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Aana | Kailash Manhar

Jun 27, 20252 minEp. 818
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Episode description

आना |  कैलाश मनहर


आऊँगा

बारिश से भीगे खेतों पर

क्वार की धूप बनकर

चमकता-सा....


आऊँगा

थके हुए बदन की रगों में

धारोष्ण दूध की तरह

उफनता-सा....


आऊँगा

रूठी हुई प्रेमिका की आँखों में

मानभरी लालिमा लिए

दमकता-सा....


आऊँगा

अकेले बच्चे के पास

नाचती हुई चिड़िया के परों में

लचकता-सा....


आऊँगा

मकई के दानों में बनकर

मिठास,

शरद के आसपास

सूर्योदय के साथ

चूमने को तुम्हारे खुरदरे हाथ

ज़रूर ज़रूर आऊँगा,

करना तुम -- इन्तज़ार....


Transcript

आना | कैलाश मनहर आऊँगा बारिश से भीगे खेतों पर क्वार की धूप बनकर चमकता-सा.... आऊँगा थके हुए बदन की रगों में धारोष्ण दूध की तरह उफनता-सा.... आऊँगा रूठी हुई प्रेमिका की आँखों में मानभरी लालिमा लिए दमकता-सा.... आऊँगा अकेले बच्चे के पास नाचती हुई चिड़िया के परों में लचकता-सा.... आऊँगा मकई के दानों में बनकर मिठास, शरद के आसपास सूर्योदय के साथ चूमने को तुम्हारे खुरदरे हाथ ज़रूर ज़रूर आऊँगा, करना तुम -- इन्तज़ार....
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