Covid19 Women in India - podcast episode cover

Covid19 Women in India

May 15, 20217 minSeason 1Ep. 4
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#india #covid19 #corona #women #homeviolence #job भारतीय समाज में वैसे तो महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिए जाने की बात कही जाती है। उनको परिवार और समाज की रीढ़ और निर्माता कहा जाता है। लेकिन हकीकत सच्चाई से कोसों दूर है। भारतीय महिलाओं को अक्सर दो वर्गों में बाँट कर देखा जाता है -1 -घरेलू  महिलाएँ , 2- कामकाजी महिलाएं

घरेलु महिलायें -  घरेलु महिलाओं को वैसे भी समाज में हमेशा से हाशिय पर रखा जाता है। अब इस महामारी ने इनको और भी पीछे धकेल दिया है। लॉकडाउन से पहले महिलाओं के घर में काम करने के घंटे लगभग निश्चित होते थे। लेकिन  लॉकडाउन के दौरान भी और उसके बाद भी महिलाओं के काम करने के घंटे बढ़ी हुई ज़िम्मेदारी और घरवालों की मांगों में कारण से लगभग अनिश्चित हो गए हैं। इसकी वजह से घरेलू महिलाओं में शारीरिक थकान और चिड़चिड़ाहट बढ़ गयी है। पहले ही उनके काम की कोई कद्र नहीं करता ऐसा उनको लगता था। अब उनमे और भी अधिक हीन भावना ने घर कर लिया है। महामारी से पहले बच्चों के स्कूल जाने, पुरुष सदस्यों के काम पर जाने के बाद इनके पास कुछ समय खुद के लिए बचता था जिसमे महिलाएँ कुछ अपने मन कर  पाती थी,खुद को समय दे पाती थी। अपने साज श्रृंगार  देखभाल के लिए समय निकाल पाती थी। लेकिन महामारी की वजह से अब उनके पास खुद को देने के लिए समय नहीं बचा। जो उनमे तनाव और अवसाद को बढ़ा रहा है।दूसरा सबसे बड़ी समस्या जो महिलाओं को झेलनी पड़ रही है वोह है घरेलू हिंसा में बढ़ोतरी। वैसे भी महिलाओं को इसका सामना करना पड़ता था लेकिन पुरुषों में बढ़ते आर्थिक दवाब और अवसाद की वजह से अब महिलाओं को उनके गुस्से और झुंझुलाहट की वजह से घरेलु हिंसा का और भी अधिक सामना करना पड़ रहा है। बिज़नेस स्टैण्डर्ड में छपे लेख के अनुसार साल 2020 में घरेलु हिंसा के 23722 मामले दर्ज किये गए जो की 2019 के  19730 मामलों के मुकाबले कहीं अधिक हैं। अभी आगे भी इन मामलों में उछाल की सम्भावना ज़ाहिर की गयी है। 

कामकाजी महिलाएं  - द हिन्दू अख़बार में भारतीय महिलाओं के ऊपर कोरोना वायरस की पहली लहर का आर्थिक असर क्या हुआ इस पर एक आर्टिकल छपा था। जो की मिनी तेजस्विनी द्वारा लिखा गया  12 अक्टूबर 2020 को जिसमे इस विषय पर चर्चा की गयी थी । इस आर्टिकल के अनुसार भारत में महिलाओं की अर्थव्यवस्था में साझेदारी को वैसे भी कुछ खास महत्व नहीं दिया जाता है। महामारी के बाद तो महिलाओं का आर्थिक भविष्य  और भी अधिक अंधकारमय हो गया है। इस बीमारी की वजह से महिला कर्मचारियों पर बहुत बुरा असर हुआ है।  छोटे व्यापार चलाने वाली महिलाओं के काम पर भी इसका असर बुरा ही हुआ है। McKinsey Global Institute की रिसर्च के अनुसार पहले से ही चली आ रही लिंग भेद की निति के कारण वैसे ही महिलाये हर क्षेत्र में पिछड़ी हुई थी। अब इस महामारी ने तो उनकी हालत और भी ख़राब कर दी है। रिसर्च के अनुसार भारत और अमेरिका में महिला रोज़गार के क्षेत्र में बहुत भारी गिरावट आयी है। जो अभी और भी ज़्यादा बढ़ेगी। महिलाओं में  ये 5.7% है, जबकि पुरुषों में 3.1% देखने को मिली है।इप्शिता सेन के अनुसार (जो की एक N.G.O चलाती है जो महिलाओं को रोज़गार दिलाने में सहायता करता है ) भारत में नौकरी करने वाली  हर 10 महिलाओं में से 4 ने अपनी नौकरी खोयी है इस महामारी की वजह से। इसीी प्रकार 90% महिला उधोग के सेल्स रेवेन्यू में भी कमी देखने को मिली है। एक और आर्टिकल जो की प्रियंका काकोडकर द्वारा लिखा गया था 27 फरवरी 2021 को  टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार  भी भारतीय महिलाओं पर कोविड  के कारण आये आर्थिक संकट के विषय में ही बताता है। इसमें अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की सीनियर रिसर्च फेलो रोसा अब्राहम की एक रिपोर्ट को आधार बनाया गया है जिसमे लिखा है की भारत में लॉक डाउन से पहले 70% पुरुष किसी भी प्रकार की नौकरी से जुड़े थे और उनमे से 88% ने लॉक डाउन के पश्चात् अपनी नौकरी वापस ज्वाइन कर ली परन्तु केवल 53% महिलाओं ने सितम्बर 2020 तक अपनी नौकरियां वापस पायी। यह गिरावट अभी और भी बढ़ेगी दूसरी लहर के दौरान। By: https://hindirashifal.in

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