हनुमान चालीसा की बारहवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा - केले का पता रघुपति कीन्ही बहुत बडाई।तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ 12 ॥ तुलसीदासजी लिखते हैं कि हनुमान जी की प्रशंसा करते हुए भगवान कहते हैं कि तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो यानी तुम मेरे हो यह भगवान अपने मुख से भक्त के लिये कहना यह भक्ति का अन्तिम फल है। हनुमान जी भगवान का कार्य करने को हमेशा आतुर रहते हैं।भगवान, मै तुम्हारा हूँ इस स्थिति पर पहुँचना हो तो उसके लिये साधना कौन सी है? #HanumanChalisa #HanumanKatha...
Feb 05, 2021•5 min
हनुमान चालीसा की ग्यारहवीं चौपाई का हिंदी अर्थ हनुमान कथा - राम नाम लाय सजीवन लखन जिवाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥ 11 ॥ हे हनुमानजी आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जीवित कर दिया | जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको अपने हृदय से लगा लिया। जिस प्रकार मनुष्य के साथ उसकी छाया का होना निश्चित है, उसी प्रकार रामजी के आते ही लक्ष्मण जी और का आना हनुमान जी का आना अनिवार्य ही है। #HanumanChalisa #HanumanKatha
Feb 04, 2021•4 min
हनुमान चालीसा की दसवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा अमृत बूटी भीम रुप धरि असुर संहारे। "रामचंद्र के काज संवारे ॥ 10 ॥ आपने विकराल रुप धारण करके राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उद्धेश्यों को सफल बनाने में सहयोग दिया। यहाँ पर तुलसीदासजी का लिखने का अभिप्राय यह है कि हनुमानजी भगवान का कार्य करते थे, तथा कार्य करते समय उसमें आसुरी वृत्ति के लोग बाधा उत्पन्न करते थे तो उनका उन्होने संहार किया। #HanumanChalisa #HanumanKatha
Feb 03, 2021•4 min
तुलसीदास जी लिखते है हनुमान जी ने सीता माता को अपना छोटा रुप दिखाया इसका तात्पर्य यह है कि जीव कितना ही बडा क्यों न हो परन्तु माता के सामने उसे छोटा ही होना चाहिए।तथा उन्होने आगे लिखा है बिकट रुप धरि लंक जरावा अर्थात जीव भले ही सूक्ष्म हो परंतु उसमें अपार शक्ति होती है तथा उस शक्ति का उपयोग भगवान का साधन बनकर बडे से बडा काम कर सकता है। सूक्ष्म रुप धरि सियहिं देखावा। बिकट रुप धरि लंक जरावा ॥ 9 ॥ #HanumanChalisa #HanumanKatha
Feb 02, 2021•4 min
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया ॥ 8 ॥ आप श्रीराम के चरित्र सुनने में आनन्द रस लेते हैं तथा श्रीराम सीता और लक्ष्मण आपके हृदय में बसते हैं। भगवान की कथा में प्रेम होना भक्ति का एक लक्षण है।हनुमानजी का श्री राम कथा नुराग पराकाष्ठा को प्राप्त है जिस की कोई सीमा नहीं है । सच तो यह है कि श्री हनुमानजी ने श्रीराम कथा को जीवन धारा ही बना लिया हैं।
Feb 01, 2021•5 min
हनुमान चालीसा की सातवीं चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा विद्या प्राप्ति विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर ॥ 07॥ हे शंकर के अवतार, हे केशरी नन्दन, आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है। श्री हनुमानजी के शंकर सुवन, रुद्रावतार या रुद के अंश से उत्पन्न होने के सम्बंध में अनेक कथाएँ मिलती है। एक बार शिवजी ने श्री रामचन्द्रजी की स्तुति की और यह वर मांगा कि हे प्रभो, मैं दास के भाव से आपकी सेवा करना चाहता हूँ , इसलिए कृप्या मेरे इस मनोरथ को पूर्ण किजिए। #HanumanChalisa #...
Jan 30, 2021•6 min
हनुमान चालीसा की छठी चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा हनुमद रामायण शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥ 6॥ हे शंकर के अवतार, हे केशरी नन्दन, आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है। श्री हनुमानजी के शंकर सुवन, रुद्रावतार या रुद के अंश से उत्पन्न होने के सम्बंध में अनेक कथाएँ मिलती है। एक बार शिवजी ने श्री रामचन्द्रजी की स्तुति की और यह वर मांगा कि हे प्रभो, मैं दास के भाव से आपकी सेवा करना चाहता हूँ , इसलिए कृप्या मेरे इस मनोरथ को पूर्ण किजिए। #HanumanChalisa #HanumanKa...
Jan 29, 2021•5 min
हनुमान चालीसा की पांचवी चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा उपनयन संस्कार | हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेउ साजै ॥5॥ आपके हाथ में बज्र और ध्वजा हैं तथा कांधे पर मूंज जनेऊ की शोभा है। तुलसीदासजी यहाँ हनुमानजी के स्वरुप का वर्णन करते हुए लिखते हैं कि श्री हनुमानजी का हाथ वज्र के समान है तथा उनके हाथ में रामनाम की ध्वजा है। इसका संकेत यह है कि हमें भी हनुमानजी की तरह प्रभु कार्य के लिए वचनबद्ध प्रण लेकर प्रभु नाम और काम की ध्वजा हाथ मे लेनी चाहिए। #HanumanChalisa #HanumanKatha...
Jan 28, 2021•5 min
हनुमान चालीसा की चौथी चौपाई का हिंदी अर्थ | हनुमान कथा हनुमान जी को क्यों पसंद हैं सिंदूर कंचन बरन बिराज सुवेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ ॥4॥ तुलसीदासजी जैसे संत जब भगवान का ध्यान करते है, समाधी लगाते है | तब वे समाधी मे तल्लीन हो जाते है तथा उनको भगवान का शरीर, आभूषण, कुण्डल, केस इत्यादि सब सुन्दर लगते है। हमारे जैसे सामान्य इन्सान भी जब प्रेम करते है, उस वक़्त हमें भी उसकी आँख, नाक, कान, सुन्दर लगते हैं। यहाँ तुलसीदासजी वर्णन करते है कि हनुमान जी का शरीर सोने की तरह चमक रहा है |कानों मे कुण्डल ...
Jan 27, 2021•5 min
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी ॥3॥ तुलसीदासजी लिखते हैं हनुमानजी कैसे हैं महावीर बिक्रम बजरंगी हनुमानजी वीरता की साक्षात् प्रतीमा एवं शक्ति तथा बल पराक्रम की जीवंत मूर्ति है। भारतीय मल्लविद्या के ये ही परम इष्ट है, आप कभी अखाडों मे जायँ तो वहाँ आपको महावीर की प्रतीमा अवश्य मिलेगी। उनके चरणों का स्पर्श करके ही पहलवान अपना कार्य प्रारंभ करते है। जिसमें पांच प्रकार की वीरता हो उसे वीर कहते हैं #HanumanChalisa #HanumanKatha
Jan 25, 2021•5 min
राम दूत अतुलित बल-धामा। अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥ 2॥ अंजनी नन्दन श्री रामदूत आपके समान दूसरा कोई बलवान नहीं है। पवनपुत्र श्री हनुमान जी के लिये अनेक भक्तों और कवियों ने अनेक प्रकार के गुण सूचक नाम का प्रयोग किया है। उन्हे अतुलित बलधाम, स्वर्ण पर्वत के समान चमचमाते शरीर वाला, और वायु का पुत्र, ज्ञानियों मे सबसे प्रथम कहा गया है ।संपूर्ण गुणों के से युक्त , वानरों के राजा और श्रीराम का श्रेष्ठ दूत कहा गया है। #HanumanChalisa #HanumanKatha
Jan 23, 2021•7 min
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिंहुँ लोक उजागर॥1॥ श्री हनुमानजी आपका ज्ञान और गुण अथाह है।आपकी जय , तीनों लोकों स्वर्ग-लोक, भू-लोक, और पाताल-लोक में आपकी कीर्ति और यश फला हुआ है। भगवान और उनके भक्तों के गुणों का वर्णन कोई मनुष्य कैसे कर सकता है।जो महापुरुष हो गये हैं, उन्हे गुणों की भूख रहती थी, उन्हे ऐसा लगता था कि जब भगवान के पास जाऊँगा तब सभी अच्छे गुणों को धारण कर जाऊँगा। #HanumanChalisa #HanumanKatha
Jan 22, 2021•5 min
बुद्धिहिन तनु जानिके सुमिरों पवन-कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं हरहु कलेस विकार॥ हनुमान चालीया के प्रारंभ में गु़रू वन्दना करने के पश्चात् उन्होने हनुमानजी की वन्दना करते हुए राम चरित्र लिखने का संकल्प किया है। तुलसीदासजी ने अपना संकल्प हनुमानजी को बता चुके हैं। आप तो जानते ही हैं कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है, मुझे शारीरिक बल, सद्बुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दु:ख व दोषों का नाश कर दीजिए।
Jan 21, 2021•5 min
श्रीगुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारी। बरनऊं रघुवर बिमल जसु जो दायक फल चारि॥ तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा की शुरुआत गुरु वंदना से कि है, हमारी संस्कृति में गुरु को बहुत अधिक सम्मान दिया गया है। अज्ञान के अंधकार को दूर करने के लिए ज्ञान का प्रकाश जलाने वाले गुरु होते है। जीवनहीन और पशुतुल्य बने मानव को देवत्व की ओर ले जाने के लिए जिस व्यक्ति की आवश्यकता रहती है वह गुरु ही है। #HanumanChalisa #HanumanKatha...
Jan 20, 2021•4 min
हम सब हनुमान चालीसा पढते हैं, सब रटा रटाया. क्या हमें चालीसा पढते समय पता भी होता है, कि हम हनुमानजी से क्या मांग रहे हैं? या फिर बस रटा रटाया बोलते जाते हैं. फल शायद तभी मिलेगा जब हमें इसका मतलब भी पता हो. श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित
Jan 19, 2021•7 min
वृंदा ही तुलसी थी, जिसे भगवान गणेश ने असुर से शादी का श्राप दिया था. भगवान शिव के गणेश और कार्तिकेय के अलावा एक और पुत्र थे, जिनका नाम था जलंधर, वो सुर प्रवत्ति का था. वह खुद को सभी देवताओं से ज्यादा शक्तिशाली समझता था उसकी वीरता का रहस्य था, उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म। उसी के प्रभाव से वह विजयी बना हुआ था।
Dec 07, 2020•5 min•Season 1Ep. 24
भगवान् गणेश जो प्रत्येक कार्य में और प्रत्येक पूजा में सर्वप्रथम पूजे जाते है| जो तुलसी पत्र भगवान् विष्णु को अत्यंत प्रिय है , वही तुलसी पत्र भगवान् गणेश को इतनी अप्रिय क्यों है आखिर क्यों गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है. आइए जानते हैं इस की पौराणिक कथा
Nov 18, 2020•3 min•Season 1Ep. 23
जगन्नाथपुरी धाम में आज भी ठाकुर जी को सर्वप्रथम मारवाड़ की करमा बाई की रसोई का भोग लगता है। जगन्नाथपुरी रथयात्रा के रथ में ठाकुर जी की मूर्ति के साथ करमा बाईसा की मूर्ति विद्यमान रहती है बिना करमा बाईसा की मूर्ति रथ में रखे, रथ हिलता भी नहीं है
Nov 02, 2020•5 min•Season 1Ep. 22
अजगर एक विशालकाय और आलसी जानवर के रूप में जाना जाता है, जो कोई काम नहीं करता है,उसी तरह पंक्षी भी कोई काम नहीं करता है।क्योंकि उनके लिए ईश्वर हैं जो उनके जीवन यापन की व्यवस्था करते हैं। अजगर करे ना चाकरी, पंछी करे ना काम, दास मलूका कह गए, सब के दाता राम !इस कथन के पीछे मलूका दास के नास्तिक से आस्तिक बनने की कहानी है,
Oct 19, 2020•6 min•Season 1Ep. 21
विधि शब्द अपने आप में ही विधाता से जुड़ा हुआ शब्द है। आध्यात्मिक जगत में जीवन एवं मृत्यु विधाता के द्वारा बनाया हुआ कानून है स्वयं मधुसूदन ने कहा है मैं विधाता होकर भी विधि के विधान को नही टाल सकता मेरी चाह राधा थी, चाहती मुझको मीरा थी, परंतु मेरा विवाह रुक्मणी से हुआ विधि का विधान कोई टाल नहीं सकता |
Oct 12, 2020•5 min•Season 1Ep. 20
जब मीराबाई भगवान कृष्ण के लिए गाती थी | जब सूरदास जी भक्ति भाव में डूबकर करते थे उस वक्त भी भगवान उन्हें बड़े ध्यान से सुन रहे थे | यदि आपको लगता है की आपकी पुकार भगवान नहीं सुन रहे तो ये आपका वहम है | आइए इस कथा से समझते हैं
Oct 05, 2020•4 min•Season 1Ep. 19
मोर मुकुट के जरिए श्रीकृष्ण यह संदेश देते हैं कि जीवन में भी वैसे ही रंग है जैसे मोर के पंख में है। बहुत गहरे रंग होते हैं यानी दुख और मुसीबत होती है तो कभी हल्के रंग यानी सुख और समृद्धि भी होती है। आइए जानते हैं कि कैसे मोर पंख श्री कृष्ण का मुकुट का हिस्सा बना
Oct 05, 2020•5 min•Season 1Ep. 18
महत्वकांक्षी होने से कोई भी इंसान सीमित हो जाता है। जबकी इंसान में इससे ज्यादा योग्यता हो सकती है। इंसान होना एक असीमित संभावना है। आपका जीवन असीमितता को खोजने के लिए है।आइए इस बोधकथा से समझते हैं कि कैसी होनी चाहिए आप की महत्वाकांक्षा
Oct 05, 2020•4 min•Season 1Ep. 17
भारत के प्राचीन इतिहास में ऐसे गुरूकुलों का बहुत महत्व था। प्रसिद्ध आचार्यों के गुरुकुल में पढ़े हुए छात्रों का सब जगह बहुत सम्मान होता था। क्या है यह तुंबी जिसे गुरु जी कह रहे हैं कि तुम्हें भरकर लानी है कैसी है यह परीक्षा तो आइए जानतें हैं इसके जुड़ी बोध कथा
Oct 05, 2020•4 min•Season 1Ep. 16
जिस प्रकार अच्छे दिन नहीं रहे उसी प्रकार बुरे दिन भी नहीं रहेंगे, किरण चाहे सूर्य की हो या आशा की, जीवन के सारे अन्धकार को मिटा देने के लिए काफी होती है, आज में जो उम्मीद जगती है वही उम्मीद भविष्य का निर्माण करती है आइए जानतें हैं इसके जुड़ी बोध कथा
Oct 05, 2020•3 min•Season 1Ep. 15
हिन्दू धर्म के अनुसार यमराज मृत्यु के देवता हैं जिनका उल्लेख वेद में भी आता है। वेद कहते हैं कि जो भी जन्मा है, चाहे वह मिट्टी का रूप मनुष्य हो, प्रकाशरूप का देवता हो या अग्नि रूप में ब्रह्मराक्षस हो सभी को मरना है। कब और किसके द्वारा हुई यमराज की मृत्यु, तो आइए जानतें हैं इसके जुड़ी पौराणिक कथा
Oct 05, 2020•5 min•Season 1Ep. 14
हम समय देखते हैं अंको के अनुसार परंतु इनके अलावा भी हमारे पास एक और घड़ी है वह है वैदिक घड़ी तो आइए जानतें हैं वैदिक घड़ी में इन अंकों की जगह पर क्या लिखा हुआ रहता है
Oct 05, 2020•4 min•Season 1Ep. 13
आज की कहानी लालच बड़ा की धर्म धर्म का आचरण करते रहना चाहिए कुछ अधिक पाने के लालच में इंसान अपने पास का ही बहुत कुछ खो बैठता है इसलिए लालच से बचें, न जाने किसके भाग्य से आपका जीवन सुखमय व सुरक्षित है परहित धर्म का भी पालन करते रहिए क्योंकि तो आइए जानतें हैं परहित धर्म इसके जुड़ी पौराणिक कथा
Oct 05, 2020•3 min•Season 1Ep. 12
महाभारत की कथा बहुत ही प्रेरणादायक है यह कथा धर्म और अधर्म के बीच हुए युद्ध तक सीमित नहीं है ऐसा ही एक संवाद कर्ण और वासुदेव के बीच हुआ था। जिसमें कर्ण ने कुछ बेहद ही सचे सवाल पूछे थे जो शायद हम सभी के मन में भी कभी न कभी उठे होंगे। वासुदेव ने उन सवालो के सरल से उत्तर दिए थे।
Oct 05, 2020•5 min•Season 1Ep. 11
कैसे हुआ श्री गणेश का जन्म, कैसे मिला भगवान को हाथी का सिर, श्री गणेश जो प्रथम भगवान माने जाते हैं, हाथी जैसा सिर, लंबे दाँत और उसके साथ बड़े-बड़े कान, इन्हीं के कारण उनकी एक अलग पहचान हैं। तो आइए जानतें हैं इसके जुड़ी पौराणिक कथा
Oct 05, 2020•4 min•Season 1Ep. 10