शहादत | सुनील झा
फूल, रास्ते
भीड़
नज़ारे सारे
तुम्हारे लिए
और, तुम हो कि चुप हो...
न सलाम
न दुआ
ऐसे भी कोई घर आता है भला!
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शहादत | सुनील झा
फूल, रास्ते
भीड़
नज़ारे सारे
तुम्हारे लिए
और, तुम हो कि चुप हो...
न सलाम
न दुआ
ऐसे भी कोई घर आता है भला!