Ulcerative Colitis (एक दिन में 50 बार टॉयलेट जाते थे)
Ulcerative Colitis (एक दिन में 50 बार टॉयलेट जाते थे);

Ulcerative Colitis (एक दिन में 50 बार टॉयलेट जाते थे);
Bhastrika or abdominal Breathing ( chest breathing)
शांभवी मुद्रा के बारे में पूरी जानकारी (Sambhavi Mudra)
क्या कच्ची चीजें ख़ाना चाहिए
What Exactly Spirituality Means. (Hindi)
How To Cure Gastric Via Abdominal Breathing
प्राणायाम का उद्देश्य केवल साँसों को भरना मात्र नहीं है । इससे मन मस्तिष्क को नुक़सान हो सकता है ।
Short & Long Term Memory
What exactly Universal means.
Meditation method-I with understanding
The Philosophy behind Om Chanting; एक ध्वनि जो गले से पैदा की जाती है वो मस्तिष्क के मध्य हिस्से को तीव्र गयी से प्रभावित करती है। मेरे अपने अनुभव में आसन और प्राणायाम के अभ्यास से मस्तिष्क के neurones व जीन्स में परिवर्तन नहीं लाया जा सकता है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार यदि जींस मेन बदलाव कर दिया जाय तो व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन लाया जा सकता है। किंतु ध्वनि के माध्यम से जींस में परिवर्तन लाया जा सकता है। किंतु किस प्रकार का परिवर्तन यह साधक के ऊपर निर्भर करता है। ओम् ध्वनि में भावनात्मक पुट ...
Scientific Observation Methods: Ensuring Accuracy in Research
Yogi Anoop's Experience: I have had a profound experience with the sound of natural water during my meditation practice. The serene and soothing sound of flowing rivers and ocean waves has a remarkable effect on the brain. As I sit in meditation, allowing my mind to settle, I often incorporate recordings of natural water sounds. The gentle flow and rhythm of the water immediately transport me to a state of deep relaxation. It's as if my mind effortlessly merges with the tranquil nature of water....
This meditation is morning meditation which is based on morning Raga
6 बाधक तत्व हैं जो रोगों को पैदा करते हैं ; - योग मार्ग की साधना में ही नहीं बल्कि सामान्य जीवन यापन के लिए भी कुछ नियमों की आवश्यकता होती है और कुछ ऐसे आदतें भी होती हैं जिसे हमें दूरी बनाए रखनी होती है । चूँकि वे आदतें बाधक तत्व होती हैं , वे स्वयं के दैहिक स्वास्थ्य की नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत हानिकारक होती हैं । सम्भवतः इसीलिए स्वामी स्वात्माराम ने अपने पुस्तक हठ योग प्रदीपिका में 6 आदतों को बाधक तत्व स्वीकार किया जो इस प्रकार हैं । अधिक बोलना अधिक भोजन अधिक...
Improving Your Intuition with Pranayama. यदि प्राणायाम के अभ्यास से विश्वव्यापक सिद्धांत का ज्ञान नहीं होता तो इसका अर्थ है कि उसका ज्ञान सीमित है और भविष्य में उसका अनुपालन दुखदाई होगा । जैसे साँसों का अंदर लेना और बाहर निकालना । इस प्रक्रिया से साधक या रोगी को एक सिद्धांत का ज्ञान होना चाहिये न कि केवल साँसों का अंदर आना और बाहर जाना । सिर्फ़ ऑक्सीजन के भरने और निकालने से कोई तत्पर्य नहीं है
Space Meditation The senses are the gateway to objects. Through them, all objects reach the mind. After a certain stage in life, the mind becomes habituated to constantly seeking objects through the senses. As a result, not only the mind but also all the systems of the body start experiencing problems and diseases. The main reason for this is that the mind always entangles itself in the visible world. Here, I will attempt to free the mind from entanglements through Space Meditation. Space means ...
प्राणायाम के अभ्यास में यदि किसी भी अभ्यासी को इस बात का एहशास नहीं हो रहा है कि उसे कितनी साँसों को अंदर भरना चाहिए तो इसका अर्थ है अभी उसे और ब्रेथलेसनेस कि आवश्यकता है ।
नींद का अर्थ है दोनों आँखों का आराम । प्रकृति में ये एक ऐसी ज्ञानेंद्रिय है जिसका महत्व वाहय ज्ञान प्राप्त करने में सबसे अधिक है । इसी के माध्यम से रूप रंग आकार को अंदर चित्त में संग्रह करते हैं । अंदर की आँखें जब थकती हैं तब वह पलकों को ढँक लेती हैं और उसे थोड़े समय के लिए आराम दे देती हैं । इसी को हम निद्रा कहते हैं । यही अवस्था योगियों ने ध्यान में पैदा करने की कोशिश की । उनका कहना था कि यदि बैठ करके ही इन पलकों को बंद करके उन सभी रूप रंग एवं आकार को अंदर जाने से रोक दिया जाये तो चित्त शांत ह...
आँखों के तनाव से रोग । सामान्यतः लोगों को इस तथ्य का आभाष तक नहीं होता है कि आँखों के तनाव से आत्मसंतोष में अत्यंत कमी और रोगों की मात्रा बढ़ती है । यहाँ तक कि बहुत सारे लोग अच्छे खाने और दैनिक जीवन में ठीक ठाक रहने के बावजूद भी अपने वैचारिक और शारीरिक रोगों पर नियंत्रण नहीं कर पाते हैं । यदि गहराई से उनके दैनिक क्रिया कलापों को देखा जाये तो उनकी आँखों में तनाव की मात्रा बहुत अधिक होती है । इसीलिए उनके मस्तिष्क में स्थित प्रमुख ग्रंथियाँ अस्वाभाविक रूप से रसों को छोड़ने लगती हैं । ग्रंथियाँ इन ह...