महान विवाद: उत्पत्ति और मुद्दे
महान संघर्ष स्वर्ग में उत्पन्न हुआ, जब एक सृजित प्राणी, चुनाव का स्वतन्त्रता का उपयोग करके आत्म-उत्थान की प्रयास में परमेश्वर का विरोध किया।

महान संघर्ष स्वर्ग में उत्पन्न हुआ, जब एक सृजित प्राणी, चुनाव का स्वतन्त्रता का उपयोग करके आत्म-उत्थान की प्रयास में परमेश्वर का विरोध किया।
पतित जोड़े को सज़ा सुनाने से पहले परमेश्वर ने उन्हे अनुग्रह का वाचा देकर आशा दी जिसकी स्थापना उसने सृष्टि के पूर्व किया था।
पाप मानव स्वभाव में परिवर्तन लाया और पारस्परिक संबंधों तथा परमेश्वर के साथ सम्बन्धों को प्रभावीत किया।
परमेश्वर ने हमें अपने स्वरूप में बनाया है, और हमें अपने सृजनकर्ता को अपने प्रभुत्व के भीतर हर संभव तरीके से प्रतिबिम्बित करना है।
हालांकि स्वतंत्र प्राणी बनाए गये, प्रत्येक मनुष्य शरीर, मन और आत्मा की एक अविभाज्य एकता है।
परमेश्वर सारी सृष्टि के सृष्टिकर्ता हैं जो उसके महिमा के लिए बनाए गये हैं, और वह उसका ख्याल करता है।
परमेश्वर ने स्वर्ग और पृथ्वी की सृष्टि अपने वचन से किया।
पवित्र आत्मा यीशु के सत्य में हमारा मार्गदर्शक है और उसका उपस्थिति हमारे बीच लाता है।
इस पृथ्वी छोडने से पहले यीशु ने अपने शिष्यों को परमेश्वर द्वारा भेजे जाने वाले पवित्र आत्मा के उपस्थिति का प्रतिज्ञा किया था।
यीशु मसीह भविष्यकता, याजक, एवं राजा के पदों द्वारा परमेश्वर और हमारे बीच मध्यस्थ का कार्य करते हैं।
यीशु मसीह के व्यक्तित्व में दो स्वभाव दिव्य एवं मानवीय एक में मिल गए।
परमेश्वर ने दानियेल को भविष्यवाणि में अपने पुत्र के आने के ठोस समय दरसा दिये थे।
परमेश्वर अनंत पुत्र, यीशु मसीह में अवतरित हुआ।
यीशु के प्रेमी और दयालु कार्यो ने पिता के प्रेमी चरित्र को दिखाया।
अनंत पिता परमेश्वर समस्त सृष्टि का सृष्टिकर्ता, स्रोत, निर्वाहक, एवं प्रभुत्व- सम्पन्न है।
पिता श्रोत का कार्य करते, पुत्र मध्यस्त के रूप में, और पवित्र आत्मा यथार्थकारक या व्यवहार में लाने के कार्य करते हुए प्रगट होते हैं।
परमेश्वर का सर्वोच्य प्रेम का प्रदर्शन उसके सर्वोच्च्य प्रगटीकरण, उसके पुत्र, यीशु मसीह में हुआ।
पवित्र शास्त्र इतिहास में परमेश्वर के कार्यों का विश्वस्त रेकॉर्ड हैं।
यूहन्ना बपतिस्मा देनेहारा के द्वारा बपतिस्मा के बाद यीशु प्रचार करने लगा, “परमेश्वर का राज्य निकट है, मन फिराओ, और सुसमाचार में विश्वास करो”।
यीशु का दूसरा आगमन उतना ही निश्चित है जितना उसका पहला आगमन है। हमें अपने हृदयों को तैयार करना है जैसे वह हमारे लिए जगह तैयार करने गया है।
यीशु अपने लोगों के लिए स्वर्ग में जगह तैयार कर रहा है।
यीशु हरेक कोई को जो श्रमित है और बोझ से दबे हुआ है विश्राम देने के लिए बुलाता है।
यूहन्ना बपतिस्मा देनेहारा के द्वारा बपतिस्मा के बाद यीशु प्रचार करने लगा, “परमेश्वर का राज्य निकट है, मन फिराओ, और सुसमाचार में विश्वास करो”।
परमेश्वर अपने सब बेटें और बेटियों को खुश, शांतिपूर्ण, और आज्ञाकारी होने की चाह करता है। यहीं मसीही को मसीह के साथ संवाद करने का आनंद हो सकता है।
परमेश्वर के बच्चों को अपने उत्साह और व्यवहार में परमेश्वर की अच्छाई और करुणा को दर्शना है।
परमेश्वर हमें प्रकृति, दिव्य कामकाज़ और शास्त्रों के द्वारा अपने आप को दर्शाते हैं और हमसे बाते करते हैं।