कार्य और जीवन
यीशु का जीवन एक स्वयं-न्योछावर, स्वयं-त्याग, दूसरों की उद्धार के लिए उनकी सेवा का था, और उनके अनुयायियों का भी होगा।

यीशु का जीवन एक स्वयं-न्योछावर, स्वयं-त्याग, दूसरों की उद्धार के लिए उनकी सेवा का था, और उनके अनुयायियों का भी होगा।
हम एक पवित्र जीवन जीने के लिए ठीक उसी प्रकार मसीह में निर्भर हैं जिस तरह टहनी को मूल धड़ से बढ़ने और फल लाने के लिए जुड़े रहना है।
परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना शिष्यता की परीक्षण है।
विश्वास करिए कि यीशु ने आप को क्षमा किया है, इसलिए नहीं कि आप महशूष करते हैं, बल्कि इसलिए कि परमेश्वर ने प्रतिज्ञा किया है।
सच्चे हृदय से स्वीकारोक्ति एक ख़ास कार्य है, और उस में हरेक पाप स्पष्ट रूप से मान लिया जाता है।
सच्चा पश्चयताप में पाप के लिए दु:ख और पाप से फिरना शामिल है।
हम पाप को नहीं त्यागेंगे जबतक हम उसकी पापमयता को नहीं देखते हैं।
मनुष्य को पाप से पवित्रता में बदलने के लिए अंदर से काम करती हुई मसीह की शक्ति की जरूरत है।
परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम किया कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया। मसीह अपने आप को मनुष्य जाति से ऐसे बांध लिया है जिसे कभी भी नहीं तोड़ा जा सकता है।
हमें मनुष्यों के नियम के जगह परमेश्वर के आज्ञाओं को मानने के लिए चुनना होगा।
क्योंकि यीशु हमारे पापों के लिए अपने शरीर में दुख सहा, उसमें विश्वास करने के द्वारा हम क्षमा प्राप्त हो सकती है।
पवित्र आत्मा हमें हमारे जीवन में यीशु का जीवन जीने के लिए मदद करता है और हमें सेवा के लिए वरदान देता है।
पवित्र आत्मा हमें हमारे जीवन में यीशु का जीवन जीने के लिए मदद करता है और हमें सेवा के लिए वरदान देता है।
परमेश्वर की सच्चे कलिसिया के भाग हों, जो परमेश्वर की आज्ञाओं को मानती और यीशु पर विश्वास रखती है।
परमेश्वर शैतान, पाप और पापियों को हमेशा के लिए नष्ट कर देंगे, परंतु वे धर्मियों को अपने साथ हमेशा के लिए रहने के लिए ले जाएंगे। परमेश्वर न्याय में निष्पक्ष हैं।
मृत्यु जीवन का उल्टा है, किन्तु जो यीशु पर विश्वास कर मारे वे फिर जीयेंगे।
परमेश्ववर को पापियों की मृत्यु में आनंद नहीं है, परंतु जो पाप से लिपटे रहेंगे उन्हे मारना होगा।
हमारा असली सहभागिता पवित्र शास्त्र के प्रति होनी चाहिए, न की सिर्फ एक करिश्माई प्रतिनिधि या किसी विशाल संस्था के प्रति।
हमें परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के लिए पानी और आत्मा से जन्म लेने की आवश्यकता है।
हमारे लिए परमेश्वर के बुनियादी स्वास्थ्य सिद्धांतों का पालन करके हम हमारे वर्तमान जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए उसके साथ सहयोग कर सकते हैं।
‘सब्बत – विश्राम’ हमें आनंद का वह साप्ताहिक अनुभव देता है जो अनुभव हमें स्वर्ग के पूर्ण विश्राम में मिलेगा।
परमेश्वर हमारे प्रार्थनाओं को सुनेंगे यदि हम उसके इच्छा के अनुसार मांगेंगे और पाप को हमारे प्रार्थनाओं को रुकावट डालने नहीं देते हैं।
आइए हम आत्मविश्वास के साथ अनुग्रह के सिंहासन के पास जाएँ, क्योंकि यीशु मसीह अपने लोगों के लिए विनती करने के लिए पिता के सामने सर्वदा जीवित है।
यीशु द्वारा किए गए उसके आने के पूर्व के भविष्यवाणी के चिन्ह सटीकता से पूरी हो रहीं हैं।
यीशु धर्मियों के लिए ऐसा जगह तैयार कर रहा है जिसका महिमा मनुष्य कभी सुना या देखा हो उससे परे है।
यीशु अपने लोगों को लेने आ रहे हैं जैसा की उसने प्रतिज्ञा किया है।
हम आशा पाते हैं जब हम बाइबल के भविष्यवाणियों को पढ़ते हैं।
यीशु जीवन में दूसरा मौका देता है। पापियों और आशाहीन को वह नया शुरुआत देता है।