जब किसी के पास पैसा आता है तो वह कई व्यसनों को अपना लेता है।
जो इंसान धन के मद में व्यसनी हो जाता है उसका परिवार भी सुखी नहीं रह पाता है। PART II

जो इंसान धन के मद में व्यसनी हो जाता है उसका परिवार भी सुखी नहीं रह पाता है। PART II
अर्थात सभी संपत्तियों का सभी उपायों से संग्रह करना चाहिए। PART I
आचार्य चाणक्य कहते हैं की कल्पवृक्ष काष्ठ है। सुमेरु पहाड़ है। पारस केवल एक पत्थर है। सूर्य की किरणें तीव्र हैं। चन्द्रमा घटता-बढ़ता रहता है। समुद्र खारा है। कामदेव का शरीर नहीं है। बलि दैत्य है। कामधेनु पशु है। हे राम ! मैं आपकी तुलना किसी से नहीं कर पाता हूं। आपकी उपमा किससे दी जाए।
ज्ञान और अनुभव एक सिक्के के दो पहलू हैं।
अर्थात मित्र संग्रह से बल प्राप्त होता है।
कई बार मनुष्य इस लत की गिरफ्त में आकर अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है। इसी लत की चपेट में आकर वो न केवल अपना वर्तमान दांव पर लगा देता है बल्कि भविष्य भी अंधकारमय कर देता है।
धन की देवी लक्ष्मी स्वयं वहां चली आती है जहाँ, मूर्खो का सम्मान या मूर्खों की पूजा नहीं होती,अनाज का अचछे से भणडारण किया जाता है, पति, पत्नी मे आपस मे लड़ाई-झगड़ा नहीं होता है i उन लोगों की संपत्ति अपने-आप बढ़ने लगती है।
जो व्यक्ति दिल का छोटा होता है, उसकी सोच भी छोटी होती है। ऐसा इंसान अपने और पराए के बीच में फंसकर रह जाता है।
संकट के समय व्यक्ति को कोई भी फैसला सोच समझ कर लेना चाहिए। जब संकट आता है तो चुनौतियां भी काफी बढ़ जाती हैं और अवसर बहुत कम होते हैं।
विपत्ति के समय स्नेह रखने वाला ही मित्र होता है।
जिसके मित्र अच्छे होते हैं वह कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते जाते हैं। वहीं जिसके मित्र कपटी होते हैं उसे असफल होने मे देर नहीं लगती।
अप्रिय कार्यों को टालते रहने से दूसरे कार्यों पर भी प्रभाव पड़ता है और आपकी हर कार्य करने की शक्ति क्षीण पड़ती जाती है ।
कीसी भी इंसान की सफलता में संगति का विशेष महत्व होता हैI
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारी भी कुछ आदतों से दूसरों को इसी तरह परेशानी हो सकती है । इसलिए जहां तक संभव हो हमें अपनी ऐसी आदतों को पहचान कर उन्हें बदलने की कोशिश करनी चाहिए।
पति और पत्नी का रिश्ता एक दूसरे के बिना अधूरा होता है। यदि इस रिश्ते को बरकरार रखना है तो इसके लिए पति और पत्नी दोनों को एक दूसरे के प्रति सम्मान की दृष्टि बनाकर रखनी चाहिए।
सफलता की चाह रखने वालों को हमेशा गोपनीयता के महत्व को समजना चाहिए I
जिंदगी को आसान बनाने के लिए रिश्तों में सहजता और पारदर्शिता होना बहुत ज़रूरी है। पर कई बार सिर्फ दूसरों के बारे में जूठ बोलने के कारण रिश्ते में दरार पड़ जाती है।
महिला के सम्मान से बड़ा कोई धन नहीं है I पत्नी घर की इज्जत होती है और हर सुख-दुख की साथी होती है I
व्यक्ति आज जैसा भी जीवन जी रहा है, यह उसके अतीत के प्रयासों का ही परिणाम होता है और आज वह जैसा भी कार्य करेगा, उसी से उसका आने वाला कल निर्धारित होगा।
अर्थात हानि पहुंचाने वालों के प्रति उदारता न करें I
धैर्यवान इंसान मुश्किल परिस्थितियों का सामना बेहद आसानी से कर लेता है।
किसी भी क्षेत्र में सफलता दिलाने में चरित्र का काफी महत्व होता है।
आचार्य के अनुसार जिन रिश्तों में आजादी नहीं होती है, वो कुछ समय बाद ही ऊबने लगते हैं और कैद महसूस होने पर रिश्ता खत्म कर लेना चाहते हैं।
अक्सर लोग अहम और घमंड में चूर होने के कारण अपने से कमजोर व्यक्तित्व के लोगों को परेशान करना शुरू कर देते हैं।
असल जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि मनुष्य किसी से भी बात करते वक्त अपनी वाणी का ध्यान नहीं रखता।
धन के अलावा और भी ऐसी चीजें हैं जो अगर किसी व्यक्ति को मिल जाएं तो उसे खुद को किस्मत वाला मानना चाहिए I
असफलता और कुछ नहीं, बल्कि कुछ गलतियों को लगातार दोहराने का नतीजा होती है।
क्रोध किसी भी रिश्ते को इस कदर कमजोर बना सकता है कि उसके बचने के आसार बहुत कम हो जाते हैं I दांपत्य जीवन में पति या पत्नी को अपने क्रोध पर सदैव काबू रखना चाहिए I
संकट के समय ही मनुष्य के कौशल, क्षमता और प्रतिभा की परीक्षा होती है। दुश्मन को कभी कम मत समझो और कोई गलती मत करो।
चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य ने कुछ विशेष परिस्थितियों का जिक्र करते हुए बताया है कि जीवन में संतुष्टि और असंतुष्टि दोनों ही रहना बहुत जरूरी है I