मोक्ष में प्रतिबंधक
श्रीमद्भगवद्गीता अ. 7/27. श्रीकृष्णार्पणमस्तु कार्ष्णि ॐ

श्रीमद्भगवद्गीता अ. 7/27. श्रीकृष्णार्पणमस्तु कार्ष्णि ॐ
पूज्य श्रृद्धेय स्वामी श्री अम्बरीश्वरानंद जी महाराज उन्नाव उत्तर प्रदेश
जीओ गीता के संग
निर्मल मन जन सो मोई भावा मोहि कपट छल छिद्र ना भावा
पढेंगा इंडिया तो बढेंगा इंडिया
सन्तुष्टाः सततं योगी यतात्मा दृण निश्चयः
निर्ममो निरहंकारः समदुःखा सुखी क्षमी
हर हर गीता घर घर गीता
अद्वैष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करूण एव च
अंतःकरण की शुद्धि से ही आत्मसिद्धि संभव हो सकती हैं।।
मत्कर्मपरमो भव। मदर्थमपि कर्माणि कुर्वन्सिद्धिमवाप्स्यसि।।
मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धि निवेशय १२/८.
सर्वभूतहिते रतः
एकनिष्ठ ही ब्रह्मनिष्ठ
११/०४/२०२३
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिः रूपेण संस्थिताः नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
दिनांक 13/03/2023
श्रीकृष्णार्पणांस्तु कार्ष्णि ॐ
पूज्य श्रृद्धैय स्वामी श्री भूमानंद सरस्वती जी महाराज जोधपुर वालों द्वारा चतुर्दशोऽध्यायः
श्रीकृष्णार्पणांस्तु कार्ष्णि ॐ
देहाभिमाने गलिते विज्ञाते परमात्मनि च आत्मनिष्ठा से ही ब्रह्मनिष्ठा संभव हो सकती हैं ।। श्रीकृष्णार्पणांस्तु कार्ष्णि ॐ
जीओं गीता के संग रहो गुरु गोविंद के संग
१- हरिः ॐ तत्सत्
अलख निरंजन् श्रीकृष्णार्पणांस्तु कार्ष्णि ॐ
जय सच्चिदानंद भगवान की जय
मध्याह्न द्वितीय सत्र
मध्याह्न काल द्वितीय सत्र
सतसंग की महिमा
पूज्य श्रृद्धैय स्वामी वीतरागानंद जी महाराज उज्जैन वालों द्वारा
20/11/2022