¶ Intro / Opening
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¶ प्रकृति, विकृति और संस्कृति
क्योंकि काम वासना प्रकरती है काम वासना के विपरीत जो काम वासना के विरोष से बन गया उससे छूटना मुस्कल पड़ेगा क्योंकि वो प्रकरती से और एक कदम दूर निकल जाना है इसे हम तीन सब्दों में समझ लें एक को मैं कहता हूँ प्रकरती जिसे हमने कुछ नहीं किया जो हमें मिली है जो हमें मिली है वो प्रकरती अगर हम कुछ गलत करें तो जो हम कर लेंगे उसका नाम है विक्रती और अगर हम कुछ करें और ठीक करें तो जो होगा उसका नाम है संस्क्रती प्रकरती पर हम खड़े होते हैं जनासी भूलो विक्रती में चले जाते संस्कृती में जाना बड़ा कठिन है
क्योंकि संस्कृती में जाने के लिए विक्रती से बचना पड़ेगा और प्रकरती के ऊपर उठना पड़ेगा दो बाते हैं विक्रती से बचना पड़ेगा और प्रकरती के ऊपर उठना पड़ेगा अगर किसी ने सिर्फ प्रकरती से लड़ने की कोशिस की तो विकरती में गिर जाएगा विकरती संस्कृती से और एक कदम दूर है प्रकरती उतनी दूर नहीं प्रकरती मध्य में खड़ी है विक्रती और आप हट गए प्रकरती से भी दूर हट गए इसलिए तो पसुओं में ऐसी विक्रतिया नहीं दिखाई पड़ती हैं जैसी मनस्यों में दिखाई पड़ती हैं क्योंकि पसु
¶ समाज में विकृति के उदाहरण
प्रकरती से नहीं लड़ते इसलिए विक्रती नहीं दिखाई पड़ती अब हम कलपना भी नहीं कर सकते अभी अभी निवार के एक चौराहे पर और वासिंटन में और और जगों पर होमो सेक्सूल्स ने जुलूस निकाल ले और उन्होंने कहा है कि यह हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और इस वर्स पिछले वर्स कम से कम सो होमो सेक्सुलिस ने बिवाहे किये जो कि कल्पना के बाहर मालूम परता है एक पुरुस एक पुरुस के साथ बिवाहे कर रही है एक इस्त्री एक इस्त्री के साथ बिवाहे कर रही है
सम लिंगी बिवाह, सो बिवाहे की घटनाएं दर्ज हुई हैं अमरीका में इस वर्स और इन लोगों ने कहा है कि हम गोशना करते हैं कि हमारा जन्म सिद्ध दिकार है कि हम जिसको प्रेम करना चाहते हैं कोई सरकार हमें रोक के क्यों एक पुरुस पुरुस को प्रेम करना चाहता है उससे बिवाय करना चाहता है उनके काम संबंध का अधीकार मांगता है
कम से कम देड़ सो कलब पूरे अमरीका में और योरोप में स्वीडन में और सुजिलिंड में सब जगे वो कलब फैलते चले गए हैं कम से कम दो सो पत्रिकाएं आज जमीन पे निकलती हैं होमो सेक्सूल्स की पत्री का हैं जिनमें वो खबरें देते और घोशनाएं देते और आप हैरान होंगे कि अभी उन्होंने एक प्रदर्सन किया कलिफोर्निया में जैसा कि
beauty competition का होता है महिलाओं को सुन्दर महिलाओं को हम नगन खड़ा करते हैं होमोसेक्सवल्स ने 50 नगन योवकों को खड़ा करके प्रदसन किया कि हम भी हम इनमें ही सौंधरी देखते हैं इस्त्रियों में नहीं कोई पसू की हम कभी सोच सकते हैं कि पसू और होमोसेक्सवल नहीं हाँ कभी-कभी ऐसा होता सरकस के पसू हो मुसेक्स्वल हो जाते हैं या कभी-कभी अजाइब घर के पसू हो मुसेक्स्वल हो जाते हैं डेसमंड मारिस ने एक किताब लिखी है दे हीूमन जू आदमियों का अजाइब घर
और उसने लिखा है कि जो अजाइब घर में पस्वों के साथ होता है वो आदमें के साथ समाज में हो रहा है ये अजाइब घर है ये कोई समाज नहीं ये जू है क्योंकि कोई पस्व पागल नहीं होता जंगल में अजायब घर में पागल हो जाता है कोई पसू जंगल में आत्मत्या नहीं करता देखा गया आज तक लेकिन अजायब घर में कभी कभी आत्मत्या कर लेता है
¶ अतिक्रमण: संघर्ष या उत्थान
पसु विक्रत नहीं होता क्योंकि प्रकरती में ठेरा रहता है आदमी कोसिस करता है आदमी दो कोसिस कर सकता है या तो प्रकरती से लड़ने की कोसिस करे तो आज नहीं कल विक्रती में उतर जाएगा और या फिर प्रकृति का अतिक्रमन करने की कोशिश करे तो संस्कृति में प्रवेश करेगा अतिक्रमन तब है विरोध नहीं
निरोध नहीं संघर्स नहीं अतिक्रमन टांसेंडेंस बुद्ध ने एक बहुत अच्छा सब्द प्रयोग किया है वो सब्द है पार्मिता वो कहते हैं लडो मत इस किनारे से उस किनारे चले जाओ पार चले जाओ पार मिता लडो मत इस किनारे से जहां तुम खड़े हो लडो मत क्योंकि लडोगे तो भी इसी किनारे पर खड़े रहोगे जिस से लड़ना हो उसके पास रहना पड़ेगा जिस से लड़ना हो उससे दूर जाना खतरनाक है दुस्मन आमने सामने संगीने लेके खड़े रहते हैं हिंदोस्तान पाकिस्तान की बाउंडरी पर देखें उनको वो खड़े
हिंदुस्तान चीन की बाउंडरी पर देखें वो संगीने लिए खड़ें दुस्मन से दूर जाना खतरनाक है दुस्मन के सामनी संगीन लेके खड़े रहना पड़ता है अगर इस तठ से लडोगे बुद्ध ने कहा है अगर भोक के तठ से लडोगे तो उस तट पर पहुँचोगे कैसे लडो मत उस तट पर पहुँच जाओ ये तट छूट जाएगा बूल जाएगा विलीन हो जाएगा
¶ ध्यान का रूपांतरण: सही तप
तपस्चरिया अतिक्रमन है, ट्रांसेंडेंस है, द्वंद नहीं, संघर्स नहीं, तो इस अतिक्रमन के रूप पर हम थोड़े गहरे जाएंगे तो बहुत सी बात हैं ख्याल हो सकेंगे। एक तो पहले ख्याल ले लें कि अत्तिक्रमन का क्या आर्थ होता है आप एक घाटी में खड़े हैं अंधेरा है बहुत
आप उस अंधेरे से लड़ते नहीं, आप सिर्फ पहाड के सिखर पर चहणना सुरू कर देते हैं, थोड़ी देर में आप पाते हैं कि आप सूरिय से मंडित सिखर के निकट पहुंचने लगें वहाँ कोई अंधेरा नहीं गाटी में अंधेरा था आप गाटी में खड़े ही ना रहे आपने सूरी मंदित सिखर की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया आपने धूप से नाय हुए सिखर की तरफ बढ़ना शुरू करती है आप प्रकास में पहुंश के अतिकर्मन हुआ संगर्स जरा भी नहीं जहां आप है वहाँ दो चीजे हैं आप भी हैं और आपके आसपास घिरा हुआ घांटी का अंधेरा भी है अगर घांटी के अंधेरे से आप लड़ते हैं
तो आपको घांटी में ही रहना पड़ेगा अगर आप घांटी के अंधरे से लड़ते नहीं अपने बीतर जो आप है उसे उपर उठाते हैं उर्ध्व गवन पर चलते हैं तो घांटी के अंधरे पर ध्यान देने की ही जरूरत नहीं है जहां हम खड़े हैं वहां चानों तरफ वरत्तियां हैं भोक की वो भी है आप भी है गलत त्यागी का ध्यान वरत्यों पर होता है कि इस वरत्य को मैं कैसे मिटाऊं सही त्यागी का ध्यान स्वयम पर होता है कि इस वरत्य के मैं उपर कैसे उड़ जाऊं इस फर्क को ठीक से समझ ले
क्योंकि इन दोनों की यात्रा अलग होगी, दोनों का नियम अलग होगा, दोनों की साधना अलग होगी, दोनों का ध्यान अलग होगा, वरत्ती से जो लड़ रहा है उसका ध्यान वरत्ती पर होगा। स्वयम को जो उंचा उठा रहा है उसका ध्यान स्वयम पर होगा जो व्रत्यों से लड़ रहा है उसका ध्यान बहर मुखी होगा जो स्वयम को उर्ध गुमन की तरफ ले जा रहा है उसका ध्यान अंतर मुखी होगा और एक मजे की बात है
¶ ऊर्जा के रूप में ध्यान की शक्ति
कि ध्यान बोजन है जिस चीज पर आप ध्यान देते हैं उसको आप सक्ति देते हैं जिस चीज को आप ध्यान देते हैं उसको आप सक्ति देते हैं मैं पावलिता की बात कर रहा था चेक, विचारक और विज्ञानिक की छोटे-छोटे यंत्र हैं उसके पास वो कहता है पाँच मिनिट आँख गड़ा के ध्यान से इस यंत्र को देखते रहो
और वो यंत्र आपकी सक्ति को संग्रहीत कर लेता है अमरीका में एक बहुत अद्भुत आदमी था जिसे दो साल की सजा अमरीका की सरकार ने दी ऐसा लगता है कि आदमी की बुद्धी बढ़ती नहीं वो दो हजार साल हों तो भी वही करता है दो हजार साल बाद वही करता है एक आदमी था विलहम रेक इस सदी में जिन लोगों के पास अंतर दिर्ष्टी रही उन में से एक आदमी उसको दो साल सजा बोगनी पड़ी और अखिर में अमरीकी सरकानों से पागल खाना उसको पागल करार दे के कानून उसको पागल खाने भेज दिया
उसमें मुकदमा चला एक बहुत अजीब बात पर जिस पर अब उसके मर जाने के बाद विग्यानिक कह रहे हैं कि सायद वो ठीक था उसने एक अद्वत बाक्स एक पेटी बनाई थी जिसको वो आरगान बॉक्स कहता था वो कहता था इसके भीतर कोई व्यक्ति लेट जाया और काम वासना का विचार करता रहे तो उसकी काम वासना की सक्ति इस डब्बे में संग्रीत हो जाती
लेकिन अब इसका कोई विग्यानिक प्रमान क्या हो कि उसमें संग्रीत हो जाती वो कहता था प्रमान एक ही है कि आप किसी को भी इसके भीतर लिटा दें जिसको बिल्कुल पता नहीं है वो एक मिनिट के बाद कामवासना का विचार करना सुरू कर देता
किसी को भी लिटा दे वो कहता था यही प्रमान है इसको तो वह हजारों लोगों का प्रमान देता था लेकिन इसको विग्यानिक कहते था हम इसको कोई प्रमान नहीं मानते वह आदमी ब्रह्मा हो सकता है उस आदमी की आदत हो सकती है इस डब्बे के भीतर वो कहता था जो विचार आप करेंगे जहां आपका ध्यान जायेगा वही सकती संगरीत हो जाती है वो अनेक ऐसे लोगों को जिनको मानसिक रूप से ख्याल पैदा हो गया है कि वो कलीव हैं, इंपोटेंट हैं, इन बाक्सों में लिटा के ठीक कर देता था क्योंकि वो कहता था इनमें आरगान इनर्जी इकटी है
यह जो पावलिता है वो आपकी कोई भी सकती को आपके ध्यान से इखटा कर लेता है आपको ख्याल में न होगा जब आपकी तरफ लोग ध्यान देते हैं तो आप स्वस्त अनभव करते हैं जब आपकी तरफ लोग ध्यान नहीं देते तो आप अस्वस्त अनभव करते हैं आज के इस पॉड़कास्ट के प्रायोजक है वाइस एक ऐसा एप जो दुनिया भर में रहने वाले इंटरनाशनल लोगों को पैसे भेजने और इस्तिमाल करने में मदद करता है वाइस के जरिये विदेश में पैसे भेजना transparent और किफायती है। आपको ना कभी कीमतों में अचानक बढ़ोतरी दिखेगी और ना ही कोई hidden charges। आपको सिर्फ।
फास्ट और सुरक्षित ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी। आप सीधे अपने भारतिय बैंक अकाउंट में रुपए में लोन चुका सकते हैं। अपने प्रियजनों को उनकी जरूरत की करंसी में मदद कर सकते हैं। और अपना पैसा वहां पहुंचा सकते हैं। जहां आप चाहते हैं यही वज़े है कि वाइस दुनिया भर में पैसे का इस्तिमाल करने का एक फास्ट और किफायती तरीका है वाइज आपको 24x7 लाइब सपोर्ट देता है और रोजाना 70 लाग से जादा सेक्योरिटी चेक्स करता है ताकि फ्रॉड को रोका जा सके जिससे आप निश्चिन्त रहें कि आपका पैसा
सही जगे पर है स्मार्ट बने उन डेड़ करोड ग्रहकों में शामिल हो जिन्होंने वाइस को चुना है आज ही वाइस एप डाउनलोड करें या वाइस.com पर जाएं नियम और शर्ते लागू कर दो कर दो एक बड़ी अद्बुत घटना घटती है कि जब आप चाहते हैं कि लोग ध्यान दें आप बीमार पड़ जाते हैं बच्चे तो इस ट्रिक को बहुत जल्दी समझ जाते हैं
¶ ध्यान की चाहत और बीमारियाँ
आपकी सो में से नब्बे बीमारियां ध्यान की आकंच्छाओं से पैदा होती हैं क्योंकि बिना बीमार पड़े घर में आपको कोई ध्यान नहीं देता पतनी बीमार पड़ जाती है तो पती उसके सिर पर हाथ रख के बैठता है बीमार नहीं पड़ती तो उसकी तरफ देखता भी नहीं पत्नी इस रहस को जान बूच के नहीं अचेतन में समझ जाती है कि जब उसे ध्यान चाहिए तब उसे बीमार होना पड़ेगा इसलिए कोई इस्तरी उतनी बीमार नहीं होती जितनी दिखाई पड़ती या जितना वो दिखावा करती
यह जब उसका पती कमरे में होता तो जितना वो कुलती करायती और आवाजें करती वो आवाजें उतनी नहीं है जितना की पती कमरे में नहीं होता तब वो करती तब नहीं भी करती इस पर थोला ध्यान देने जिसा है कारण क्या होगा बच्चे बहुत जल्दी सीख जाते हैं कि जब वो बीमार होते हैं तो सारे घर के अटिंसन उनके उपर हो जाती है एक दफ़ा ये बात समझ में आ गई कि अटेंशन आकरशित करने के लिए बीमार होना रस्पून है जिन्द की भर के लिए बीमारी आधार बना लेती है
मुनो विग्यान एक सलाह देते हैं लेकिन बुद्धिमानी की सलाह बड़ी उल्टी मालूम पड़ती हैं वो कहते हैं जब कोई बीमार हो तब जान बूच के भी उस पर कम से कम ध्यान देना अनिथा उसे बीमार होने के लिए तुम कारण बनोगे जब कोई बीमार हो तब तो ध्यान देना ही मत सेवा कर देना लेकिन ध्यान मत देना बड़े तथश्ट भास है बीमारी को कोई रस देना खतरनाक है
¶ पद, ध्यान और जीवन-शक्ति
तो जिन्दगी में वो आदमी कम बीमार पड़ेगा जादा स्वस्त रहेगा उसके लिए ध्यान और बीमारी जुड़ेंगी नहीं लेकिन ध्यान से सक्ती मिलती है इसलिए तो इतना सारी दुनिया में ध्यान पाने की कोशिश चलती है एक नेता को क्या रस आता होगा जूते खाए गालियां खाए उपदरो से रस क्या आता होगा लेकिन जब वो भीड में खड़ा होता है तो सब आँखें उसकी तरफ फिर जाती है पावलिता कहता है कि वो सब की सक्ती से बोजन पाता है कोई आश्र नहीं कि नहरू कुछ दिन और जिन्दा रह जाते अगर चीन का हमला नहोता अचानक बोजन कम हो गया ध्यान बिखर गया
कोई राजनेतिक नेता पद पर रहते हुए मुश्किल से मरता है इसलिए कोई राजनेतिक नेता पद नहीं छोड़ना चाहता नहीं तो मरना पद छोड़ना करीब आ जाते है मुश्किल से मरता है कोई राजनेतिक नेतापत पर मरना ही पड़े अखीर में बात अलग है अपनी पूरी कोसिस भी वो ये करता है कि जीते जी पद न छूट जाया है क्योंकि पद छूटते ही उम्र कम हो जाती लोग रिटायर होके जल्दी मर जाते अब जो आदमी पुलिस का आफिसर था
वो आदमी रिटायर हो गया उसकी दस साल कम से कम उम्र कम हो जाती अभी इस पर तो बहुत काम चलता है और बहुत देर ना लगेगी कि लोग रिटायर होने से इंकार करने लगेंगे जैसी उनको पता चल जाएगा कि गरबर क्या हो रही है रिटार जब तक आदमी ने होता तब तक स्वस्त मालूम पड़ता है रिटार होते ही बीमार पड़ जाता है जो ध्यान का भोजन उसे मिल रहा था दफ्तर में जाता था लोग खड़े हो जाते थे सड़क पे निकलता था लोग नमस्कार करते थे बच्चे भी डरते थे क्योंकि बाप का कब जा था पैसे पर बैंक बेलेंस बाप के नाम था पत्नी भी भैबीत होती थी फिर सब रिटायर
हांस से सब धीरे धीरे सूत्र छूट गए अब वो बैठा रहता है कौने में लोग ऐसे निकल जाते हैं जैसे वो है ही नहीं तो वो खांस था खकारता है आवाज देता है कि मैं भी यहां हूँ वो हर चीज में अरंगे वाजी करता है बुरों की आदत अरंगे वाजी की और किसी कारण से नहीं हर चीज में अरंगे वाजी करता है कोई ऐसी बात में जिसमें वो अरंगा न डाले क्योंकि अरंगा डाल के वो बता सकता है कि मैं हूँ और थोड़ा ध्यान आकरशित कर सकता है
यह बहुत दीन आवस्था है यह बहुत देनी आवस्था है यह बहुत रुगण है दुखत है लेकिन है वो घर में कोई ऐसी चीज़ चलने देगा जिसमें वो सलाह न दे हाला कि कोई उसकी सलाह नहीं मानता ये वो जानता है इसे वो दिन भर कहता है कि कोई मेरी मैं नहीं मानता लेकिन फिर दिन भर देता क्यों वो दिन भर कहता है कोई मेरी सुनता नहीं
गांधी जी कहते थे कि वो 125 वर्स जीएंगे और जी सकते थे अगर भारत आजाद ना होता तो 125 वर्स जी सकते थे भारत का आजाद होना उनके मरने ता हिस्सा बन गया क्योंकि आजादी के बाद ही जो उनकी सुनते थे उन्होंने सुनना बंद कर दिया क्योंकि वो खुदी ताकतवर हो गये वो खुदी पदों पर पहुंच गये
तो गांधी ने कहा कि मैं खोटा सिक्का हो गया हूं मेरी अब कोई सुनता नहीं लेकिन गांधी को भी पता नहीं होगा कि गांधी जब भी ये कहते थे कि मेरी कोई सुनता नहीं मैं एक खोटा सिक्का हो गया हूँ मैं बोलता रहता हूँ कोई मेरी फिक्र नहीं करता कोई मेरी सला नहीं मनता हला कि वो सला दिये जाते थे मरने के पहले उन्होंने कहना सुरू कर दिया था कि अब मेरी 125 वर्ष जीने की कोई आकांग्शाय नहीं है परमात्मा मुझे जल्दी उठा ले क्यों क्योंकि खोटे सिक्के हो गए
क्योंकि कोई सुनता नहीं क्योंकि कोई ध्यान नहीं देता जो ध्यान देते थे वो भी इसलिए ध्यान देते थे कि बिना गांधी पर ध्यान दिये उन पर कोई ध्यान नहीं देता था अब वो खुद ही ध्यान पाने के अधिकारी हो गए थे सीधा लोग उनको ध्यान दे रहे थे अब वो गांधी पर कहें के लिए ध्यान दें कौने में पड़ गए थे
कोई नहीं कह सकता कि गोंड से की गोली को सामने देखकर उनके मन में धन्यवाद न उठाओ कोई नहीं कह सकता कि उन्हेंने सोचाओ कि आ गया बगवान का संदेश वाहक जंजट मिठी विदा होते हैं ध्यान भोजन है बहुत सेटल फुड बहुत सुक्षम भोजन है अकेले ध्यान पर भी जी सकते हैं आप
¶ प्रेम, भोजन और सूक्ष्म ऊर्जा
इसलिए जब कभी कोई प्रेम में पड़ता है तो भूख कम हो जाती आपको पता है अगर कोई आपको बहुत प्रेम करता है तो भूख एकदम कम हो जाती क्यों कम हो जाती जब कोई प्रेम करता है प्रेम का मतलब ही क्या है कि कोई आप पे ध्यान देता है और मतलब क्या है और जब कोई आप पे ध्यान नहीं देता है आपको पता है मुनोवग्यानिक कहते हैं
कि जब कोई ध्यान नहीं देता तब लोग जादा भोजन करने लगते हैं जब कोई ध्यान देता तो कम भोजन करते हैं क्योंकि ध्यान भी कहीं गहरे में बोजन का काम करता है बहुत सूक्ष मितल पर काम करता है जिस चीज को हम ध्यान देते हैं उसको सक्ती देते हैं ये मैं कह रहा हूं और अब इसको कहने के विग्यानिक आधार है अब इसको नापने के भी उपाए मैं पीछे आप से निकोलियव और कामेनियव का नाम लिया ये दोनों व्यक्ति टेलीपैथिक कम्मुनिकेशन में इस समय पृतिवी पर सबस्यादा निशनात लोगी निकोलियव विचार भेशता है ब्राडकास्ट करता है
और हजारों मील दूर कामेनियो उस विचार को पकड़ता है विज्ञानकों ने यंत्र लगा के बड़े चकित हो गए कि जब निकल यो विचार बेचता है तो उसकी सक्ती छीन होती उसके चानों तरफ यंत्र बताते हैं कि उसकी सक्ती छीन हो रही है और जब हजारों मील दूर कामेनी और विचार को ग्रंड करता है तब उसकी सक्ती यंत्र बताते हैं कि बढ़ गई है आशी जनक हजारों मील दूर लेकिन जब निकोलियो विचार बेजता है कामेनियों को तो उससे पूछा गया को करता क्या है वो कहता है मैं आख बंद करके ध्यान करता हूं कि कामेनियों मेरे सामने उपस थे थे
वो दूर नहीं है मेरे सामने उपस्ते थे मैं अपने सारे ध्यान को उस पर लगा देता हूँ सब बूल जाता हूँ सिर्फ कामेनियव रह जाता है और जब कामेनियव रह जाता है मुझे प्रतिक्स दिखाई पड़ने लगता है कि ये सामने खड़ा है तब मैं उससे बोलता ह� ध्यान वो अटेंसन देरा है तो उसकी उर्जा हजारों मिल दूर बैठे हुए व्यक्ति को उपलब्ध हो जाती है जिस चीज पर हम ध्यान देते हैं वहां सक्ति संग्रहीत होती है और जहां से हम ध्यान देते हैं वहां से सक्ति हटती है और विसरचित होती है
¶ कामवासना पर ध्यान के परिणाम
जिस व्रत्ति पर आप ध्यान देते हैं उस पर सक्ति संग्रीत हो जाती है। जब आप कामवासना का विचार करते हैं तो आपके कामवासना का जो केंद्र है वो सक्ति को इखटा करने लगता है। जिस चीज पर आप ध्यान देते हैं वो ब्रत्ती का केंद्र आपके भीतर सक्ती को इकटा कर लेता है आप ही सक्ती देते हैं ध्यान देकर
फिर वो किंद्र सक्टी से बर जाता है तो वो सक्टी से मुक्त होना चाहता है क्योंकि बोचिल हो जाता है ये ये जाल है आदमी के भीतर लेकिन काम वासना पर ध्यान दो तरह से दिया जा सकता है एक कि आप कामवासना में रस लें तो भी ध्यान दिया जा सकता है तो प्रकतस्त नेचरल कामवासना आप में घनी भूत होगी नैसर की कामवासना आप में सक्ति साली हो जाएगी एक विक्रत ध्यान दिया जा सकता है एक आदमी कामवासना पर ध्यान देता है कि मुझे कामवासना से लड़ना है मुझे कामवासना को भीतर प्रविश्ट नहीं होने देना है
वो भी ध्यान दे रहा है उसका भी काम का सिंटर सक्ति को इखटा कर लेता है अब बड़ी मुश्किल होती है क्योंकि जो नैसरगिक काम वासना को ध्यान देता है वो तो नैसरगिक रूप से सक्ति उसकी विसरजित हो जाएगी लेकिन जो विसरजित नहीं करना चाहता और ध्यान देता है इसका क्या होगा लोज नोज नोज नोज पांटिंग इंग इंग इंग इंग इंग इंग इंग इंग इंग इंग That's why my Lowe's Pro Rewards members get 20% off eligible brands like Valspar, HGTV Home by Sherwin-Williams, and Cabot after your paint spend reaches $3,000. Lowe's, we help.
झाल झाल झाल वेट लुट लुट लुट लुट लुट लुट झाल्पी नियुक्ति नियुक्ति नियुक्ति नियुक्ति नियुक्ति प्रीजर्स प्रीजर्स प्रीजर्स प्रीजर्स प्रीजर्स प्रीजर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रुर्स प्रवेस करेगी और उनको विक्रत करने लगेगी
ये चित्त के दूसरे इसनाईों में प्रवेस करेगी और उनको विक्रत करने लगेगी ये आदमी भीतर से उलसता जायेगा और जाल में फसता जायेगा अपनी ही अपनी ही दी गई सक्ती से ऐसा हुआ कि हम एक ब्रक्ष को पानी दिये जाते हैं और प्रात्ना किये जाते हैं कि ब्रक्ष बढ़ा ना हो प्रात्ना किये जाते हैं और पानी दिये जाते हैं
¶ तप का मूल सूत्र: ध्यान का उन्नयन
जिस वृत्ति को आप ध्यान देते हैं चाहे पक्ष में चाहे बिपक्ष में आप उसको पानी और बोजन देते हैं तब का मूल सूत्र यही है कि ध्यान कहीं और दो जहां तुम सक्ति को इखटा करना चाहते हो वहां मत दो ध्यान ही उठाओ उपर अगर कामवासना से मुक्त होना है तो कामवासना पर ध्यान ही मत दो पक्ष में भी नहीं बिपक्ष में भी नहीं लेकिन ध्यान आपको देना ही पड़ेगा क्योंकि ध्यान आपकी सकती है वो काम मांगती है तो तब का मूल सूतर ये है कि ध्यान के लिए नए केंद्र निर्मित करो नए केंद्र आदमी के भीतर हैं और उन केंद्रों पर ध्यान को ले जाओ
जैसे ही ध्यान को नया केंदर मिल जाता है और वो नये केंदर में सक्ति को उनिलने लगता है वैसे ही पुराने केंदरों से मुक्त होने लगता है पहाड पर चड़ाई सुरू हो गई काम वासना का केंदर हमारा सबसे नीचा केंदर है, वहां से हम प्रकरती से जुड़े, सहस्त्रार हमारा सबसे उचा केंदर है, वहां से हम परमात्म उर्जा से जुड़े दिव्विता से भविता से भगवता से जुड़े जब भी आप ध्यान देते हैं आपने ख्याल किया कि आपके मस्तिस में विचार चलता है कामवासना का और आपका काम के इंदर तत्काल सक्री हो जाता है यहाँ विचार चला
विचार तो चलता है मस्तिस्क में और काम के इंदर बहुत दूर है वो तत्काल सक्री हो जाता है ठीक यही उपाय तपश्वी अपने सहस्तरार की तरफ अपने ध्यान को लोटा के करता है वो जैसे ही सहस्तरार की तरफ ध्यान देता है वैसे ही सहस्तरार सक्री होना सुरू हो जाता है और जब सक्ति उपर की तरफ जाती है तो नीचे की तरफ नहीं जाती है और जब सक्ति को मार्ग मिलने लगता है सिखर पे चढ़ने का तो घाटियां वो छोड़ने लगती है और जब सक्ति को प्रकास
के जगत में प्रवेस होने लगता है तो अंधेरे के जगत से चुपचाप उठने लगती अंधेरे की निंदा भी नहीं होती उसके मन में अंधेरे का विरोध भी नहीं होता उसके मन में अंधेरे का ख्याल भी नहीं होता उसके मन में अंधेरे पर ध्यान ही नहीं होता
ध्यान का रूपांतरण है तब अगर इस तरह समझेंगे तो तब का मैं दूसरा अर्थ आपको कह सकूँगा तब का ऐसे अर्थ होता है अगनी तब का अर्थ होता है अगनी, तब का अर्थ होता है बीतर की अगनी, मनुस्र के बीतर जो जीवन की अगनी है, उस अगनी को उर्दोगमन की तरफ ले जाना तपस्वी का काम है उसे नीचे के और ले जाना बोगी का काम है भोगी का आर्थ है जो अगनी को नीचे की ओर प्रवाहित कर रहा है जीवन में अधो गमन की ओर तब इस भी का आर्थ है जो उपर की ओर प्रवाहित कर रहा है उस अगनी को परमात्म की ओर सिद्धा वस्था की और ये अगनी दोनों तरफ जा सकती है
¶ स्वभाव और आदतों का संघर्ष
और बड़े मज़े की बात ये है कि उपर की तरफ आसानी से जाती है नीचे की तरफ बड़ी कठनाई से जाती है क्योंकि अगनी का सभाव उपर की तरफ जाना है आपने ख्याल किया आप आग जलाते हैं वो उपर की तरफ जाने लगती है इसलिए इसे तप नाम दिया इसे अगनी नाम दिया इसे यगन नाम दिया ताकि ये ख्याल में रहे कि अगनी का सभाव तो उपर की तरफ जाना है नीचे की तरफ तो बड़ी चेश्टा करके ले जानी पड़ती है
पानी नीचे की तरफ बहता है अगर उपर की तरफ ले जाना हो तो बड़ी चेस्था करनी पड़ती है और आप चेस्था छोड़ दें कि पानी फिर नीचे की तरफ बहने लगा आपने पंपिंग इंजाम छोड़ दिया पानी फिर नीचे बहने लगेगा अगर उपर चाहना है ताकत लगाओ, मेहनत करो नीचे बहने के लिए पानी किसी की मेहनत नहीं मांगता है खुद बहता है वो उसका सभाव है अगनी को अगर नीचे की तरफ ले जाना है तो इंजाम करना पड़ेगा अपने से अगनी उपर की तरफ उठती है उर्दवगामी इसको तप कहने का कारण है क्योंकि भीतर की जो अगनी है जो जीवन अगनी है वो सभाव से उर्दवगामी है
एक बार आपको उसके उर्धवगमन का अनुभव हो जाए फिर आपको प्रयास नहीं करना पड़ता उसको उपर जाने के लिए वो जाती रहती है एक बार सहस्तरार की तरफ तपिस्वी का ध्यान मुर जाए तो फिर उसे चेश्ठा नहीं करनी पड़ती फिर वो अगनी अपने आप बहती रहती है दीर दीरे वो भूली जाता है क्या नीचे क्या उपर बूली जाता है क्योंकि फिर तो अगनी सहज उपर बहती रहती है एक बार आग राहे पकड़ ले तो उपर की तरफ जाना उसका स्वभाव है नीचे की तरफ ले जाने के लिए बड़ा आयोजन करना पड़ता है लेकिन हम नीचे की तरफ ले जाने के इतने लंबे अभ्यस थे
जन्मों जन्मों के हमारा अभ्यास है नीचे की तरफ ले जाने का इसलिए नीचे की तरफ ले जाना जो की वस्तुता कठिन है वो हमें सरल मालूम पर था उपर की तरफ ले जाना जो की वस्तूता सरल है वो हमें कठिन मालूम पर था कठिनाई हमारी आदत में है आत्ते बड़ी कठिन हो जाती
और कभी कभी स्वभाव जो कि हमारी आदत नहीं है जो कि वस्तू का धर्म है उसके उपर हमारी आदत इतनी सक्त होके बैठ जाती है कि स्वभाव को दबा देती है हम सब के स्वभाव दबे हुए हैं आत्तों से जिसको महावीर करम का करम कहते हैं वो हमारी आत्तों का करम हमने आत्तें बना रखी हैं वो हमें दबाए हुए वो आत्तें लंबी हैं पुरानी हैं गहरी हैं उनसे छूट जाना आज इसी वक्त संभव नहीं हो जाएगा तो हम उनसे लड़ना सुरू करते हैं और उल्टी आदत बनाते हैं लेकिन आदत फिर भी आदत ही होती है गलत तपस्वी सिर्फ आदत बनाता है तब की
¶ आदतों से मुक्ति और स्वभाव की खोज
ठीक तपस्वी सभाव को खोचता है, आदत नहीं बनाता है, हैबिट और नेचर का फर्क समझ लें हम सब आदतें बनवाते हैं, हम बच्चे को कहते हैं करोध न करोध की आदत बुरी है, न करोध करने की आदत बनाओ वो नक्रोध करने की आदत तो बना लेता है लेकिन इससे क्रोध नश्ट नहीं होता क्रोध बीतर चलने लगता है काम वासना पकरती तो हम कहते हैं ब्रह्मचरी की आदत बनाओ वो आदत बन जाती है लेकिन काम वासना भीतर सरकती रहती वो नीचे की तरफ बहती रहती उससे कोई फर्क नहीं पड़ता तपस्वी खोचता है स्वभाओ के सुत्र को ताओ को धर्म को
वो क्या है जो मेरा सभाव से खोशता है सब आत्तों को हटा कर वो अपने सभाव का दर्सन करता है लेकिन आत्तों को हटाने का एक ही उपाय है ध्यान मत दो आदत पर ध्यान मत दो एक मित्र चार-छे दिन पहले मेरे पास आये उन्होंने कहा कि आप कहते हैं कि बंबई में रहके और ध्यान हो सकता है इस अलक का क्या करें बोपू का क्या करें ट्रेन जा रहे हैं सीटी बज़री इसका क्या करें मैंने उनसे का ध्यान मत दो
उनों का कैसे ध्यान ना थे खोपड़ी पर भोपू बज रहा है नीचे कोई हान बजाय चला जा रहा है ध्यान कैसे ना थे मन उन से का एक एक प्रयास करो भौपू कोई नीचे बजाया जा रहा है उसे भौपू बजाने दो तुम ऐसे बैठे रहो कोई प्रतिक्रिया मत करो कि भौपू अच्छा कि भौपू बुरा कि बजाने वाला दुस्मन कि बजाने वाला मित्र कि इसका सिर तोड़ देंगे अगर आगे बजाया कुछ प्रतिक्रिया मत करो तुम बैठे रहो सुनते रहो
सिर्फ सुनो थोड़ी देर में ही तुम पाओगे कि भौपू बसता भी हो तो भी तुम्हारे लिए बचना बंद हो गए accept it, सुईकार करो जिस आदत को बदलना हो उसे सुईकार कर लो उसे लड़ो मत सुईकार कर लो जिसे हम सुईकार कर लेते हैं उस पर ध्यान देना बंद हो जाता है क्या आपको पता है
किसी इस्तरी कि आप प्रेम में हो उस पर ध्यान होता है फिर बिवाह करको उसको पत्नी बना लिया फिर वो सुई किर्थ हो गई फिर ध्यान बंद हो जाता है जिस चीज को हम सुईकार कर लेते हैं एक कार आपके पास नहीं वो सड़क पर निकलती है चमकती हुई ध्यान खींशती है फिर आपको मिल गई फिर आप उसमें बैठ गए
फिर थोड़े दिन में आपका ख्याली नहीं आता कि वो कार भी है चानों तरफ जो ध्यान को खीशती ते वो सुईकार हो गई जो चीज सुईकर्थ हो जाती है उस पर ध्यान जाना बंद हो जाता है सुईकार कर लो जो है उसे सुईकार कर लो अपने बुरे से बुरे हिस्से को भी सुईकार कर लो ध्यान देना बंद कर दो ध्यान मत दो
उसको उर्जा मिलनी बंद हो जाएगी वो धीर धीर अपने आप छीन होके सुक्र जाएगी तूट जाएगी और जो बचेगी उर्जा उसका प्रवा है अपने आप भीतर की तरफ होना सुरू हो जाएगा गलत तपिस्वी उनी चीजों पर ध्यान देता जिन पर भोगी देता सही तपिस्वी ठीक तप की प्रक्रिया ध्यान का रूपांतरण है वो उन्चीजों का ध्यान देता है जिन पर नब लूस वेट? जिन पर नब लूस वेट? जिन पर नब लूस वेट? इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस इस कर दो कर दो कर दो
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बोगी ध्यान देता न तथा कथित्यागी ध्यान देता वो ध्यान को ही बदल देता है और ध्यान हमारे हाथ में है हम वहीं देते हैं जहां हम देना चाहते हैं अभी आम बैठे हैं आप मुझे सुन रहे हैं अभी यहां आग लग जाए मकान में आप एकदम भूल जाएंगे कि सुन रहे थे कि कोई बोल रहा था सब भूल जाएंगे आग पर ध्यान दोर जायागा बाहर निकल जाएंगे भूली जाएंगे कि कुछ सुन रहे थे सुनने का कोई सवाल ही न रह जायागा ध्यान प्रतिपल बदल सकता है सिर्फ नए बिंदू उसको मिलने चाहिए आग मिल गई वो जादा जरूरी जीवन को बचाने के लिए हो गई
तो तत्काल ध्यान वहां दोड़ चाहेगा आपके भीतर तब की प्रक्रिया में उन नए बिंदूओं और किंद्रों की तलास करनी है जहां ध्यान दोड़ चाहे और जहां नए केंदर ससक्त होने लगें इसलिए तपिस्वी कमजोर नहीं होता सक्ति साली हो जाता गलत तपिस्वी कमजोर हो जाता गलत तपिस्वी कमजोर होके सोसता है कि हम जीत लेंगे
¶ भ्रमित तपस्या और वासना का भ्रम
और भ्रांती पैदा होती है जीतने की अगर एक आदमी को 30 दिन भोजन न दिया जाए तो कामवासना छीन हो जाती इसलिए नहीं कि कामवासना चली गई इसलिए कि कामवासना के योग रस नहीं बनता सरीर में फिर भोजन दिया जाए, तो तीस दिन में जो वासना गई थी, वो तीन दिन में वापस लोटा थी, भोजन मिला, सरीर को रस मिला, फिर केंदर सक्री हो गया, फिर ध्यान दोलने लगा, इसलिए फिर जिसने भूखा रहते ही काम वासना पर तथा कथित विजय पाई वो बिचारा फिर भूखा ही जीवन भर रहने की कोसिस में लगा रहता है क्योंकि वो डरता है इधर भोजन लिया इधर वासना उठी
मगर ये निपट पागलपन है वासना के बाहर हुए नहीं ये सिर्फ कमजोरी की वजह से वासना को सक्ती नहीं मिल रही है असल में आदमी जितनी सक्ती पैदा करता है उसमें कुछ तो जरूरी होती है जो उसके रोज के काम में समाप्त हो जाती है एक खास मात्रा की कैलरी उसके रोज के काम में उठने में बैठने में नहाने में खाने में पचाने में दुकान में आने में जाने में वेह हो जाती सोने में वेह हो जाती
उसके अत्रिक्त जो बसती है वो उसके इंडर को मिल जाती है जिस पे आपका ध्यान है अगर समझ लें कि एक हजार कैलरी मान लें कि आपके रोजमर्णा के काम में खर्च होती है और आपके भोजन और आपकी बेवस्था से आपको 2000 केलरी सकती सरीर में पैदा होती है तो आपका ध्यान जिस के इंदर पर होगा 1000 केलरी जो सेस बची है उस के इंदर दोड़ जाएगी उसको कोई रास्ता नहीं ध्यान ही रास्ता है ध्यान ही एरो है जिस से वो जाएगी उसको और कुछ पता नहीं कहां जाना है आपका ध्यान उसको खबर देता है कि यहां जाना है वो वहां चली जाती है
अब अगर आपको जूटे तप में उतरना हैं तो आप बोजन इतना कर दें कि हजार केलरी से जादा आपके भीतर पैदा नहों फिर आपको ब्रमचरी सधा हुआ मालूम पड़ेगा क्योंकि आपके पास अत्रिक सक्ति बस्ती नहीं जो कि सेक्स के केंद्र को मिल जाए हजार सक्ति पैदा होती हजार आप खर्च कर लेते हैं इसलिए तपिस्वी खाना कम कर देता है पैदल चलने लगता है स्रम जादा करने लगता है और खाना कम करता चला जाता है
ये दोरी प्रिक्रियां करता है ताकि शरीर में सक्ती कम हो और सक्ती वे जादा हो वो मिनीमम पर जीने लगता है नहोगी अत्रिक सक्ती नवासना बनेगी मगर इससे वो वासना से मुक्त नहीं होता है वासना अपनी जगे खड़ी, वासना का केंद प्रतिक्षा करेगा, अनंत जन्मों तक प्रतिक्षा करेगा, कहेगा कि जिस दिन सकती जादा हो मैं तयार हूँ.
ये सिर्फ बहे में जीना है इस जीने से कहीं कुछ उपलब्ध नहीं होता इस से प्रकरती तो चूक जाती है संस्कृती नहीं मिलती सिर्फ विकरती मिलती है और एक भैबीत चेतना रह जाती है पीजे नहीं यह नहीं है मार्ग ठीक positive austerity का ठीक विधायक तप का मार्ग है सक्ति पैदा करो
¶ कमजोरियों की स्वीकारोक्ति और ऊर्जा-स्रोत
ध्यान रूपांतरित करो ध्यान नए केंद्रों पर ले जाओ ताकि सक्ति वहां जाए इसे हम धीरे धीरे जब और गहरे उतरेंगे ध्यान के परिवर्तन के लिए तो ये प्रक्रिया ख्याल में आ सकेगी लेकिन सबसे पहले तो ये ख्याल में ले लेना चाहिए कि मेरी अत्रिक सक्ती किस केंडर से वे हो रही है
उसके विपनित जो केंद्र है उस केंद्र पर ध्यान को लगाना पड़ेगा एक छोटी सी गटना अराज की बात में पूरी करूँ धर्म गुरुओं का एक संबिलन हुआ है बड़े धर्म गुरु उस देश के एक नगर में इखटे हुए चार बड़े धर्म हैं उस देश में चारों के चार बड़े धर्म गुरु एक निजी वारता में लीन है सम्मिलन निपटने के करीब हो गया वो बैठ के बातें कर रहे हैं उची बातें हो चुकी नकली बातें हो चुकी अब वो बैठ के असली गपसप कर रहे हैं 75 साल का बुढ़ा धर्म गुरु कहता है कि हो गई वे बाते सुन गए लोग
लेकिन तुम्हारे सामने क्यों मैं छिपाऊँ और मैं आसा करता हूँ तुम भी न छिपाऊगे अच्छा होगा कि हम बताएं कि असली जिंदगी हमारी क्या है मैं तो एक ही चीज से परिशान रहा हूँ वो धन और दिन रात धन के विपरीत बोलता हूँ तो धन पे मेरी बड़ी पकड़ है एक पैसा भी मेरा खो जाया तो रात बर मुझे नीन नहीं आती या एक पैसा मिलने की आसा बंद जाय तो भी रात पर एकसाइटमेंट रहता और नीन नहीं आती बड़ी धन ही मेरी कमजोरी बड़ी मुस्किल है इसके पार में नहीं हो पा रहा है क्या आप मैंसे कोई पार हो गया है तो बताए
दूसरे ने का पार तो हम भी नहीं हुए हमारी अपनी अपनी मुसीबते हैं एक ने का मेरी मुसीबत तो ये एहंकार है इसके लिए ही जीता हूँ इसी के लिए उठता हूँ इसी के लिए बैठता हूँ इसी के लिए एहंकार के खिलाब भी बोलता हूँ पर है यही इस से मैं बाहर नहीं हो बाता हूँ तीसे ने का मेरी कमजोरी तो ये कामवासना है ये इस्त्रिया मेरी कमजोरी है दिन राज समझाता हूँ प्रवचन करता हूँ ब्रमचरी का व्याख्यान करता हूँ चर्च में लेकिन मैं उस दिन
बोलने में मज़ा ही नहीं आता जिस दिन इस तरिया नहीं आती खुदी मज़ा नहीं आता बोलने में जिस दिन इस तरिया आती हूं उस दिन मेरा जोस देखने लाइक रहता उस दिन जब मैं बोलता हूं तो बात ही और होती लेकिन अब मैं जानता हूँ बली भाती कि वो भी कामवासना ही मेरी उसके में बाहर नहीं हो पाता हूँ चोत्हा आदमी मुला नसर दीन था वो उटके खड़ा हो गया उसने का कि छमा करें मैं जाता हूँ
उन्होंने कह लेकिन तुमने अपनी कमजोरी ना बताई उसने कहा मेरी सिर्फ एक कमजोरी है वो है निंदा अब मैं नहीं रुक सकता एक भी छांड पूरा गाउं मेरा बाह देख रहा होगा जो मैंने यहां सुना है वो मुझे कहना होगा छमा करें मेरी एक ही कमजोरी है अफवा है और अब मेरा रुकना मुस्किल है इकोसिस की तू ठैर भाई तेरी ये कमजोरी थी तो तुने पहले क्यों ना कहा इतनी देर चुप क्यों रहा हर आदमी की कोई ने कोई कमजोरी है उस कमजोरी को ठीक से पहचान ले उसी में आपकी उर्जा वे होती है
मुला ने कहा कि तब तक तो मैं बैठा रहा जब तक मैं पूरा ना सुन पाया लेकिन जब मैंने पूरा सुन लिया तो जग गई मेरी सकती अब इस रात सोना मेरे बस में नहीं अब जब तक एक एक सक्ति जग गई मेरी वो जो कमजोरी है हमारी वही हमारी सक्ति का निस्कासन है वहीं से हमारी सक्ति वैव होती मुल्ला तब तक बिल्कु सुस्त बैठा था जैसे कोई प्राण ही न हो अचानक जोती आ गई प्रान आ गए चमक आ गई मुल्ला ने का कि गजब हो गया कभी सोचा भी ना था कि इस कांफरेंस में और ऐसा आनंद आने वाल है हमारी कमजोरी
हमारी सक्ति के वैका बिंदु है भोग हो या भोग के विप्री त्याग हो बिंदु वही बना रहता ध्यान वहीं के इंद्रेत रहता सक्ति वहीं से विसर्चित होती एवपरेट होती बदलने की प्रक्रिया है इस प्रक्रिया पर कल मैं बात करूंगा साथ लंबी इस पर बात करनी पड़े क्योंकि महावीर ने फिर तब के बारा हिस्से किये
और एक एक हिस्सा वग्यानिक प्रक्रिया है तो कल वग्यानिक प्रक्रिया को हम समझ लें फिर महावीर के एक एक तब के हिस्से को हम बात करेंगे अभी जाएंगे नहीं हाला कि मन की कमजोरी कह रही होगी कि भागो तो थोड़ा रुकेंगे तो किर्टन सन्यासी करते हैं उतना धैरी और शुब शुब शुब शुब शुब शुब शुब शुब शुब शुब शुब शुब शुब
वे प्रिसे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे बारे विस्ट ये नेबरोगोग शर्वियम्स शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व शर्व
