दुनिया में क्यों घट रही है सेक्स की चाहत
शोध कहते हैं कि बीते दशक की तुलना में अमरीका-ब्रिटेन में लोग पहले से कम सेक्स कर रहे हैं.
दुनिया जहान: अंतरराष्ट्रीय विषयों की गहन पड़ताल करता कार्यक्रम

शोध कहते हैं कि बीते दशक की तुलना में अमरीका-ब्रिटेन में लोग पहले से कम सेक्स कर रहे हैं.
'अमेरिका फर्स्ट' का वादा करके राष्ट्रपति ट्रंप ने जो किया, उसका असर सारी दुनिया पर पड़ा.
मास्क और सैनेटाइज़र ज़िंदगी का ज़रूरी हिस्सा बनें और वैक्सीन फिलहाल दूर की कौड़ी.
सेहत के लिए विटामिन बेहद ज़रूरी है, पर क्या हर व्यक्ति को विटामिन की गोलियां खाना चाहिए.
क्या वजह है कि ज्यादातर देश पेशेवर साइबर एक्सपर्ट्स को अपनी आर्मी का हिस्सा बना रहे हैं.
सही जानकारी, पर्याप्त सावधानी और कॉमनसेंस से आप अपनी मेहनत की कमाई लुटने से बचा सकते हैं.
परमाणु हथियार तबाही का दूसरा नाम हैं, जिनका बटन चंद लोगों के हाथ में होता है.
एक तरफ़ कोरोना महामारी, दूसरी तरफ़ वोटिंग से जुड़ी दिक्कतें. चुनाव आख़िर कैसे होगा?
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप जिसकी तुलना वॉटरगेट स्कैंडल से कर रहे हैं.
बेरूत को कभी ‘मिडिल ईस्ट का पेरिस’ कहा जाता था, लेकिन अब पूरा लेबनान हुआ बदहाल.
तमाम कोशिशों के बाद भी हो सकता है कि सुरक्षित और असरदार वैक्सीन बनाने में कई बरस लग जाएं.
जहां हुई कोरोना वायरस की शुरुआत, तलाश वहीं जवाबों की.
कई वैज्ञानिकों को सर्दी में कोरोना वायरस की 'सेंकेंड वेव' की आशंका है.
यहां तक कि मुसलमानों के झंडाबरदार देश भी वीगर मुस्लिमों के लिए आवाज़ बुलंद नहीं करते.
क्या ज्यादा टेस्ट होने से ज़्यादा मामले सामने आ रहे हैं, या इसकी कुछ और वजह है?
परमाणु हथियारों से लैस दुनिया के सबसे ज़्यादा आबादी वाले ये देश किस दिशा में बढ़ रहे हैं.
दो दशक से रूस की सत्ता पर काबिज़ पुतिन अगले 16 साल तक भी सत्ता के शिखर पर रह सकते हैं.
बेजान दिखने वाली मूर्तियां इतिहास को समझने की प्रक्रिया में क्या भूमिका अदा करती हैं?
लॉकडाउन के कारण प्रकृति में बदलाव दिखा, लेकिन क्या हमने कोई सबक सीखा ?
चीन ने अलग-अलग मोर्चों पर ऐसा काफी कुछ किया जिसने सारी दुनिया का ध्यान खींचा.
आकार-आबादी-अर्थव्यवस्था के हिसाब से एक-दूसरे से अलग, फिर भी कोरोना वायरस के आगे सब बेबस.
जॉर्ज फ्लॉयड से पहले अमरीका में पुलिस के हाथों कई ब्लैक अमरीकी मारे जा चुके हैं.
इसमें कोई संदेह नहीं कि चीन, कोरोना वायरस को रोकने के लिए और भी बेहतर उपाए कर सकता था.
क्या कोरोना वायरस से पैदा हुए हालात का असर चरमपंथी संगठनों पर भी पड़ा है?
कोरोना वायरस से दुनियाभर में मचे हाहाकार के बीच ये सवाल एक बार फिर सामने आ गया है.
अमरीका और ब्रिटेन में कोरोना वायरस की एक अलग तस्वीर नज़र आ रही है.
कोरोना महामारी से पैदा हुए हालात असाधारण हैं, ऐसे हालात में जीवन सामान्य नहीं हो सकता.
क्या लॉकडाउन के सिवा कोरोना का फिलहाल कोई समाधान नहीं है.
क्या वजह है कि अमरीका कोरोना वायरस के आगे बेबस दिखा.
क्या स्पेनिश फ्लू की तरह दुनिया में एक बार फिर लाखों लोग काल के गाल में समा सकते हैं.