क्रिसमस के दो उद्देश्य | दिन- 24 - podcast episode cover

क्रिसमस के दो उद्देश्य | दिन- 24

Dec 23, 20224 minSeason 1Ep. 25
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बच्चो, कोई तुम्हें धोखा न दे। जो धार्मिकता का आचरण करता है, वह धर्मी है, ठीक वैसा ही जैसा वह धर्मी है। जो पाप करता है वह शैतान से है, क्योंकि शैतान आरम्भ से ही पाप करता आया है। परमेश्वर का पुत्र इस अभिप्राय से प्रकट हुआ कि वह शैतान के कार्य को नष्ट करे।

1 यूहन्ना 3:7–8

जब 1 यूहन्ना 3:8 कहता है, “परमेश्वर का पुत्र इस अभिप्राय से प्रकट हुआ कि वह शैतान के कार्य को नष्ट करे,” ये “शैतान के कार्य” क्या हैं जो उसके विचार में हैं? इसके सन्दर्भ से इसका उत्तर स्पष्ट हो जाता है।

सबसे पहले, 1 यूहन्ना 3:5 एक स्पष्ट समानान्तर है: “तुम जानते हो कि वह इसलिए प्रकट हुआ कि पापों को हर ले जाए।” यह वाक्याँश कि वह इसलिए प्रकट हुआ पद 5 और पद 8 दोनों में आता है। इसलिए सबसे बड़ी सम्भावना यह है कि “शैतान के कार्य” जिनका यीशु विनाश करने के लिए आया था पाप ही हैं। पद 8 का पहला भाग इस बात को सुनिश्चित करता है: “जो पाप करता है वह शैतान से है, क्योंकि शैतान आरम्भ से ही पाप करता आया है।”

इस सन्दर्भ में विषय पाप करना है, बीमारी या बिगड़ी गाड़ी या कार्यक्रमों की गड़बड़ी नहीं है। यीशु संसार में आया जिससे कि वह हमें पाप करने से रुके रहने में सक्षम बनाए।

हम इसे और भी स्पष्ट रूप से देखने पाते हैं यदि हम इस सत्य को 1 यूहन्ना 2:1 में पाये जाने वाले सत्य के साथ रखते हैं: “मेरे बच्चो, मैं तुम्हें ये बातें इसलिए लिख रहा हूँ कि तुम पाप न करो।” यह क्रिसमस के महान् उद्देश्यों में से एक है—देहधारण के महान् उद्देश्यों में से एक (1 यूहन्ना 3:8)।

परन्तु एक और उद्देश्य है जो 1 यूहन्ना 2:1–2 में यूहन्ना जोड़ता है, “परन्तु यदि कोई पाप करता है तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात् यीशु ख्रीष्ट जो धर्मी है; वह स्वयं हमारे पापों का प्रायश्चित्त है, और हमारा ही नहीं वरन् समस्त संसार के पापों का भी।”

परन्तु आइए अब देखें कि इसका क्या अर्थ है: इसका अर्थ है कि यीशु संसार में दो कारणों से प्रकट हुआ था। वह आया कि हम पाप में बने न रहें—अर्थात्, वह शैतान के कार्यों को नष्ट करने के लिए आया (1 यूहन्ना 3:8); और वह इसलिए भी आया कि यदि हम पाप करें, तो वह हमारे पापों का प्रायश्चित्त हो सके। वह एक ऐसे प्रतिस्थापनीय बलिदान के रूप में आया जो हमारे पापों के प्रति परमेश्वर के प्रकोप को दूर करता है।

इस दूसरे उद्देश्य का परिणाम पहले उद्देश्य को निष्फल करना नहीं है। क्षमा का उद्देश्य पाप की अनुमति देना नहीं है। हमारे पापों के लिए ख्रीष्ट की मृत्यु का उद्देश्य यह नहीं है कि हम पाप के विरुद्ध अपने युद्ध में ढीले पड़ जाएँ। क्रिसमस के इन दो उद्देश्यों का परिणाम यह है, कि हमारे सभी पापों के लिए एक बार चुकाया गया मूल्य वह स्वतन्त्रता और शक्ति है जो हमें पाप से लड़ने में सक्षम बनाती है, व्यवस्थावादी के रूप में नहीं, जहाँ हम अपने उद्धार को स्वयं कमाएँ, और न ही हमारे उद्धार को खोने के भय से, परन्तु एक विजेता के रूप में, जो आत्मविश्वास और आनन्द के साथ पाप के विरुद्ध युद्ध में स्वयं को उतार देता है, चाहे इसका मूल्य उसे अपने प्राण देकर ही क्यों न चुकाना पड़े।

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