171. Koti Rudra Samhita - Adhyay 31 ; कोटिरुद्र संहिता - इकत्तीसवां अध्याय
"रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग का आविर्भाव व उसके महात्म्य का वर्णन"

"रामेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग का आविर्भाव व उसके महात्म्य का वर्णन"
"नागेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव और उसकी महिमा"
"वैद्यनाथेश्वर ज्योतिर्लिंग के प्राकट्य की कथा तथा महिमा"
पत्नी सहित गौतम की आराधना से संतुष्ट हो भगवान् शिव का उन्हें दर्शन देना, गंगा को वहाँ स्थापित करके स्वयं भी स्थिर होना,देवताओं का वहाँ बृहस्पति के सिंहराशि पर आने पर गंगाजी के विशेष माहात्म्य को स्वीकार करना, गंगा का गौतमी ( या गोदावरी ) नाम से और शिव का त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंग के नाम से विख्यात होना तथा इन दोनों की महिमा"
"त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंग के प्रसंग में महर्षि गौतम के द्वारा किये गये परोपकार की कथा, उनका तप के प्रभाव से अक्षय जल प्राप्त करके ऋषियों की अनावृष्टि के कष्ट से रक्षा करना; ऋषियों का छलपूर्वक उन्हें गोहत्या में फँसाकर आश्रम से निकालना और शुद्धि का उपाय बताना"
"वाराणसी तथा विश्वेश्वर का माहात्म्य"
"विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग और उनकी महिमाके प्रसंगमें पंचक्रोशीकी महत्ताका प्रतिपादन"
"केदारेश्वर तथा भीम-शंकर नामक ज्योतिर्लिंगों के आविर्भाव की कथा तथा उनके माहात्म्य का वर्णन"
"विन्ध्य की तपस्या, ओंकार में परमेश्वर-लिंग के प्रादुर्भाव और उसकी महिमा का वर्णन"
"महाकाल के माहात्म्य के प्रसंग में शिवभक्त राजा चन्द्रसेन तथा गोप-बालक श्रीकर की कथा"
"मल्लिकार्जुन और महाकाल नामक ज्योतिर्लिंगों के आविर्भाव की कथा तथा उनकी महिमा"
"प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के प्रादुर्भाव की कथा और उसकी महिमा"
"ऋषिका पर भगवान् शिव की कृपा, एक असुर से उसके धर्म की रक्षा करके उसके आश्रम में ‘नन्दिकेश’ नाम से निवास करना और वर्ष में एक दिन गंगा का भी वहाँ आना"
"काशी आदिके विभिन्न लिंगोंका वर्णन तथा अत्रीश्वर की उत्पत्ति के प्रसंग में गंगा और शिव के अत्रि के तपोवन में नित्य निवास करने की कथा"
"द्वादश ज्योतिर्लिंगों तथा उनके उपलिंगो का वर्णन एवं उनके दर्शन पूजन की महिमा"
"शिवजी के द्वादश ज्योतिर्लिगावतारों का सविस्तार वर्णन"
"अर्जुन और शिवदूत का वार्तालाप, किरातवेषधारी शिवजी के साथ अर्जुन का युद्ध, पहचानने पर अर्जुन द्वारा शिव-स्तुति, शिवजी का अर्जुन को वरदान देकर अन्तर्धान होना, अर्जुन का आश्रम पर लौट कर भाइयों से मिलना, श्रीकृष्ण का अर्जुन से मिलने के लिये वहाँ पधारना"
"किरातावतार के प्रसंग में मूक नामक दैत्य का शूकर रूप धारण करके अर्जुन के पास आना, शिवजी का किरात वेष में प्रकट होना, और अर्जुन तथा किरात वेषधारी शिव द्वारा उस दैत्य का वध"
"शिवजी के किरातावतार के प्रसंग में श्रीकृष्ण द्वारा द्वैत-वन में दुर्वासा के शापसे पाण्डवों की रक्षा, व्यासजी का अर्जुन को शक्र-विद्या और पार्थिव पूजन की विधि बता कर तप के लिये सम्मति देना, अर्जुन का इन्द्र-कील पर्वत पर तप, इन्द्र का आगमन और अर्जुन को वरदान, अर्जुन का शिवजी के उद्देश्य से पुनः तप में प्रवृत्त होना"
"शिव के सुरेश्वरावतार की कथा, उपमन्यु की तपस्या, और उन्हें उत्तम वर की प्राप्ति"
"भगवान् शिव के भिक्षुवर्यावतार की कथा राजकुमार और द्विजकुमार पर कृपा"
"भगवान शिव के अवधूतेश्वर अवतार की कथा और उसकी महिमा का वर्णन"
"भगवान शिव के कृष्ण दर्शन नामक अवतार की कथा"
"भगवान शिव का यतिनाथ एवम हंस नामक अवतार"
"भगवान् शिव के द्विजेश्वरावतार की कथा-राजा भद्रायु तथा रानी कीर्तिमालिनी की धार्मिक दृढ़ता की परीक्षा"
"शिवजी के पिप्पलाद-अवतार के प्रसंग में देवताओं की दधीचि मुनि से अस्थि याचना, दधीचि का शरीरत्याग, वज्र-निर्माण तथा उसके द्वारा वृत्रासुर का वध, सुवर्चा का देवताओं को शाप, पिप्पलाद का जन्म और उनका विस्तृत वृत्तान्त"
"शिवजी के दुर्वासावतार एवं हनुमदावतार का वर्णन"
"शिवजी के महाकाल आदि दस अवतारों का तथा गयारह रुद्र अवतारों का वर्णन"
"शिवजी का शुचिष्मती के गर्भ से प्राकट्य, ब्रह्मा द्वारा बालक का संस्कार कर के ‘गृहपति’ नाम रखा जाना, नारद जी द्वारा उसका भविष्य-कथन, पिता की आज्ञा से गृहपति का काशी में जाकर तप करना, इन्द्र का वर देने के लिये प्रकट होना, गृहपति का उन्हें ठुकराना, शिवजी का प्रकट होकर उन्हें वरदान देकर दिक्पाल पद प्रदान करना तथा अग्नीश्वरलिंग और अग्नि का माहात्म्य"
"काल-भैरव का माहात्म्य, विश्वानर की तपस्या और शिव जी का प्रसन्न होकर उनकी पत्नी शुचिष्पती के गर्भ से उनके पुत्र रूप में प्रकट होने का उन्हें वरदान देना"