¶ Pehla Pyar: Pehli Mulaqat
आज ही के दिन तो मैं उसे मिले थी लोग कहते हैं पहला प्यार कभी नहीं भूलते मैं जानती हूँ सच है کتنے سال بیت گئے मैंने क्या पहना था उसने क्या पहना जैसे मेरी मोपेड में पेड्रोल ने मैं उसको धकेल कर पेट्रोल पंप ले जा रही थी हम कहां किस दुकान के सामने खड़ी थे
और कैसे मैंने एक चौकन्नी जासूस की तरह उससे बात करते हुए कलकियों से ये भी देख लिया था कि कौन है मैं खिडकियों से छच्चों से देख रहा है گوسپ کس گھر سے شروع ہوگی؟ अब आज कर जैसे थोड़े ही था सारे छोटे-छोटे शहरों की तरह याट शहर में भी कॉंजर्वेटिव परिवारों की लड़कियों के बॉइफरिंस नहीं होते थे। घर में बापा और भाई और स्कूल में टीचर. یہی ہماری زندگی کے مکھی پر اشکردار ہوا کرتے تھے और भाई अगर मेरे भाई की तरह हटा कटा और ओवर प्रोटेक्टिव निकला?
शुक्रे उस दन भाया नानी के धर गए हुए थे मम्मी ने मामा जी के पास भेजा था भाय दूज का टिका लेकर सब याद है मुझको एक एक चीन उस दिन की सर्दी की दो पहर उनके दस्तानों में भी ठिठूरती मेरे हाथों में से رب میں نے پہلی بار اس سے بات کی دی تب وہ ساری آوازیں جن میں میرا محلنہ لپٹا ہوا تھا
जित पे अड़ा फेरी वाला कोई सुने या ना सुने लेकिन कवियों की तरह जित पे उतार उतार कि पूरी कविता सुना के ही मानेगा दूद वाला दूद के खाली के एंग लेकर चर चर करती साइकल पर जाता हुआ कहीं दूर खिड़की से किसी नाराज मा की आवाज पपो तो ने अब तक नहीं ना आया गंदे कहीं के स्कूल से लोटते हुए बच्चों की खुसर पुसर और अपने ही किसी चुटकुले पर जोहर की हसी उन सब के बेच सारी आवाजों के कोला है ایک آواز جو میری زندگی کا روح بدلنی والی تھی मैं आपका दोस्त बनना चाहत।
¶ Dosti Ka Inkar Aur Shiv Ka Peecha
یونیورسٹی میں عاشق نزاز لڑکی تھے لیکن شاید میرے بھائی کے خوف اور میرے پڑھاکس و بھاؤں کی وجہ سے کسی کی ہمت نہیں ہوتی تھی کہ مجھ سے ایسا ویسا کہے सब जहेलियां चुप चुप के बख बख करके ना जानी क्या खिल खिलाती रहती और मैं पहुचती तो कहती तुम्हाय मतलब का नहीं है बड़ी बेगज़ती लगती थी कभी
मैं अपनी साथी लेकिन खुश दुनिया में मस्त जी रही थी कि एक दिन अचानक साइकल पे आते एक लड़के ने मेरा रास्ता रोक कर कहा مرحبا مرحبا مرحبا مرحبا مرحبا مرحبا आपके शहर में अकेला हूँ वे शर्मी वे बाके मासूमियत, इमानदारी, इपत्तमी से, आप बताई क्या कहूं इसे? जैसे उसको मुझे देखने के लिए, बात करने के लिए, बीच सड़क पर मेरा रास्ता रोकने के लिए मेरी इजाज़त की जरूरत ही नहीं थी। एक अंजान लड़का एक सेकंड में मेरे उपर इतना अधिकार जदा रहा था उसका नाम शिव मेरा शिवांगी अजीब इतफाक है न?
मुझसे उमर में दो तीन साल छोटा लग रहा था मैंने का आप अपने किसी हमोगर से क्यों नहीं दोस्ती कर लेते पलट कर उसने कहा अच्छा मुझे नहीं बता था कि आपके पोते भी हैं मैंने कहा, जी आपकी तुलना में जरूर दादी हूँ, युनिवर्सिटी में पढ़ती हूँ, मास्टर्स जोइन किया है अभी-अभी. wokół śniebola.
मैंने कहा वो पिंटी है ना आपके गर के सामने ही रहती है उससे दोस्ती कर लेजे मैं बात करती हूँ شبولا देखिए आपको दोस्ती नहीं करनी तो साफ बोलिये न ये ये उम्र के बहाने और दूसरों से मेरी मैच मेकिंग करना रहने दीजे जानता हूँ पिंटी को لیکن لگتا ہے کہ آپ میں دونوں ہیں تاریف مجھ پہ ہمیشہ اثر کر جاتی ہے
¶ Pita Ki Soch Aur Beti Ka Bharosa
लेकिन मैंने दिल कड़ा किया और कहा मैं दोस्ती नहीं कर सकती मेरे भाई साब लड़के लड़कियों की दोस्ती में विश्वास नहीं रखते और वैसे भी मेरे पासे सब के लिए वक्त नहीं है सारी मैंने उसकी दोस्ती छुकरा दी थी तो कुछ कल खड़ा रहा जैसे जानता हूँ وہ جانتا تھا کہ میں چاہتی تو ہمیشہ کی طرح اپنے بھائی سے شکایت کر سکتے تھے नजाने क्या था उसमें कि उस रात मेरे अपने भाई को नहीं अपनी छोटी बहन को बताया نہ جانے کیوں وہ مجھے ایسے دیکھ رہا تھا शायद मैंने बिंदी लगा रखे थी इसलिए Ja scheint me a chillagrein.
पहली बार किसी ने मुझे खुबसूरत होने का एहसास करा अगले दिन वो मुझे फिर चौक पर मिल गया हाथों में कॉपी किताबे थी मैं भी कुछ बहाना करके सामनी के दुकान में सबसी खरीदने लगी पल्टी तो आखों की गोर से उसे फिर देखा उसमें कुछ था عجیب اتفاق ہے
कम्मत अगली दिन पेट्रोल पंक के सामने ही मिल गया बोला हलो शिवांगी मेरे मन की शॉर्ट वेव पर इंगीत सनाई दिया पुकारो मुझे नाम लेकर पुकारो مجھے تم سے اپنی خبر مل رہی ہے अपना मुश्टन्ण भाई याद आ गया उन दिनों Facebook तो था नहीं, friend request आमने सामने आए थी और मैंने not now का button भी दबा दिया था
मेरे लड़कों से दोस्ती, प्यार ये सब मना था। मैंने कहा, हलो। उसने कहा, तो फिर। मैंने कहा पफुर وہ دماغ سے پھور ہونے کا نام ہی نہیں لے رہا تھا एक दिन मुझको फिर से सबजी वजार में मिल गया सबजी लेने के बहानी मेरे बगल में आके खड़ा हो गया और चतुराई तो देखो सबजियों के भाव पूछने लगा लाइफ में एक आलू तक कभी न खरीदा हो, दुकानदार से कटहल पे मौल भाव कर रहा था। जब दुकानदार पैसे ले रहा था, तो जट से शिव मेरे और मुड़ा और बोला, तो प्रूप पापा से मेरी खूब पढ़ते हमेशा से मेरे पैस ट्रेंड रहे کمال کے آدمی تھے
इतनी ट्रडिशनल परिवेश में पला बड़ा इंसान इतनी खुली सोच का हो सकता है ये मैं सोच भी नहीं सकता लेकिन शायद वो जानते थे कि जिस दिन माबाब अपने बच्चों पर भरोसा करना शुरू करते हैं उस दिन वो उनके सबसे अच्छे दोस्त बन जाते हैं बाबा इसे लिए बजबन से मेरे सबसे अच्छे दोस्ते
मतलब ना होते हुए भी युनिवसिटी में अपने प्यार का अप्लिकेशन लेटके आगे पीछे गुमने वाले लड़कों के किस्से पापा को सुनाया करती थी مزے کی بات یہ تھی کہ میں نے انہیں اب تک شف کے بارے میں کچھ نہیں بتایا تھا ऐसा नहीं था कि मैं उनसे कुछ चुपाना चाहती थी لیکن میں سمجھ نہیں پا رہی تھی کہ میں ان کو بتاؤں تو کیسے بتاؤں اور کیا بتاؤں کی کوئی ملا ہوتنے مجھے پروس کیا میں نے رجے کیا فائل کلوس لیکن یہ فائل خلوز نہیں ہو پا رہی تھی اور میں سمجھ نہیں پا رہی تھی کہ اس کے کور پر کیا
¶ Raz Khula Aur Rishtey Ki Samajh
एक दिन पापा दो कप चाह लेकर आए, एक मुझे दी, मैंने कहा, थैंक यू पापा, फिर शरार के अंदाज में मुले, پٹا دوستوں سے راز چھپایا نہیں کرتے ये शेव भाई साबका क्या मामला है?
मेरी चुगल खोरता है पिटी दी मुझसे मैंने पापा को पूरी कहानी बताई कैसे इस अड़क पर मुझे एक लड़का मिला जो सबसे अलग था मुझसे बुला आपसे दोस्ति करना जाता। میں پاپا کو بتا ہی نہیں بھائی कि मन में कही न कही मैं जानती थी कि दोस्ती तो वो करना चाहता था سڑک کے بیچوں بیچ کھڑے اس خوبصورت لمحے میں میں جان گئی تھی اسے صرف دوستی چاہیے تھی اور مجھے پیار और फिर हमारे बीच उम्र का फासला में तो था क्यों लाइफ इतनी कॉंप्लिकेट करनी इसलिए निप इन दबड़
¶ Ghar Badalne Ki Udasi Aur Ehsaas
माली ऐसे खतरनाक बौधु को जड़ से ही काट देता है मैंने हसके पापा को डाल दिया बोले शलो अच्छा ही हुआ दोस्ती का सिलसिला शुरू नहीं हुआ مکان مالک آئے تھے کہہ رہے تھے ان کی بیٹی امریکہ سے پڑھ کے واپس آ رہی ہے ہمیں مکان کھالی کرنا कितनी बेवा कुफ थी हाँ मैं एक जाने पहचानी महले और एक अंजानी लड़के को छोड़ कर जा रही थी। क्यों मेरी आखों में आसु आ गए थे बातरूम में खड़े खड़े उस रात रिष्टा तो था नहीं तो टोटने का क्या गम वो तो दोस्त भी नहीं था है न प्यार से बेचार जाने की कसा क्यों?
प्यार क्या तुम तो दोस्ती भी नहीं करना चाहते थी न शिवांगी और वो वो ने कम्मा तो प्यार नहीं सिर्फ दोस्ती करना चाहता थी तो अचानक डायरी क्यों लिखना शुरू करतीया? साड सॉंग्स क्यों सुनने लगी?
जब सबके कहने पर पिंटी की शादी में लेडी संगीत में डांस करने के लिए उठी थी पापा ने जल्दी किराय का घर ढूंगे लिया मुझे पहली बार अपना कमरा में ले वाला था खुली-खुली कॉलनी में था हर माइने में अपने महली से अच्छा तो मैं खुश क्यों नहीं थी। दो-चार बार मिला हुआ लड़का अचानक इतना क्यों important हो गया था मेरे लिए। Me, examajdari kapulinda, yik ya biva kufi kariti.
मुझे PhD करनी थी, आगे नौकरी करनी थी, कहीं लेक्चरर बनना था, ये क्या टीनेर बक्वास शौक में उलशती जा रही थी मैं। और वैसे भी, क्या guarantee है कि वो ठीक ठाक लड़का था, जिसको छोड़ने का मुझे इतना घम हो रहा था।
¶ Pita Ka Sapna Aur Naya Safar
हम लड़कियां भी ना पुराना घर छोड़ते वक्त मैं ऐसे रोए जैसे बभु बन कर मैं अपनी दहलीज लांग रही हूँ पापा की भी आखे नम थी लेकिन आख में कंकड है यह कहकर छुपा गए हम दोनों के आसों का कारण अलग था उनके लिए घर परिवार इस सब का हिस्सा था
25 साल पहले उन्होंने पनी छोटी सी नौकरी में एक बड़ा सा सपना देखा और एक बड़ा सा घर ले लिया था वो घर जहा हम सब का जनम हुआ। पापा ने उन दिनों अपनी हैसियत से जादा पाओ फैला कर ये घर लिया था। चाहते थे कि मेरी माँ को कोई तकलीफ न हो। नए घर में बारामदा हो। सुभा की धूप में कम से कम बारामदे में एक एक रामदा हो।
जब घर का काम करते करते ठक जाएं तो मा कम से कम अपने भटी हुई एडियों की दूप में मालिश तो कर सकें। पापा चाहते थे कि मा यही पर अपनी सहीलियों से बाते करें। दिन भर इसी बारामदे में हमारे लिए स्वेटर पुने। یہی چھوٹی چھوٹی باتیں تو پیار ہوتی ہیں نا लड़किया अकसर सबसे ज़ादा उसको पसंद करती हैं जिसमें उन्हें उनके पता की चवी दिखती हैं जायद सड़क पर जिस लड़के ने मुझसे रोप कर बात की थी, वो वही लड़का था, लेकिन अब देर हो चुकी थी, मैं दूर जा रही थी और वो कहीं गुम हो गया था, फिर मुद दिखा ही
हमने मकॉल ने छोड़ती लेकिन कभी कभी उधर जाना होता तो आखें उसको ढूंडा करती थी لیکن زندگی کوئی فلم تھوڑی ہے नया गयर देरे देरे अच्छा लगने लगा था अपना कमरा मैंने बड़ी करीने से सजाया था गर के अंदर एक और घर था मेरा इसमें मेरी पहचान थी मा और मैं चुट्टी के दिन यहां घंटों पिताते कभी पापा दफदर से लोटते वक्त मुंफली ले आते और बस सब मेरे कमरे में बैट कर गपे मारते और चाय पीते। University में भी मुझे प्रेम पत्र मिलने का सलसिला अभी चालू था.
मेरी प्यारी बेहन को भी अब महबबत के प्रोपोजल आने लगे थे खांदान वाले तो बरसों से ये कह रहे थे लड़की को कब तक घर पे बिठा के रखोगे शादी वादी करोगे की नहीं लेकिन और पापाओं की तरह कभी भी मेरे पापा ने मुझसे शादी के लिए लड़के देखने के लिए जिद नहीं की। चाहते थे कि मैं अपने सपनों को जीलूँ।
¶ Anokha Milan Aur Kahani Ka Ant
जब मन करे ताप शादी करूँ लेकिन वो भी तो असले दुनिया में रहते थे एक दिन हम सब लूडों खेल रहे थे तब पापा ममी ने एक दूसरे के तरफ देखा शायद रियोसल करके आये थे पापा ने कहा पिटा, तुम्हारी माँ तुमसे कुछ कहना चाता कुछ कहती इस पहले मैं नहीं कह दिया। Muží zabrát stímet krna.
मुझे पता है करोगे भी नहीं जिस लड़की की बात तुम करने वाले हो उससे जरूर मिलोंगी पर मुझे शादी के सूपरमार्केट पे खड़ा मत करना पापा ममी बड़े खुश मान गई भे मान गई पापा ने आगे बढ़कर मेरे हाथ को चूम लिया, दो सेकिन बाद बत्ती चली गई, दरवाजे पर घंटी बजे, मैं आलस में जुंचलाते हुए, गरम रजाई से उठी,
बालकनी पर गई और नीचे देखा अपनी साइकल खड़ी करके दरवाजे की और उमीद से देखता हुआ शिफ खड़ा था हलो दोस्तो मेरा नाम प्रियांका है और आप सुन रहे थे कहानी पहला प्यार यह कहानी नेलेश मिसरा की काफी मशहूर कहानी है जब मैंने एक आहनी सुनी तो पहले पियार की इस कहानी से ही मुझे पियार हो गया और मैंने सोचा कि इससे जरूर रेकॉर्ड करना बनता है ओरिशनल रेकॉर्डिंग बहुत ही अच्छा है और माय रेकॉर्डिंग इस इंस्पायर तो अगर आपको पसंद आई हो तो मुझे ज़रूर पताईए
मैं बहुत ही जल्ड दूसरे इससे के साथ, सेकंड बार्ट के साथ वापस आऊंगी. तब तक सुनती रहे ये आडियो कसेट.
