हे विद्वान् पुरुष ! अपनी संपत्ति केवल पात्र को ही दे और दूसरो को कभी ना दे I
इस सुत्र के जरिए आचार्य चाणक्य ने बताया है कि आप किसको धन से मदद कर सकते हैं और किस इंसान को धन देने से उस धन का नुकसान आपको उठाना पड़ सकता है I

इस सुत्र के जरिए आचार्य चाणक्य ने बताया है कि आप किसको धन से मदद कर सकते हैं और किस इंसान को धन देने से उस धन का नुकसान आपको उठाना पड़ सकता है I
अगर आपका जीवनसाथी हमेशा गुस्से में रहता है, सही व्यवहार नहीं करता, तो ऐसा जीवनसाथी परिवार में हमेशा अलगाव, दुख और क्लेश की वजह बन जाता है I
हम ज्ञान के उपहार का सबसे अच्छा उपयोग करें ताकि हम अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में महान पराक्रम और ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकें।
विद्या एक ऐसा धन है जिसे चोर चुरा नहीं सकते, राजा छीन नहीं सकता, और यह व्यय करने पर बढ़ती है।
आमतौर पर इंसान की प्रवृत्ति होती है कि उसका ध्यान नकारात्मक चीजों की ओर जाता है I
आमतौर पर विपरीत परिस्थितियों का साहस के साथ सामना करने वाले को साहसी कहते हैं। लेकिन कुछ ऐसी भी परिस्थितियां होती हैं जिनके बीच फंसने पर वहां से बाहर निकलना जरूरी होता है।
आचार्य चाणक्य ने आर्थिक संकट को लेकर कुछ संकेत दिए हैं। जिन्हें अगर आप समय रहते जान लें तो खुद को कंगाल होने से बचा सकते हैं।
जो व्यक्ति बुराई करता है और दूसरों की बुराई को सुनने में रूचि रखता है,ऐसा व्यक्ति कभी सफल नहीं हो सकता है I
कभी भी अपनी पत्नी के सामने ऐसी बातें ना करें, जो उसके दिल को ठेस पहुंचाए। क्योंकि पत्नी के सामने दिल को चुभने वाली बातों करने से उसके आत्मविश्वास में कमी आती है I
जब पति-पत्नी दोनों को अपने रिश्ते और कर्तव्य का आभास हो तभी वह रिश्ता प्रेमपूर्वक चल सकता है I
दान अर्थात् केवल देना होता है। यदि लेना-देना हुआ तो व्यापार हो जायेगा, फिर वह दान नहीं होगा।
एक बुद्धिमान व्यक्ति बदलाव से नहीं डरता। एक बुद्धिमान व्यक्ति सुधार करने और सही करने की हमेशा कोशिश करता है I
लज्जा और ग्लानि से हम मनुष्य बने रहते हैं और मनुष्य की लोकबद्धता में जब कमी आती है तब लज्जा और ग्लानि भी नहीं रहती है I
यह सत्य है कि जब मनुष्य में किसी प्रश्न को लेकर भय का संचार होता है तभी उसमें दूसरों से प्रेम करने की इच्छा जागृत होती है।
रोटी,कपड़ा और मकान मनुष्य की सबसे बड़ी जरूरत है लेकिन वह भी हम बिना रोजगार के हासिल नहीं कर सकते।
सफल लोग भी आम लोगों की तरह साधारण इंसान होते हैं। वे ऐसे इंसान होते हैं, जिन्हें अपने आप पर विश्वास होता है, अपनी क्षमताओं में विश्वास होता है और जो मानते हैं कि वे सफल हो सकते हैं।
आचार्य चाणक्य कह्ते है कि विपत्ति किसी भी मनुष्य पर आ सकती है इसलिए व्यक्ति को बुरे दिनों का सामना करने के लिए धन का संचय करना चाहिए I विपत्ति के समय़ व्यक्ति की सूझबूझ ही महत्वपूर्ण होती है I आपकी सूझबूझ से ही उस कठिन समय का उचित सामना किया जा सकता है I
आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में कहा है ‘दुनिया में ऐसा किसका घर है, जिस पर कोई कलंक नहीं, वो कौन है, जो रोग और दुख से मुक्त है,सदा सुख किसके पास रहता है?
एक पंडित भी घोर कष्ट में आ जाता है यदि वह किसी मुर्ख को उपदेश देता है, यदि वह एक दुष्ट पत्नी का पालन-पोषण करता है या किसी दुखी व्यक्ति के साथ अतयंत घनिष्ठ सम्बन्ध बना लेता हैI
मनुष्य को अपने अंदर सीखने की चाहत कभी भी खत्म नहीं करनी चाहिए। ऐसा करके वो अपने अंदर से जिज्ञासा को खत्म कर देता है।
असल जिंदगी में किसी भी व्यक्ति को अपने अंदर कोई भी कमी नहीं दिखती है। उसे लगता है कि वो जैसा है वैसा ही परफेक्ट है। अगर सामने वाला आपका करीबी है और आप में कोई कमियां निकालता है तो आपको बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा।
मित्र और मित्रता दोनों में ही आदर भाव होना चाहिए। जब इसमें कमी आने लगती है तो मित्रता कमजोर पड़ती जाती है।
किसी व्यक्ति को उतनी ही अहमियत दें, जितनी वो आपको देता है तभी आपका जीवन सुकून से बीत सकता है i
एक सच्ची जीवनसाथी विपरीत परिस्थितियों में कभी भी अपने पति का साथ नहीं छोड़ती, बल्कि उसको सकारात्मक बनाकर जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती है I
यह माना जा सकता है कि बच्चे की माता के कर्म तथा विचार भी होने वाले बच्चे के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।
आचार्य कहते है कि व्यक्ति को व्यवहार से इतना सीधा और सरल नहीं होना चाहिए जिससे लोग आपका फायदा उठा ले l ऐसे लोग खुद बहुत अच्छे होते हैं, लेकिन ये दुनिया उनके जैसी नहीं होती I
जो व्यक्ति जीवन में गुरु का अपमान करता है वह कभी सफल नहीं हो सकता I याद रखें किताबों के साथ-साथ आपकी सही शिक्षा सिर्फ गुरू के सही मार्गदर्शन से ही पूर्ण होती है इसलिए अपने गुरू का हमेशा आदर करें I
आचार्य के मुताबिक छात्र जीवन में आलस को खुद पर कभी हावी नहीं होने देना चाहिए l ये जीवन तपस्या का समय होता है और इसमें आलस की वजह से छात्र सही तरह से शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाता I
आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस घर में प्रेम और खुशी का वास होता है, जहां रिश्तों में एक- दूसरे के प्रति सम्मान होता है वहां सुख और समृद्धि बनी रहती है और वहां मां लक्ष्मी ठहरती हैंI
जो व्यक्ति आपको हमेशा सही मार्ग दिखाए,आपको झूठी बातों से बचाए और वास्तविकता से जोड़े, वो वास्तव में आपका सच्चा दोस्त होता है I