कहानियां… हम बचपन से न जाने कितनी ही कहानियां सुनते है। उम्र के हर मोड़ पर हमे कहानियां जरूर पसंद आती है । हर कहानी जीवन के रंगों को बयां करती है । कहानियों का ज्यूकबॉक्स में आपका स्वागत है | मैं निशांत सक्सेना आपको सुनाऊंगा जीवन और भावो से भरी कहानियां |
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कभी-कभी घर की छोटी-छोटी बातें घर तबाह कर देती हैं, घर बसने से पहले ही उजाड़ देती हैं,सपनों के ताजमहल मिनट में ढेर कर देती हैं । मेरी बेटी का क्या कसूर था ? ये सब सोचते हुए उठते हैं और शिवानी से सामान पैक करने को कहते हैं
संतान चाहे जो हो वो हमेशा माता-पिता के लिए खास होता है। बेटा हो तो इंसान को ये सर्वमान्य होता है कि वो हमेशा उसका साथ रहता है लेकिन बेटियां तो शायद दुनिया में आकर ही पराई हो जाती है। सुनिए ऐसी ही एक बेटी की कहानी।