मार्ग सत्य जीवन | Marg Satya Jeevan - podcast cover

मार्ग सत्य जीवन | Marg Satya Jeevan

मार्ग सत्य जीवनmargsatyajeevan.com
मार्ग सत्य जीवन सत्य वचन कलीसिया की सेवकाई है। यह उत्तरी भारत में कलीसिया के आध्यात्मिक विकास के लिए मुफ्त संसाधन उपलब्ध कराती है। मा.स.जी. पर पाए जाने वाले सन्देश सत्य वचन कलीसिया के अगुवों द्वारा प्रचार किए गए हैं। आप इन संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं, और स्पष्ट करें कि आप मा.स.जी. के संसाधनों का उपयाग कर रहे हैं। Marg Satya Jeevan (MSJ) is a ministry of (SVC). It provides free Hindi resources for the spiritual growth of the church in North India. The sermons on the MSJ website are preached by the Elders of SVC. Please feel free to use the resources, and please duly acknowledge MSJ.
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Episodes

परमेश्वर प्रदत्त विरोधी और परमेश्वर प्रदत्त विश्वास

जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन केवल इतना करो कि तुम्हारा आचरण ख्रीष्ट के सुसमाचार के योग्य हो. . . विरोधियों से किसी प्रकार भयभीत नहीं होते। . . . क्योंकि ख्रीष्ट के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ है कि तुम उस पर केवल विश्वास ही न करो वरन् उसके लिए कष्ट भी सहो। (फिलिप्पियों 1:27-29) पौलुस ने फिलिप्पियों के लोगों को बताया कि ख्रीष्ट के सुसमाचार के योग्य आचरण का अर्थ है शत्रुओं के सामने भयभीत न होना। और फिर उसने निडरता का तर्क दिया। तर्क यह है: परमेश्वर ने तुम्हें दो वरदान दिए हैं, केवल एक नहीं — विश...

Aug 13, 20233 minSeason 1Ep. 98

परमेश्वर का अन्तिम निर्णायक शब्द

प्राचीनकाल में परमेश्वर ने नबियों के द्वारा पूर्वजों से बार-बार तथा अनेक प्रकार से बातें करके, इन अन्तिम दिनों में हमसे अपने पुत्र के द्वारा बातें की हैं। (इब्रानियों 1:1-2) संसार में पुत्र के आने के साथ ही अन्तिम दिनों का आरम्भ हो जाता है। “इन अन्तिम दिनों में हमसे अपने पुत्र के द्वारा बातें की हैं।” ख्रीष्ट के आने के पश्चात् हम लोग अन्तिम दिनों में जी रहे हैं — अर्थात् इतिहास के अन्तिम दिन, जैसा कि हम जानते हैं कि परमेश्वर के राज्य की अन्तिम और पूर्ण स्थापना से पहले। इब्रानियों के लेखक का बिन्...

Aug 13, 20233 minSeason 1Ep. 141

सुसमाचार का लक्ष्य

सुसमाचार का लक्ष्य जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन अतः इस से बढ़कर उसके लहू के द्वारा धर्मी ठहराए जाकर, हम उसके द्वारा परमेश्वर के प्रकोप से क्यों न बचेंगे? क्योंकि जब हम शत्रु ही थे, हमारा मेल परमेश्वर के साथ उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हुआ तो उस से बढ़कर, अब मेल हो जाने पर हम उसके जीवन के द्वारा उद्धार पाएँगे। केवल यही नहीं, परन्तु हम परमेश्वर में अपने प्रभु यीशु के द्वारा आनन्दित होते हैं, जिसके द्वारा अब हमारा मेल हुआ है। (रोमियों 5:9-11) हमें किस बात से बचाए जाने की आवश्यकता है? पद 9 स्प...

Aug 12, 20232 min

चिन्ता के विरुद्ध अस्त्र-शस्त्र

किसी भी बात की चिन्ता न करो, परन्तु प्रत्येक बात में प्रार्थना और निवेदन के द्वारा तुम्हारी विनती धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख प्रस्तुत की जाए। (फिलिप्पियों 4:6) जब हम अपनी विनतियों को परमेश्वर के सम्मुख प्रस्तुत करते हैं तो जिन बातों के लिए हम धन्यवादी होते हैं उनमे से एक उसकी प्रतिज्ञाएँ हैं। ये वे अस्त्र-शस्त्र हैं जो चिन्ता को उत्पन्न करने वाले अविश्वास को काट देते हैं। तो मैं इस रीति से लड़ता हूँ। जब मैं अपनी सेवा के व्यर्थ और निष्फल होने के विषय में चिन्तित होता हूँ, तो मैं यशायाह 55:...

Aug 12, 20233 minSeason 1Ep. 111

सम्पत्ति और सम्बन्धियों को जाने दो

उन दिनों का स्मरण करो, जब तुम ज्योति प्राप्त करने के पश्चात् घोर कष्टों के संघर्ष में स्थिर रहे थे। कभी-कभी तो तुम निन्दा और क्लेश के द्वारा लोगों के सम्मुख तमाशा बने, और कभी तो जो सताए गए थे उनके साथ भागीदार बने। क्योंकि तुम ने बन्दियों के साथ सहानुभूति दिखाई और अपनी सम्पत्ति के जब्त किए जाने को यह जान कर सहर्ष स्वीकार किया कि तुम्हारे पास और भी अधिक उत्तम और चिरस्थाई सम्पत्ति है। इसलिए अपना भरोसा न छोड़ो, जिसका महान् प्रतिफल है। (इब्रानियों 10:32-35) इब्रानियों 10:32-35 में इन ख्रीष्टियों ने इ...

Aug 12, 20233 minSeason 1Ep. 112

यीशु द्वारा आनन्द का पीछा करना

विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर अपनी दृष्टि लगाए रहें, जिसने उस आनन्द के लिए जो उसके सामने रखा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न करके क्रूस का दुःख सहा, और परमेश्वर के सिंहासन की दाहिनी ओर जा बैठा। (इब्रानियों 12:2) क्या यीशु का उदाहरण ख्रीष्टीय सुखवाद (Hedonism) के सिद्धान्त के विपरीत है? अर्थात् प्रेम ही आनन्द का मार्ग है और उसे इसी कारण से चुना जाना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि कोई सर्वशक्तिमान की आज्ञाकारिता के लिए अनिच्छा प्रकट करे अथवा अनुग्रह का साधन बनने के विशेषाधिकार के प्रति खीझता प...

Aug 12, 20232 minSeason 1Ep. 114

ऐसा क्लेश जो विश्वास को दृढ़ करता है

ऐसा क्लेश जो विश्वास को दृढ़ करता है जॉन पाइपर द्वारा भक्तिमय अध्ययन हे मेरे भाइयो, जब तुम विभिन्न परीक्षाओं का सामना करते हो तो इसे बड़े आनन्द की बात समझो, यह जानते हुए कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। (याकूब 1:2-3) यह कितना भी अटपटा क्यों न प्रतीत हो पर दुःख के द्वारा विचलित किए जाने का एक प्राथमिक उद्देश्य हमारे विश्वास को और अडिग बनाना है। विश्वास माँसपेशी के जैसा है: यदि आप उस पर उसकी सहने की सीमा तक दबाव डालेंगे तो यह दृढ़ होती है, निर्बल नहीं। यहाँ याकूब का यही अर...

Aug 12, 20233 min

Genesis 5:1-6:8 पाप मृत्यु की ओर ले जाता है, परन्तु धार्मिकता जीवन की ओर।

पाप मृत्यु की ओर ले जाता है, परन्तु धार्मिकता जीवन की ओर। उत्पत्ति 5:1-6:8 Sin Leads To Death But Righteousness Leads To Life Genesis 5:1-6:8 #margsatyajeevan​​ ​​ #मार्गसत्यजीवन #broharshitsingh #msj #gospel # #genesis #god #genesis #worship #sin #rebellion #creator https://margsatyajeevan.com/ https://www.instagram.com/margsatyajeevan/ https://www.facebook.com/margsatyajeevann/ https://anchor.fm/margsatyajeevan https://youtu.be/mpZIhvOH6G0 https://youtu.be/7JzLAURxo7I https://youtu.be/mpBBYTmP...

Aug 06, 202352 minSeason 1Ep. 5

Genesis 2:4-25 परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में सृजा है, अपनी आराधना करने के लिए।

परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में सृजा है, अपनी आराधना करने के लिए। उत्पत्ति 2:4-25 God Has Created Man In His Image To Worship Him. Genesis 2:4-25 1. मनु्ष्य की सृष्टि। 2. मनुष्य के लिए प्रावधान। 3. मनुष्य के लिए संगति का प्रावधान। #margsatyajeevan​​ ​​ #मार्गसत्यजीवन #broharshitsingh #msj #gospel # #genesis #god #genesis #worship https://margsatyajeevan.com/ https://www.instagram.com/margsatyajeevan/ https://www.facebook.com/margsatyajeevann/ https://anchor.fm/margsatyajeevan https://youtu...

Aug 03, 202354 minSeason 1Ep. 2

Genesis 3:1-24 सृष्टिकर्ता परमेश्वर से विद्रोह का परिणाम लज्जा, श्राप और जीवन से अलगाव है।

सृष्टिकर्ता परमेश्वर से विद्रोह का परिणाम लज्जा, श्राप और जीवन से अलगाव है। उत्पत्ति 3:1-24 The Result Of Rebellion Against The Creator God Is Shame, Curse, And Separation From Life. Genesis 3:1-24 #margsatyajeevan​​ ​​ #मार्गसत्यजीवन #broharshitsingh #msj #gospel # #genesis #god #genesis #worship #sin #rebellion #creator https://margsatyajeevan.com/ https://www.instagram.com/margsatyajeevan/ https://www.facebook.com/margsatyajeevann/ https://anchor.fm/margsatyajeevan https://youtu.be/mpZIhvOH6G...

Aug 03, 20231 hrSeason 1Ep. 3

Genesis 4:1-26 यदि परमेश्वर दया न दिखाए तो विद्रोह अत्यधिक पाप की बहुतायत को उत्पन्न करेगा।

यदि परमेश्वर दया न दिखाए तो विद्रोह अत्यधिक पाप की बहुतायत को उत्पन्न करेगा। उत्पत्ति 4:1-26 Unless God Shows Mercy, Rebellion Will Lead To A Multitude Of Sins. Genesis 4:1-26 #margsatyajeevan​​ ​​ #मार्गसत्यजीवन #broharshitsingh #msj #gospel # #genesis #god #genesis #worship #sin #rebellion #creator https://margsatyajeevan.com/ https://www.instagram.com/margsatyajeevan/ https://www.facebook.com/margsatyajeevann/ https://anchor.fm/margsatyajeevan https://youtu.be/mpZIhvOH6G0 https://youtu.be/7Jz...

Jul 30, 20231 hr 6 minSeason 1Ep. 4

सेवा करने के लिए आपको क्या प्रेरित करता है?

क्योंकि जो अपने शरीर के लिए बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; परन्तु जो पवित्र आत्मा के लिए बोता है, वह पवित्र आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। (गलातियों 6:8) विश्वास में परमेश्वर के अनुग्रह का यथासम्भव अनुभव करने की एक अतृप्त भूख होती है। इसलिए, विश्वास उस नदी की ओर बढ़ता है जहाँ परमेश्वर का अनुग्रह सबसे अधिक मुक्त रूप से बहता है, अर्थात् प्रेम की नदी की ओर। कौन सी अन्य बात हमें अपने सुखदायक जीवन शैली से बाहर ले जाएगी कि हम उन असुविधाओं और पीड़ाओं को अपने ऊपर ले सकें जि...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 51

डर जो हमें अपनी ओर खींचता है।

“डरो मत, क्योंकि परमेश्वर इसलिए आया है कि तुम्हारी जाँच करे, और इसलिए भी कि उसका भय तुम में बना रहे, जिससे कि तुम पाप न करो।” (निर्गमन 20:20) एक प्रकार का डर है जो दासवत् है और हमें परमेश्वर से दूर ले जाता है, तथा दूसरे प्रकार का डर है जो भला है और हमें परमेश्वर के निकट खींचता है। मूसा ने उसी पद में एक के विरूद्ध चिताया और दूसरे के लिए बुलाहट दिया, निर्गमन 20:20: “मूसा ने लोगों से कहा, ‘डरो मत , क्योंकि परमेश्वर इसलिए आया है कि तुम्हारी जाँच करे, और इसलिए भी कि उसका भय तुम में बना रहे, जिससे कि ...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 39

विश्वास दोष-बोध, लोभ, और भय को निकाल देता है

इस आदेश का अभिप्राय यह है कि शुद्ध हृदय और अच्छे विवेक तथा निष्कपट विश्वास से प्रेम उत्पन्न हो। (1 तीमुथियुस 1:5) पौलुस का लक्ष्य प्रेम है। और इस महान् प्रभाव का एक महत्वपूर्ण स्रोत निष्कपट विश्वास है। विश्वास इस कारण से प्रेम का एक अचूक स्रोत है क्योंकि परमेश्वर के अनुग्रह पर विश्वास हमारे हृदयों से उन पापी शक्तियों को निकाल देता है जो प्रेम में बाधा डालती हैं। यदि हम दोष-बोध का आभास करते हैं, हम स्व-केन्द्रित अवसाद और आत्मदया में पड़े रहते हैं और हम किसी और की आवश्यकता को देख भी नहीं पाते हैं,...

Jul 28, 20234 minSeason 1Ep. 50

लालच नामक घातक फन्दा।

जो धनवान होना चाहते हैं, वे प्रलोभन, फन्दे में, और अनेक मूर्खतापूर्ण और हानिकारक लालसाओं में पड़ जाते हैं जो मनुष्य को पतन तथा विनाश के गर्त में गिरा देती हैं। (1 तीमुथियुस 6:9) लालच प्राण को सर्वदा के लिए नरक में नाश कर सकता है। पौलुस तीन पद आगे 1 तीमुथियुस 6:12 में जो कहता है उस कारण मैं निश्चित हूँ कि यह विनाश कोई अस्थायी आर्थिक असफलता नहीं, वरन् नरक में अन्तिम विनाश है। 1 तीमुथियुस 6:12 में पौलुस कहता है कि विश्वास की अच्छी कुश्ती लड़ने के द्वारा लालच का प्रतिरोध किया जाना चाहिए। फिर वह कहता...

Jul 28, 20232 minSeason 1Ep. 38

हम विश्वास के द्वारा आत्मा को अनुभव करते हैं

जो तुम्हें आत्मा प्रदान करता है और तुममें सामर्थ्य के कार्य करता है, क्या वह व्यवस्था के कार्यों से ऐसा करता है या तुम्हारे विश्‍वास सहित सुनने से? (गलातियों 3:5) प्रत्येक ख्रीष्टीय के भीतर पवित्र आत्मा वास करता है। प्रेरित पौलुस ने कहा, “यदि किसी में ख्रीष्ट का आत्मा न हो तो वह उसका नहीं है” (रोमियों 8:9)। आत्मा आपके पास तब आया जब आपने पहली बार परमेश्वर की लहू से मोल ली गई प्रतिज्ञाओं पर विश्वास किया। और इसी साधन के द्वारा, आत्मा आता रहता है और कार्य करता रहता है। इसलिए पौलुस गलातियों 3:5 में आ...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 49

मैं प्रत्येक परिस्थिति में सन्तुष्ट रह सकता हूँ।

मैंने प्रत्येक परिस्थिति में सन्तुष्ट रहना सीख लिया है। मैं दीन-हीन दशा तथा सम्पन्नता में भी रहना जानता हूँ, हर बात और प्रत्येक परिस्थिति में मैंने तृप्त होना, भूखा रहना, और घटना-बढ़ना सीख लिया है। जो मुझे सामर्थ्य प्रदान करता है, उसके द्वारा मैं सब कुछ कर सकता हूँ। (फिलिप्पियों 4:13) परमेश्वर द्वारा दिन-प्रतिदिन भविष्य-के-अनुग्रह का प्रावधान पौलुस को तृप्त या भूखा होने के लिए, सम्पन्न होने या दुख उठाने के लिए तथा घटने-बढ़ने के लिए सक्षम बनाता है । “मैं सब कुछ कर सकता हूँ” का वास्तव में अर्थ है ...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 37

विश्वास उसका आदर करता है जिस पर यह भरोसा करता है।

परमेश्वर की प्रतिज्ञा के सम्बन्ध में वह अविश्वास के कारण विचलित नहीं हुआ, परन्तु परमेश्वर की महिमा करते हुए विश्वास में दृढ़ हुआ। (रोमियों 4:20) मेरी बड़ी हार्दिक अभिलाषा है कि पवित्रता तथा प्रेम की हमारी खोज के द्वारा परमेश्वर को महिमा मिले। परन्तु परमेश्वर तब तक महिमान्वित नहीं होता है जब तक हमारी खोज परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर विश्वास के द्वारा सशक्त नहीं होगी। और जिस परमेश्वर ने स्वयं को पूर्णता से प्रकट किया है यीशु ख्रीष्ट में, जो हमारे पापों के लिए क्रूस पर चढ़ाया गया और हमारे धर्मीकरण के...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 36

अवसाद का सामना करने हेतु यीशु के छः उपाय

उसने अपने साथ पतरस और जब्दी के दो पुत्रों को लिया, और व्यथित तथा व्याकुल होने लगा। (मत्ती 26:37) बाइबल हमें क्रूसीकरण से एक रात पहले यीशु के प्राण की एक अद्भुत झलक देती है। अवसाद या निराशा के साथ यीशु के महत्वपूर्ण युद्ध की रीति को देखें और इससे सीखें। उसने अपने साथ रहने के लिए कुछ घनिष्ठ मित्रों को चुना। “उसने अपने साथ पतरस और जब्दी के दो पुत्रों को लिया” (मत्ती 26:37)। उसने उनके सामने अपना प्राण खोल दिया। उसने उनसे कहा, “मेरा प्राण बहुत उदास है, यहाँ तक कि मैं मरने पर हूँ” (मत्ती 26:38)। उसने ...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 47

बचाने वाला विश्वास क्षमा से प्रेम करता है

एक दूसरे के प्रति दयालु और करुणामय बनो, और परमेश्वर ने ख्रीष्ट में जैसे तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो। (इफिसियों 4:32) बचाने वाले विश्वास का अर्थ केवल यह विश्वास करना नहीं है कि आपको क्षमा कर दिया गया है। बचाने वाला विश्वास पाप के घिनौनेपन को देखता है, और फिर परमेश्वर की पवित्रता को देखता है, और आत्मिक रूप से समझता है कि परमेश्वर द्वारा क्षमा किया जाना अवर्णनीय रीति से महिमामय और सुन्दर है। हम केवल इसे स्वीकार ही नहीं करते हैं; हम इसकी सराहना करते हैं। हम इ...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 46

हमें पवित्रता के लिए कैसे संघर्ष करना है।

सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो, और उस पवित्रता के खोजी बनो, जिसके बिना प्रभु को कोई भी नहीं देख पाएगा। (इब्रानियों 12:14) एक ऐसी व्यावहारिक पवित्रता है जिसके बिना हम प्रभु को नहीं देखेंगे। बहुत से लोग ऐसे जीते हैं मानो कि यह बात सत्य ही नहीं है। स्वयं को ख्रीष्टीय कहने वाले ऐसे लोग भी हैं जो इतना अपवित्र जीवन जीते हैं कि वे यीशु के भयानक शब्दों को सुनेंगे, “मैंने तुम को कभी नहीं जाना; हे कुकर्मियो, मुझ से दूर हटो” (मत्ती 7:23)। पौलुस स्वयं को ख्रीष्टीय कहने वाले विश्वासियों से कहता है, “यदि तु...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 35

ख्रीष्ट ने कड़वाहट पर विजय कैसे पाई

उसने गाली सुनते हुए गाली नहीं दी, दुःख सहते हुए धमकियाँ नहीं दी, पर अपने आप को उसके हाथ सौंप दिया जो धार्मिकता से न्याय करता है। (1 पतरस 2:23) यीशु से अधिक गम्भीर रूप से किसी के विरुद्ध पाप नहीं किया गया। उसके प्रति की गई हर एक शत्रुता पूरी रीति से अनुपयुक्त थी। आज तक कोई ऐसा व्यक्ति नहीं हुआ है जो यीशु से बढ़कर आदर के योग्य हो; और न ही उससे बढ़कर किसी और का निरादर हुआ है। यदि किसी के पास क्रोधित होने का और कड़वाहट से भरने और प्रतिशोध लेने का उचित कारण था, तो वह केवल यीशु के पास ही था। उसने स्वय...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 45

वह सन्तुष्टि जो पाप को पराजित करती है।

यीशु ने उनसे कहा, “जीवन की रोटी मैं हूँ : जो मेरे पास आता है भूखा न होगा, और वह जो मुझ पर विश्वास करता है कभी प्यासा न होगा।” (यूहन्ना 6:35) हमें यहाँ जो देखना चाहिए वह यह है कि विश्वास का सार यह है - ख्रीष्ट में परमेश्वर हमारे लिए जो कुछ भी है उससे सन्तुष्ट होना। विश्वास को इस प्रकार से परिभाषित करना दो बातों पर बल देता है। पहली बात विश्वास परमेश्वर-केन्द्रित है। केवल परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ ही नहीं हैं जो हमें सन्तुष्ट करती हैं। पर यीशु में हमारे लिए वह सब कुछ जो परमेश्वर स्वयं है, हमें सन्तुष...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 34

अनुग्रह क्षमादान है — और साथ में सामर्थ्य भी!

फिर भी परमेश्वर के अनुग्रह से मैं अब जो हूँ सो हूँ। मेरे प्रति उसका अनुग्रह व्यर्थ नहीं ठहरा, परन्तु मैंने उन सब से बढ़कर परिश्रम किया, फिर भी मैंने नहींं, परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह ने मेरे साथ मिलकर किया। (1 कुरिन्थियों 15:10) अनुग्रह केवल हमारे किए हुए पाप के प्रति ढिलाई नहीं है। अनुग्रह तो पाप न करने में सक्षम बनाने वाला परमेश्वर का वरदान और सामर्थ्य है। अनुग्रह सामर्थ्य है, केवल क्षमादान नहीं है। उदाहरण के लिए 1 कुरिन्थियों 15:10 में यह बात स्पष्ट है। पौलुस अनुग्रह का वर्णन उसके कार्य को सक...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 33

मनुष्य का भय मानने का अपराध।

तब शाऊल ने शमूएल से कहा, “मैंने पाप किया है। सचमुच मैंने यहोवा की आज्ञा और तेरे वचनों का उल्लंघन किया है क्योंकि मैंने लोगों का भय माना, और उनकी बात सुनी।” (1 शमूएल 15:24) शाऊल ने परमेश्वर के स्थान पर लोगों की आज्ञा क्यों मानी? क्योंकि उसने परमेश्वर के स्थान पर मनुष्यों का भय माना। उसने अनाज्ञाकारिता के ईश्वरीय परिणामों से अधिक आज्ञाकारिता के मानवीय परिणामों का भय माना। उसने परमेश्वर की अप्रसन्नता से अधिक लोगों की अप्रसन्नता का भय माना। और यह परमेश्वर का बहुत बड़ा अपमान है। वास्तव में, यशायाह कह...

Jul 28, 20233 minSeason 1Ep. 32

व्यावहारिक प्रेम की दृढ़ जड़।

हम जानते हैं कि हम मृत्यु से पार होकर जीवन में आ पहुचे हैं, क्योंकि हम भाइयों से प्रेम रखते हैं। (1 यूहन्ना 3:14) वास्तव में प्रेम इस बात का प्रमाण है कि हमारा नया जन्म हुआ है — कि हम ख्रीष्टीय हैं, कि हमारा उद्धार हुआ है। कभी-कभी बाइबल हमारी पवित्रता को तथा लोगों के प्रति हमारे प्रेम को हमारे अन्तिम उद्धार का प्रतिबन्ध बनाती है। दूसरे शब्दों में, यदि हम पवित्र नहीं हैं, और हम प्रेमी नहीं हैं, तो हम न्याय के दिन नहीं बचेंगे (देखिए, इब्रानियों 12:14; गलातियों 5:21; 1 कुरिन्थियों 6:10)। इसका यह अर...

Jul 27, 20234 minSeason 1Ep. 42

असहायों के लिए एक शरणस्थान

तेरी भलाई कितनी महान है, जो तू ने . . . उन पर की है जो तेरी शरण में आते हैं। (भजन 31:19) भविष्य-के-अनुग्रह का अनुभव प्रायः इस बात पर निर्भर है कि क्या हम परमेश्वर की शरण में आएँगे, या क्या हम उसकी देखभाल पर सन्देह करेंगे और अन्य आश्रयों की ओर दौड़ेंगे। उन लोगों के लिए जो परमेश्वर में शरण लेते हैं, भविष्य-के-अनुग्रह की प्रतिज्ञाएँ अनेक और बहुमूल्य हैं। उसकी शरण लेने वालों में से कोई भी दोषी न ठहरेगा। (भजन 34:22) जो उसमें शरण लेते हैं उन सब की वह ढाल है। (2 शमूएल 22:31) क्या ही धन्य हैं वे सब जो उ...

Jul 27, 20232 minSeason 1Ep. 40

पाप क्या है?

पाप क्या है? What is sin? #margsatyajeevan #मार्गसत्यजीवन #msj #sin #easter #resurrection #crucifixión #gospel #sin #broharshitsinghhttps://margsatyajeevan.com/https://www.instagram.com/margsatyajeevan/https://www.facebook.com/margsatyajeevann/https://anchor.fm/margsatyajeevanhttps://youtu.be/yqM17HhIuoY

Jul 12, 20235 min

Genesis 1:1-2:3 परमेश्वर सृष्टिकर्ता है, इसलिए उसकी आराधना करो।

परमेश्वर सृष्टिकर्ता है, इसलिए उसकी आराधना करो। उत्पत्ति 1:1-2:3 God Is The Creator, Therefore Worship Him. Genesis 1:1-2:3 #margsatyajeevan​​ ​​ #मार्गसत्यजीवन #broharshitsingh #msj #gospel #genesis https://margsatyajeevan.com/ https://www.instagram.com/margsatyajeevan/ https://www.facebook.com/margsatyajeevann/ https://anchor.fm/margsatyajeevan https://youtu.be/mpZIhvOH6G0

Jul 09, 20231 hr 4 minSeason 1Ep. 1

Philemon 1:8-25 सुसमाचार की सच्ची समझ स्वयं को क्षमा और मेल मिलाप में प्रदर्शित करेगी।

सुसमाचार की सच्ची समझ स्वयं को क्षमा और मेल मिलाप में प्रदर्शित करेगी। फिलेमोन 1:8-25 True Understanding Of The Gospel Will Display Itself In Forgiveness And Reconciliation. Philemon 1:8-25 #margsatyajeevan​​ ​​ #मार्गसत्यजीवन #broharshitsingh #msj #gospel #paul #philemon https://margsatyajeevan.com/ https://www.instagram.com/margsatyajeevan/ https://www.facebook.com/margsatyajeevann/ https://anchor.fm/margsatyajeevan https://youtu.be/fU4p9ji7uF4 https://youtu.be/fU4p9ji7uF4...

Jul 03, 20231 hr 6 minSeason 1Ep. 2
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