"Storyयाँ" एक शृंखला है हमारे अतीत में कही बातों की, किस्सों और कहानियों की जो हमें वर्तमान और भविष्य को समझने के लिए कुछ संदेश देते हैं, जो धर्मसंकट से निकलने का रास्ता दिखाते हैं, फिर वो सामाजिक हो या राजनैतिक,निजी हो या सार्वजनिक, आध्यात्मिक हो या सांसारिक।
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पुत्रकामेष्टि यज्ञ की दो कथाएँ हमारे महाकाव्यों में मिलती हैं, पहली कथा त्रेता युग की है, दुसरी द्वापर युग की।इन दो कथाओं को एक साथ देखेंगे तो मंशा(intention) का महत्व सहज रूप से समझ आ जाएगा।
राजा भगीरथ कथा को स्थूल अर्थों में देखने पर जान पड़ता है कि जो केवल देवताओं के लिए सुलभ रहीं उस गंगाजी को भी मनुष्य अपनी कठोर तपस्या(मेहनत) और इच्छा-शक्ति से पा सकता है किंतु इस कथा में सूक्ष्म अर्थ भी छिपे हैं...
साहित्य में व्यक्तिनिष्ठ भावनाओं की प्रधानता बड़ी प्रबल होती है जिसके परिणाम स्वरूप सत्यनिष्ठ, धर्मनिष्ट(कर्तव्यनिष्ठ) पात्र, जो अपने संबंधों की बलि देकर न्याय से नाता जोड़ते हैं वे खलनायक नज़र आने लगते हैं...
देवदत्त ने बुद्ध के संघ को तोड़ दिया ये कहते हुए की बुद्ध के मार्ग में कुछ त्रुटियाँ हैं, अगर लोग देवदत्त का मार्ग चुनेंगे तो वे बोधिसत्व को तेजी से पा लेंगे। नए लड़के देवदत्त के प्रभाव में आ गए क्योंकि देवदत्त रोमांच दिखा रहा था, उसके पास बड़ा और बेहतर सपना था मगर...
जंगल केवल पेड़ों का झुंड नही होता वह करोड़ों जीवों घर होता है, जहां सारे जीव सह अस्तित्व को समझते हुए एक साथ निवास करते हैं, फिर एक दिन मनुष्य अपने भोग की भूख के साथ आता है और सबकुछ केवल अपने लिए समेट लेना चाहता है...
कई बार तथकथित नायक(नेता) अपने ढोंग में इतने सफल हो जाते हैं कि वास्तविक से ज़्यादा वास्तविक वे ही जान पड़ते हैं मगर जब दायित्वों का भार उठाना पड़ता है तब वे बोझ से दबते हुए खत्म हो जाते हैं या रण छोड़ कर भाग जाते हैं...
समुद्र मंथन की कहानी में आज के लिए क्या है संदेश! भगवान विष्णु ने देवों की संधि अदेवों(असुरों) से क्यों करवाई! उस महागाथा का सार सुनिए "एक किस्सा रोज़ का" की पहली कड़ी में।