चिन्ता के विरुद्ध अस्त्र-शस्त्र - podcast episode cover

चिन्ता के विरुद्ध अस्त्र-शस्त्र

Aug 12, 20233 minSeason 1Ep. 111
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किसी भी बात की चिन्ता न करो, परन्तु प्रत्येक बात में प्रार्थना और निवेदन के द्वारा तुम्हारी विनती धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख प्रस्तुत की जाए। (फिलिप्पियों 4:6)

जब हम अपनी विनतियों को परमेश्वर के सम्मुख प्रस्तुत करते हैं तो जिन बातों के लिए हम धन्यवादी होते हैं उनमे से एक उसकी प्रतिज्ञाएँ हैं। ये वे अस्त्र-शस्त्र हैं जो चिन्ता को उत्पन्न करने वाले अविश्वास को काट देते हैं। तो मैं इस रीति से लड़ता हूँ। 

जब मैं अपनी सेवा के व्यर्थ और निष्फल होने के विषय में चिन्तित होता हूँ, तो मैं यशायाह 55:11 की प्रतिज्ञा के साथ अविश्वास से लड़ता हूँ, “उसी प्रकार मेरे मुँह से निकलनेवाला वचन होगा। वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, वरन् मेरी इच्छा पूरी करेगा और जिस काम के लिए मैंने उसको भेजा है उसे पूरा करके ही लौटेगा।”

जब मैं अपने कार्य को करने के प्रति अत्यधिक निर्बलता के विषय में चिन्तित होता हूँ, तो मैं ख्रीष्ट की प्रतिज्ञा के साथ अविश्वास से लड़ता हूँ, “मेरा अनुग्रह तेरे लिए पर्याप्त है, क्योंकि मेरा सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होता है” (2 कुरिन्थियों 12:9)।

जब मैं भविष्य सम्बन्धी लिए जाने वाले निर्णयों के विषय में चिन्तित होता हूँ, तो मैं इस प्रतिज्ञा के साथ अविश्वास से लड़ता हूँ, “मैं तुझे बुद्धि दूँगा और जिस मार्ग पर तुझे चलना है उसमें तेरी अगुवाई करूँगा, मैं अपनी दृष्टि तुझ पर लगाए रखकर तुझे सम्मति दूँगा” (भजन 32:8)।

जब मैं विरोधियों का सामना करने के विषय में चिन्तित होता हूँ, तो मैं इस प्रतिज्ञा के साथ अविश्वास से लड़ता हूँ, “यदि परमेश्वर हमारे पक्ष में है, तो कौन हमारे विरुद्ध है?” (रोमियों 8:31)।

जब मैं अपने प्रियजनों की देखभाल के विषय में चिन्तित होता हूँ, तो मैं इस प्रतिज्ञा के साथ अविश्वास से लड़ता हूँ, कि यदि मैं, बुरा होकर, अपने बच्चों को भली वस्तुएँ देना जानता हूँ, “तो तुम्हारा पिता जो स्वर्ग में है अपने माँगने वालों को अच्छी वस्तुएँ और अधिक क्यों न देगा?” (मत्ती 7:11)।

और अपने आत्मिक सन्तुलन को बनाए रखने के लिए मैं इस बात को स्मरण करने के द्वारा लड़ता हूँ कि प्रत्येक जिसने ख्रीष्ट के कारण घर या भाइयों या बहिनों, या माता या पिता या बच्चों या खेतों को छोड़ा है, वह “वर्तमान समय में घरों, और भाइयों और बहिनों, और माताओं, और बच्चों और खेतों को सौ गुणा अधिक [पाएग], पर सताव के साथ, तथा आने वाले युग में अनन्त जीवन” (मरकुस 10:29-30)।

जब मैं अस्वस्थ होने के विषय में चिन्तित होता हूँ, तो मैं इस प्रतिज्ञा के साथ अविश्वास से लड़ता हूँ, “धर्मी पर बहुत सी विपत्तियाँ आती तो हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सब से छुड़ाता है” (भजन 34:19)।

और मैं काँपते हुए इस प्रतिज्ञा को लेता हूँ: “क्लेश में धैर्य उत्पन्न होता है, तथा धैर्य से खरा चरित्र, और खरे चरित्र से आशा उत्पन्न होती है; आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है, उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे हृदयों में उण्डेला गया है” (रोमियों 5:3-5)।



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