ऑपरेशन सिंदूर - Sandeep Kumar Sharma
Jun 06, 2025•5 hr 32 min
Episode description
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Title: ऑपरेशन सिंदूर
Author: Sandeep Kumar Sharma
Narrator: डिजिटल वॉइस Harsha G
Format: Unabridged
Length: 5:32:01
Language: Hindi
Release date: 06-06-2025
Publisher: INAudio (formerly Findaway Voices)
Genres: History, Non-Fiction, True Crime, Mystery, Thriller & Horror, Military
Summary:
इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. आतंकवाद का जन्म कब हुआ यह कहना तो मुश्किल है। सतयुग और त्रेतायुग में इसके साक्ष्य मिलते हैं। त्रिदेव और महर्षियों एवं ऋषियों द्वारा मानव कल्याण के लिए नित नए प्रयोगों के लिए किए जा रहे प्रयासों में कुछ मानव समूह सदैव विध्न उत्पन्न करने में संलग्न रहे। महर्षियों एवं ऋषियों के हवन और तपस्या में अवरोध पैदा करने वाले निश्चित रूप से आतंकवाद को प्रणेता थे। वह एक वैज्ञानिक जीवन पद्धति के विरोधी थे। अतः विध्न उत्पन्न करके वह समूह तत्कालीन समाज में अव्यवस्था फैलाने के उद्देश्य से ऐसी हरकतें किया करते थे। त्रिदेव ऐसे समूहों को समूल नष्ट करना चाहते थे। इसके लिए उन्हें एक अत्यंत बलशाली, बुद्धिमान और समाज को भयमुक्त करने वाले योद्धा की आवश्यकता थी। दशानन को त्रिदेव ने उपायुक्त पाया। ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संपादित शिक्षाओं में दशानन को पारंगत किया। ब्रह्मा जी ने ज्योतिष एवं औषधीय गुणों में दशानन के विशेष योगदान से प्रसन्न होकर उसे कहा - 'वत्स! मैं तुम्हारे परिश्रम एवं योग्यताओं से अति प्रसन्न हूं। वरदान मांग लो।'
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Title: ऑपरेशन सिंदूर
Author: Sandeep Kumar Sharma
Narrator: डिजिटल वॉइस Harsha G
Format: Unabridged
Length: 5:32:01
Language: Hindi
Release date: 06-06-2025
Publisher: INAudio (formerly Findaway Voices)
Genres: History, Non-Fiction, True Crime, Mystery, Thriller & Horror, Military
Summary:
इस ऑडियोबुक को डिजिटल वॉइस में रिकॉर्ड किया गया है. आतंकवाद का जन्म कब हुआ यह कहना तो मुश्किल है। सतयुग और त्रेतायुग में इसके साक्ष्य मिलते हैं। त्रिदेव और महर्षियों एवं ऋषियों द्वारा मानव कल्याण के लिए नित नए प्रयोगों के लिए किए जा रहे प्रयासों में कुछ मानव समूह सदैव विध्न उत्पन्न करने में संलग्न रहे। महर्षियों एवं ऋषियों के हवन और तपस्या में अवरोध पैदा करने वाले निश्चित रूप से आतंकवाद को प्रणेता थे। वह एक वैज्ञानिक जीवन पद्धति के विरोधी थे। अतः विध्न उत्पन्न करके वह समूह तत्कालीन समाज में अव्यवस्था फैलाने के उद्देश्य से ऐसी हरकतें किया करते थे। त्रिदेव ऐसे समूहों को समूल नष्ट करना चाहते थे। इसके लिए उन्हें एक अत्यंत बलशाली, बुद्धिमान और समाज को भयमुक्त करने वाले योद्धा की आवश्यकता थी। दशानन को त्रिदेव ने उपायुक्त पाया। ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संपादित शिक्षाओं में दशानन को पारंगत किया। ब्रह्मा जी ने ज्योतिष एवं औषधीय गुणों में दशानन के विशेष योगदान से प्रसन्न होकर उसे कहा - 'वत्स! मैं तुम्हारे परिश्रम एवं योग्यताओं से अति प्रसन्न हूं। वरदान मांग लो।'
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