हिंदी कविता: अड़े रहो
जंगे ज़िन्दगी के संघर्षों से थक चुके व्यक्ति को झकझोर कर जगा देने वाली, नए जोश से भरकर आत्मविश्वास जगा देने वाली, फिर से कर्मपथ पर आगे बढ़ाने वाली एक प्रभावशाली कविता।

जंगे ज़िन्दगी के संघर्षों से थक चुके व्यक्ति को झकझोर कर जगा देने वाली, नए जोश से भरकर आत्मविश्वास जगा देने वाली, फिर से कर्मपथ पर आगे बढ़ाने वाली एक प्रभावशाली कविता।
उदात्त प्रेम की ऊँची नीची जलतरंगों में मन को भिगोती हुई यह रहस्यवादी कविता प्रेम के सभी पहलुओं को टटोलती है, हृदय की गहराइयों में छिपी सभी परतों को हमारे समक्ष खोलने का प्रयत्न करती है।
भारत माता को गुलामी की जंजीरों से आज़ाद कराने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस का देश के जोशीले नवयुवको के नाम एक खूनी आह्वान। "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा"- महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के इस जोशीले नारे से सम्बंधित घटना पर आधारित पद्मश्री गोपाल व्यास की पौरुष जगाने वाली कविता।
मंज़िल को पाने का सफर कभी भी आसान नहीं होता है। हमें उसके रास्ते में अनेक बाधाओं रूपी चिलचिलाती धूप का सामना करना ही पड़ता है। जो व्यक्ति इन मुश्किलों को झेलकर अपना रास्ता स्वयं बनाकर आगे बढ़ता जाए वही मंज़िल को पाता है।
सामाजिक शोषण व अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाने को प्रेरित करती, स्वयं के अस्तित्व को तलाश करने का आह्वान देती हुई एक सशक्त कृति ।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली , सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली , सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली , सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली , सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली , सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली , सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली ,महादानी, सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली , सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली , सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली , सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
स्वाभिमानी, परम शक्तिशाली , सूर्यपुत्र कर्ण की गौरवगाथा: यह कहानी समाज के तमाम उपेक्षितों और स्वाभिमानी नवयुवको की है जिनको विरासत में कुछ नहीं मिला जो सिर्फ अपने बल पर समाज में स्थापित हुए हैं।
जब सारी सृष्टि गहन निद्रा में डूबी होती है, सब ओर अँधेरे ने डेरा डाल रखा है, ऐसे में सूर्य की पहली किरणों के आने का पूर्वाभास नन्हे पक्षियों को कैसे हो जाता है!! प्रकृति का यह अनबूझ रहस्य पन्त की नज़र से देखें ।
जीवन की कठिनाइयों से डट कर मुकाबला करके मंज़िल प्राप्त करने के लिए एक जोशीली व प्रेरणादायक कविता।
प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत की प्रसिद्ध रचना, जिसमे प्राकृतिक सौंदर्य को नारी सौंदर्य की तुलना में श्रेष्ठ बताया है। वे आजीवन अपनी आँखों में प्रकृति की नैसर्गिक सुंदरता भर लेना चाहते हैं।
यह चिरकाल तक अमर रहने वाली एक श्रेष्ठ कविता है जो हमें निराशा के अंधेरे से निकालकर अपने कर्मपथ पर आगे बढ़ने के लिए, ऊर्जावान बनाए रखने के लिए एक संजीवनी बूटी का काम करती है।
अकाल की तकलीफों तथा उससे उबरने की प्रक्रिया में मनुष्यों के साथ साथ उनके सहारे पलने वाले जीवों के की भी वेदना और प्रसन्नता का मार्मिक चित्रण।
व्यक्ति जन्म से श्रेष्ठ नहीं होता, उसके सद्गुण, उसका आदर्श व्यवहार और मधुर वाणी ही उसको श्रेष्ठ बनाते है। आंतरिक गुणों का अंतर ही व्यक्ति को उत्तम या अधम बनाता है- खानदान का प्रभाव नहीं।
आज का एपिसोड उन गुरुजनो को समर्पित करती हूँ जो अपना सारा जीवन नाज़ुक परिंदों को परवाज़ देने, उनकी पहचान इस विस्तृत आकाश से कराने और उनको देश का जिम्मेदार नागरिक बनाने में गुज़ार देते है। नमन, वंदन।
कविश्रेष्ठ हरिवंश राय बच्चन की जीवन से भरी, नशे में झुमा देने वाली मादक कविताओं का संग्रह जिसके उन्माद में श्रोतागण सांसारिक दुखों को भूलकर नई स्फूर्ति एवं उमंगों से भर जाते है। यह वैसा ही है जैसे न पीनेवाला पीने से थकता है न पिलाने वाला पिलाने से। आइये हम भी इसके स्वाद में आकंठ डूब जाएँ।
कविश्रेष्ठ हरिवंश राय बच्चन की जीवन से भरी, नशे में झुमा देने वाली मादक कविताओं का संग्रह जिसके उन्माद में श्रोतागण सांसारिक दुखों को भूलकर नई स्फूर्ति एवं उमंगों से भर जाते है। यह वैसा ही है जैसे न पीनेवाला पीने से थकता है न पिलाने वाला पिलाने से। आइये हम भी इसके स्वाद में आकंठ डूब जाएँ।
कविश्रेष्ठ हरिवंश राय बच्चन की जीवन से भरी, नशे में झुमा देने वाली मादक कविताओं का संग्रह जिसके उन्माद में श्रोतागण सांसारिक दुखों को भूलकर नई स्फूर्ति एवं उमंगों से भर जाते है। यह वैसा ही है जैसे न पीनेवाला पीने से थकता है न पिलाने वाला पिलाने से। आइये हम भी इसके स्वाद में आकंठ डूब जाएँ।
कविश्रेष्ठ हरिवंश राय बच्चन की जीवन से भरी, नशे में झुमा देने वाली मादक कविताओं का संग्रह जिसके उन्माद में श्रोतागण सांसारिक दुखों को भूलकर नई स्फूर्ति एवं उमंगों से भर जाते है। यह वैसा ही है जैसे न पीनेवाला पीने से थकता है न पिलाने वाला पिलाने से। आइये हम भी इसके स्वाद में आकंठ डूब जाएँ।
आजादी का मिल जाना हमारे कर्तव्यों की पूर्णाहुति नहीं होनी चाहिए बल्कि उस आजादी पर हरेक भारतवासी का अधिकार भी सुनिश्चित हमें ही करना है। जब तक एक भी दुखी है तबतक हमारा युद्ध भी समाप्त नहीं होना चाहिए।
आइये, बीते समय की परछाइयों से स्वयं को निकालकर सुनहरे भविष्य के उजालो में ले चले।
महाभारत में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को दिया गया ज्ञान : आज के परिप्रेक्ष्य में।