ड-धारण आदि का प्रकार"
"प्रणव के वाच्यार्थ रूप सदाशिव के स्वरूप का ध्यान, वर्णाश्रम-धर्म के पालन का महत्त्व, ज्ञानमयी पूजा, संन्यास के पूर्वांगभूत नान्दीश्राद्ध एवं ब्रह्मयज्ञ आदि का वर्णन"
"ऋषियों का सूतजी से तथा वामदेव जी का स्कन्द से प्रश्न, एवं प्रणवार्थ-निरूपण के लिये अनुरोध"
"देवी के क्रिया-योग का वर्णन, देवी की मूर्ति एवं मंदिर के निर्माण, स्थापन, और पूजन का महत्त्व, परा अम्बा की श्रेष्ठता, विभिन्न मासों और तिथियों में देवी के व्रत, उत्सव और पूजन आदि के फल तथा इस संहिता के श्रवण एवं पाठ की महिमा"
"देवी के द्वारा दुर्गमासुर का वध तथा उनके दुर्गा, शताक्षी, शाकम्भरी और भ्रामरी आदि नाम पड़ने का कारण"
"देवताओं का गर्व दूर करने के लिये तेजःपुंज रूपिणी उमा का प्रादुर्भाव"
"देवी के द्वारा सेना और सेनापतियों सहित निशुम्भ एवं शुम्भ का संहार "
"देवी उमा के शरीर से सरस्वती का आविर्भाव, उनके रूप की प्रशंसा सुनकर शुम्भ का उनके पास दूत भेजना, दूत के निराश लौटने पर शुम्भ का क्रमशः धूम्रलोचन, चण्ड, मुण्ड तथा रक्तबीज को भेजना और देवी के द्वारा उन सबका मारा जाना"
"सम्पूर्ण देवताओं के तेज से देवी का महालक्ष्मी रूप में अवतार और उनके द्वारा महिषासुर का वध"
"भगवती उमा के कालिका-अवतार की कथा, समाधि और सुरथ के समक्ष मेधा का देवी की कृपा से मधुकैटभ के वध का प्रसंग सुनाना"
काल या मृत्यु को जीतकर अमरत्व प्राप्त करने की चार यौगिक साधनाएँ - प्राणायाम, भ्रूमध्य में अग्नि का ध्यान, मुख से वायुपान तथा मुड़ी हुई जिह्वा द्वारा गले की घाँटी का स्पर्श
"काल को जीतने का उपाय, नवधा शब्दब्रह्म एवं तुंकार के अनुसंधान और उससे प्राप्त होने वाली सिद्धियों का वर्णन"
"मृत्युकाल निकट आने के कौन-कौनसे लक्षण हैं, इसका वर्णन"
"वेद और पुराणों के स्वाध्याय तथा विविध प्रकार के दान की महिमा,नरकों का वर्णन तथा उनमें गिराने वाले पापों का दिग्दर्शन,पापों के लिये सर्वोत्तम प्रायश्चित्त शिवस्मरण तथा ज्ञान के महत्त्व का प्रतिपादन"
"जलदान, जलाशय-निर्माण, वृक्षारोपण, सत्यभाषण और तप की महिमा"
"यमलोक के मार्ग में सुविधा प्रदान करने वाले विविध दानों का वर्णन"
"विभिन्न पापों के कारण मिलने वाली नरक-यातना का वर्णन तथा कुक्कुरबलि, काकबलि एवं देवता आदि के लिये दी हुई बलि की आवश्यकता एवं महत्ता का प्रतिपादन"
"नरकों की अट्ठाईस कोटियों तथा प्रत्येक के पाँच-पाँच नायक के क्रम से एक सौ चालीस रौरवादि नरकों की नामावली"
"पापियों और पुण्यात्माओं की यमलोक यात्रा"
"नरक में गिराने वाले पापों का संक्षिप्त विवरण"
"भगवान् श्रीकृष्ण के तप से संतुष्ट हुए शिव और पार्वती का उन्हें अभीष्ट वर देना तथा शिव की महिमा"
"शिव सम्बन्धी तत्त्व-ज्ञान का वर्णन तथा उस की महिमा, कोटिरुद्र संहिता का माहात्म्य एवं उपसंहार"
"शिव, विष्णु, रुद्र और ब्रह्मा के स्वरूप का विवेचन"
"मुक्ति और भक्ति के स्वरूप का विवेचन"
"अनजान में शिवरात्रि-व्रत करने से एक भील पर भगवान् शंकर की अद्भुत कृपा"
"शिवरात्रि-व्रत के उद्यापन की विधि"
"भगवान् शिव को संतुष्ट करने वाले व्रतों का वर्णन, शिवरात्रि -व्रत की विधि एवं महिमा का कथन"
"भगवान् विष्णु द्वारा पठित शिवसहस्त्रनाम स्तोत्र"
"शंकरजी की आराधना से भगवान् विष्णु को सुदर्शन चक्र की प्राप्ति तथा उसके द्वारा दैत्यों का संहार"
"घुश्मा की शिव-भक्ति से उसके मरे हुए पुत्र का जीवित होना, घुश्मेश्वर शिव का प्रादुर्भाव तथा उनकी महिमा का वर्णन"