शिवांजली प्रभा वंदन...
ये मेरी भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जिसे मैं लोकतंत्र में अपने दृष्टिकोण से सही मान कर चल रही हूं..., उनके लिए जो आम जनता को छल, बल, कौशल के सहारे दिग्भ्रमित करते हैं और अपने वर्गीकृत तरीकों से अपनी मुट्ठी में करके हम जैसों को नुकसान भी पहुंचाते हैं... आपको बता दूँ कि मैं एक स्वतंत्र लेखिका हूं... कहानीकार मुझे ईश्वर ने बनाया है और मेरे अंतर्मन की वासंती प्रभा से देश देशांतर को द्वेशरहित बनाकर वायु को चिरायु बना कर नारी, पृथ्वी और प्रकृति को आप सबके हित साहित्य बना सकूँ, ताकि शहादत देने वाले सैनिकों को नमन कर सकूं और सकून से जीने के लिये भूमि की भूमिका में कुछ सोमामृतम पोषित कर सकूं... धन्यवाद... गीता (आहूजा ) ग्रोवर...
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