Rashtriya highway 33 - podcast episode cover

Rashtriya highway 33

Nov 19, 202012 minSeason 1Ep. 1
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Summary

यह कहानी राष्ट्रीय राजमार्ग 33 के भयावह रहस्य पर आधारित है, जहाँ मृणाली देवी अपने पिता के साथ एक रात बिताती हैं। उन्हें एक अनजान घर में समय का भ्रम होता है और घर गायब हो जाता है, जिसके बाद उनके पिता एक रहस्यमय साये का पीछा करते हुए एक दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट दुर्घटना के बजाय उच्च रक्तचाप को मौत का कारण बताती है, जिससे घटना और भी अनसुलझी रह जाती है।

Episode description

Short ghost Stories

Transcript

राष्ट्रीय राजमार्ग 33 का परिचय

स्वागत है आपका फूतकाल में मैं हूँ आपकी हूस्ट लिम्रा जमाल सद्धिकी और इस शो में हम बात करेंगी कुछ ऐसी अंकही अंसुनी घटनाओं की जो हम सब की समत से परे हैं आज की ये कहानी मिर्नानी देवी की है प्रणालनी देवी कि ये कहानी उनके पिता की मृत्य पर आधारत है। उनका कहना ये है कि उनके पता की मृत्यू किसी मामली कारम जैसे मोटर गारे के अक्सेडेंट से नहीं बलकि छलावे के छल से हुई और ये पूरा वाकिय, उन्होंने अपनी आंखों से अपने पिताश्री के साथ देखा था।

अनजानी रात में अनजान घर

यह है आए बे नाची से जमशेद पर क्योर जाता है। इस हाइवे पर कोई न कोई ऐसी घटना रोज जरूर घटती है जो सुर्ख्यां भटोल लेती है। इस हाइवे पर लोग सिर्फ सुबह या दुपहर को ही सफर करते हैं। रात को इस हाइवे पर कोई सफर नहीं करते हैं। इस हाईवे पर लोगों का कहना है कि कुछ ऐसा साया है जो उन्हें गुम्रह कर दीता है Is high before?

कौर भारत का सबसे जादा डरापना हाईवे कहा जाता है। नानी देवी की कहानी भी स्काइवे पर ही खटे थे मैं अपने पता के साथ रांची किसी काम से गए थी उस दिन हमारा काम राची में पूरा होते ही हम राची से निकल गए हम हाइवे पर जा रहे थे उस समय वहाँ हाइवे नहीं था बलकि एक अच्छी सड़क थी गाउवालों का कहना था कि उस कच्ची सड़क पर कभी भी रात को कोई नहीं गुजरता क्योंकि उस कच्ची सड़क पर कुछ ऐसा साया है जो लोगों को गुम्रह कर देता है और उनकी जान ले लेता है मेरे पिता श्रीम इन बातों में विश्वास नहीं रखते थे

मगर उन्हें उस हाइवे पे जाते वक्षाम को ये डर लग रहा था कि कहीं हमारे पास कोई चोर या रुटेरे ना आ जाएं और हमारे साथ कुछ बुरा ना करते यह चंता मेरे पिताजी को खाय जा रही थी। उस हाइबर पर चलते चलते शाम हो गई पांच बच चुके थे और सरदियों का मौसम था तो अंधेरा भी होने लगा था

मेरे पिता श्री की चंता पढ़ने लगी थे। थोड़ी दूर चलते ही हमने देखा कि वहाँ पर एक छोटा सा घर मेरे प्रिताश्री ने कहा चलो आज रात इसी घर में गुजार लेते हैं। मैं उनके पीछे पीछे चल पड़ी। चलते चलते हम घर के दरवाजे की और आज़ा। میرے پتا جی نے دروازہ کٹ کٹ آیا۔ दर्वाजा बार बार खटखटाने पर भी कोई जवाब ना मिला

पिताजी ने दर्वाजे को हलका सा धक्का मारा और दर्वाजक अपने आप खुल गया हमने सोचा क्यों न हम आज की रात इसी घर में बिता लें। इसलिए हम दोनों अंदर घुज गए और दर्वाजे को बंद कर दिया। उसके बाद हमने सोने की तैयारी की।

समय का भ्रम और गायब घर

मैं थोड़ी देर सो गई, परंतु जब मैं उठी तो मुझे पिता जी से पता चला, कि वो बिल्कुल भी सो नहीं पाए. मुझे लगता है, उन्हें को ये तनाव रहा होगा, इसलिए वो बिल्कुल भी सो नहीं पाए. وقت كارتا و مشكل ہو رہا تھا اس گھر میں جا کے ہوئے مجھے यह सोचकर पिताजी ने बोला, अरे, तुम्हारे पास मेरी घड़ी है?

मेरे पिताजी की घड़ी मेरे पास थे मेरे पिताजी ने मुझसे पूछा कि बेटा, जर समय तो बताना मैंने गड़ी की तरफ देखा और पताची को बताया चार बच चुके थे पिताजी ने भी घड़ी की तरफ देखा और बोला हाँ चार तो बच गए हैं अब पहार सुभा हो गई होगी मैं और पिदाजी जैसे ही घर से बाहर निकले हमने देखा बाहर सुपह हो चुकी है घर के आसपास चिडिया की आवाजे आ रही थी क्योंगे घर जंगल के बीच में था। हम थोड़ी दो जैसे ही घर से गए अचानक अंधेरा सा जाने लगा। चिडिया की आवाजे भी धीरे धीरे बंध हो गए। यह देखकर हम चोक हैं.

किता जी नहीं बोला गड़ी की तरफ एक बार देखो फिर से क्या समय हुआ है मैंने जैसे ही देखा तब तीन बज रहे थे। मैंने पिताजी को भी ये बात बताई। उन्हीं भी अपनी नहीं हुआ। उन्होंने फिर से देखा तो तीन ही बज रहे थे। जबकि घर के अंदर तो हमने देखा था। खड़ी में चार बच रही हैं पिताजी ने बोला शायद खड़ी खराब हो गई होगी खर के अंदर वापस चलते हैं जैसे ही घर के अंदर जाने के लिए मुड़े वहाँ कोई घर था ही नहीं जबकि अभी तो हम घर से बाहर निकले थे

साये का पीछा और पिता की मृत्यु

पिता जी ने कहा चलो बेटी यहां से चलते हैं मैंने पिता जी का हाथ पकड़ लिया पिताजी और मैं जो घर वहाँ था ही नहीं उससे काफी दूर आ चुके थे हम गाओं की तरफ वाली सडक पर चल रहे थे पिताजी बोले अगर हम चलते रहे तो थोड़ी देन में सुभे हो जाएगी और हम घर भी पहुच जाएंगे ये बात सही थी, मुझे भी अब यहां नहीं रहना था, ये जगा मुझे भी ठीक नहीं लग रही थी। काउं की सडक पर चलते चलते कुछ दूरी पर हमने एक साया देखा।

वे साय को देखकर में डर गई। मैंने पिता जी का हाथ और कसकर थाम लिया। और पिता जी उस साय को घुड़ते ही रह गए। फिर थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा और हम लोग उस सड़क से पीछे मुड़ गए। सड़क पे चलते चलते अचानक पिता जी के रंगढंग बदलने लगे पिता जी ने एकदम से मेरा हाथ छोड़ा और वह भागने लगे उनके आगे साया खड़ा हुआ था मैंने उनसे कहा पिता जी रुख जाएए वहां मत जाएए आप मुझे छोड़ के कहा जा रहे हैं

मुझे डन लग रहा है, आप साय की तरफ क्यों चा रहे हैं? पिता जी, महां मत जाएए। उसी शन एक मोटर गाड़ी आके पिता जी से टकरा गई। पिता जी के मोटर गाड़ी से टक्राते ही मोटर गाड़ी अपने आप रुख गई मोटर गाड़ी के मालिक खबराते हुए बाहर आये उन्होंने पिता जी की धड़कन महसूस करने की कोशिश की मगर शायद तब तक उनकी धड़कन बंध हो चुकी थी और पिता जी की मृत्य हो चुकी थी मोटर गाड़ी के मालिक को मैं जानती थी, वे हमारे गाउं के सरपंच थे, मैं जब थोड़ा आगे बढ़ी तो उन्होंने मुझे देख लिया।

उन्होंने कहा बेटी तुमने क्या मोटर गाड़ी आती भी नहीं दिखी तुमने अपने पिता जी को मना क्यों नहीं किया कि पिता जी रुक चाहिए वहां मत चाहिए मोटर गाड़ी आ रही है मैंने बोला कि सर पंच जी मुझे आपकी गाड़ी तो बिल्कुल भी आती भी नहीं नजर आई उन्हें बोला कि तुम्हें शायद गाड़ी ना दिखी हो पर तुम्हें कोई

बत्तियां तो दिखी होगी, रोश्टी तो दिखी होगी, मैंने कहा नहीं, मुझे कोई बत्ति और कोई रोश्टी नहीं दिखी, शायद पिता जी को भी नहीं दिखी होगी, इसलिए अब आपकी मोटर गाड़ी से टकरा गए। انہوں نے بولا ایسا کیسے ہو سکتا ہے میں نے انہوں نے وہ سب بتا دیا جو ہمارے ساتھ ہوا انہوں نے کچھ کہا نہیں مجھے گلے سے لگایا

अनसुलझी घटना और रिपोर्ट का विरोधाभास

गाड़ी के अंदर बिठाया पिताजी की लाश को पिशली सीट पे रखा और वहें वहाँ से चट निकल गए काउ पहुचने के बाल हमसे पुलिस ने पुछता ची मैंने पुलिस को सब बताते जो हमारे साथ हुआ था پولس کو مجھ پر یقین نہیں ہوا انہیں لگا میں کوئی بچے ہوں جو منگرن کہانیاں بنا رہی ہوں

पिताजी की पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट में भी ये आया कि पिताजी की मृत्यूगाडी से टकराने की वज़े से नहीं बलकि हाई बलड प्रेशर से हुई। उनका दिल इतना तेज चल रहा था कि उन्हें हार्ट अटैक भी हो सकता था। राश्ट्र हाइवे तैथिस की ऐसी पहली कहानी थी जिसका कोई चश्मती कवाई

ये कहानी काफी सिर्खियों में रही और इसके बाद ऐसी कई और कहानिया राश्टर हाईवे 33 के बारे में आई हम जानते हैं आपके पास भी ऐसी कई और कहानिया होंगी अगर आप चाहते हैं कि हम आपकी कहानिया सबको सुनाएं तो हमारे फेस्बुक पेज पर हमें मेसेच कीज़े अपनी कहानी या फिर आप हमारी सुविधा पर भी संपर्क कर सकते हैं This number is 924924. आज के लिए बस इतना ही, मैं आप से अगले रविवार फिर मिलूगी एक नई कहाने लेकर, तब तक के लिए हमारे रेडियो चानल पर बने रहें। कर दो कर दो कर दो Hello?

Hello, I am Mrs. Sabiha Siddi, wife of army officers. She has reported to you. आपने कहाता घर में सब खी कि आप इसने आगे एंट्री पर ही ताला डाल दिया जहां से एंट्री करते हैं और ने ताले तोड़के ताले भी ने डाल दिया है Thank you.

ने ने एक या मा भी इसमें ताला डाल दिया और अल्डर भी ताले बदल दिया घर के ताले बदल दिया โอ้ นาว นาว นาว นาว นาว นาว नहीं मैं तो यहीं बैटकू दुकान के आगे वो कुछ नहीं नहीं देरा अपने दुकान बंद करके ताया के घड़ चला अंदर का आप उसमें दे रहा है शापी ताला लगाके गए तो इसली तो आपको भेज़ा था मैंने ताला दिखाने के लिए میں اسبنڈ کے پاس جائے بھی تھی میں نے آپ کو بتایا تو تھا فیلڈ میں اسبنڈ جمو

तो यह अंदर नीज आने दे रहा साला लगा के बराबर वाले साय के घर जाके बैठ गया है पूरा महले में ने काली गलॉट सीन करके और साला लगा के चला गया है हम कहले में बैठे हैं आप एक पार आए तो कम से कम आके घर में बैठके आपने का ना बात कीस मसला है तो बात कीस तो करेगा तभी को बात होगी आप बताईए बात कीस होगी या नहीं होगी या बात कीस ही नहीं करना चाहता आप बताईए Lenny my my death all this one.

آپ دو لوگ ہیں کہ بیٹھ کے بات چیز کرنے آنکھیں ہمیں کوئی لڑائی نہیں ہمارے پاس کوئی ہتھیار تھوڑنا ہم کوئی گنڈے تھوڑنا ہے آئیے کہہ رہا ہے کہ F.I.R تارا رکھی میں نے تمہیں نے F.I.R کس بات کی تارا رکھی بھئی تمہیں نے نکاتہ پیٹ کے بات کریے آپ آپس میں آپ آجے یا تو آپ اکیلا آجے آپ بڑے ہیں นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่นี่ اور گلوائیے کہاں بیٹھ کے ساتھ بات دیت ہوگی ہمیں بات چیز چاہیے ہمیں جھگڑا نہیں چاہیے پہلے بھی جھگڑا نہیں چاہیے

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