आत्मिक उपहारों के निहितार्थ
परमेश्वर ने अपने लोगों को सेवकाई के लिए तैयार करने लिए प्रेरितों, भविष्यवक्ताओं, प्रचारकों, पादरियो शिक्षकों को नियुक्त किया है।

परमेश्वर ने अपने लोगों को सेवकाई के लिए तैयार करने लिए प्रेरितों, भविष्यवक्ताओं, प्रचारकों, पादरियो शिक्षकों को नियुक्त किया है।
परमेश्वर अपने पवित्र आत्मा के द्वारा अपने कलिसिया के सभी सदस्यों को आध्यात्मिक उपहार देता है जिसे प्रत्येक सदस्य को कलिसिया और मानवता की सेवा में इस्तेमाल करना है।
परमेश्वर अपने पवित्र आत्मा के द्वारा अपने कलिसिया के सभी सदस्यों को आध्यात्मिक उपहार देता है जिसे प्रत्येक सदस्य को कलिसिया और मानवता की सेवा में इस्तेमाल करना है।
प्रभु भोज यीशु की देह और लहू के प्रतीक में भागीदारी है, जो हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता में विश्वास की अभिव्यक्ति है।
भोज की तैयारी में आत्म-परीक्षा, पश्चाताप और स्वीकारोक्ति शामिल है। प्रभु ने पैर धोने की विधि द्वारा नम्रता, एक दूसरे की सेवा और एक दूसरे से प्रेम करने सिखाया।
जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा।“
बपतिस्मा पाप के लिए मरने और परमेश्वर में नई जीवन जीने का चिन्ह है।
बपतिस्मा प्रदर्शित करता है कि एक व्यक्ति मसीह के साथ एक व्यक्तिगत संबंध में प्रवेश किया है और उसके अनुग्रह के राज्य के सिद्धान्त के अनुकूल जीने की ठान ली है।
कलिसिया की एकता मसीह के क्रूस पास होती है।
कलिसिया एक देह है जिसमें कई सदस्य होते हैं, जिन्हें हर कुल, जाति, भाषा और लोगों से बुलाया जाता है। मसीह में हम एक नई सृष्टि हैं।
प्रकाशितवाकय 14 के तीन दूतों के संदेश लोगों को पश्चाताप करके परमेश्वर की ओर फिरने को बुलाता है, झूठे धार्मिक प्रणाली से निकालने, और विश्वास द्वारा उद्धार ग्रहण करने कहता है।
सोलहवीं शताब्दी के मसीह कलिसिया की सुधार काफी कुछ हासिल किया था, लेकिन धर्म-त्याग के दौरान खोई हुई सभी ज्योति को खोज नहीं पाया था, उसे पूर्ण ज्योति में आगे जाना था।
विवाह को शुद्ध, प्रेमपूर्ण, स्व-त्याग का संबंध होना था परन्तु पतन के बाद इसमें आदर्श से हटकर अनेक संबंध लाये। पर परमेश्वर हरेक व्यवहार को अपने उपचारात्मक अनुग्रह से छू सकता है।
विवाह अदन में दिव्य रूप से स्थापित किया गया था एवं यीशु द्वारा प्रेमपूर्ण साहचर्य में एक पुरुष और एक स्त्री के बीच आजीवन मिलन होने की पुष्टि की गयी थी।
अपनी सभी अभिव्यक्तियों में, मसीही जीवनशैली मसीह के माध्यम से उद्धार की प्रतिक्रिया है जहाँ मसीही परमेश्वर का सम्मान और यीशु की तरह जीना चाहता है।
हमें उन बातों में स्वय को व्यस्त रखना चाहिए जो हमारे विचारों एवं शरीरों को मसीह के अनुशासन में लाती हैं जो हमारा हितकारिता, आनंद और भलाई की कामना करता है।
हमें एक धार्मिक लोग होने के लिए बुलाया गया है जो स्वर्ग के सिद्धांतों के अनुरूप सोचते, महसूस करते एवं कार्य करते हैं। हमारा ध्यान इसी में रहना चाहिए।
भण्डारीपन एक सौभाग्य है जो हमें परमेश्वर द्वारा प्रेम में विकसित होने के लिए एवं स्वार्थपन व लालच पर विजयी होने के लिए दिया है। मसीह का बलिदान हमें प्रोत्साहित करता है।
हम परमेश्वर के भण्डारी हैं, और हमें समय एवं अवसरों, योग्यताओं एवं संपाति, तथा पृथ्वी की आशीषों व उसके संसाधनों के साथ यह कार्य करना है।
परमेश्वर हमें सब्बत को पवित्र रखने के लिए स्मरण करने को कहा है; और हमें उसके लिए तैयारी भी करना है। हमें सब्बत का पालन शुक्रवार संध्या से शनिवार संध्या तक करना है।
शैतान लड़ाई किया है और मनुष्य का प्रयोग कर आराधना के दिन को बदलने का प्रयास किया है; परंतु सब्बत बदलाव के सहयोग में बाइबल में एक भी पदस्थल नहीं है।
सब्बत सृष्टि का स्मारक, उद्धार का प्रतीक, पवित्रीकरण, वफादारी, विश्वास द्वारा धार्मिकता, मसीह में धार्मिकता का चिन्ह, और संगति का समय है।
छ: दिन की सृष्टि के पश्चात, सब्बत को सृष्टि के स्मरण के तौर पर परमेश्वर ने सब मनुष्य को दिया।
परमेश्वर के दस आज्ञाओं की नैतिक व्यवस्था उसके चरित्र का प्रतिबिंब है और मानवता के लिए पूर्ण, अपरिवर्तनीय एवं स्थायी वैधता के हैं। परमेश्वर के लोग उसे मानते हैं।
परमेश्वर की व्यवस्था मानव व्यवहार एवं सम्बन्धों के बारे में परमेश्वर के प्रेम, इच्छा, एवं उद्देश्यों को व्यक्त करते हैं। वे उसके वाचा के आधार और न्याय का मापदंड हैं।
परमेश्वर की व्यवस्था के महान सिद्धान्त दस आज्ञाओं में सम्मिलित हैं एवं मसीह के जीवन में प्रमाणित हैं। वे परमेश्वर के प्रेम व्यक्त करते हैं।
परमेश्वर एलेन जी व्हाइट को दर्शन दिये जो अंतिम दिनों के उसकी कलिसिया की उसकी संदेशवाहक थीं। बाइबल में पाये गए सच्चे भविष्यवक्ताओं के परीक्षण में वह उत्तीर्ण होतीं हैं।
भविष्यवाणी का वरदान शेष कलिसिया के विशिष्ट विशेषताओं में से एक है जो उत्पीड़न के बौजूद उसके पास है।
पवित्र आत्मा शेष कलिसिया को अपने वरदानों में से एक के रूप में भविष्यवाणी का वरदान देता है जो अंत तक निरंतर चलते रहेगा।
परमेश्वर ने अपने लोगों को सेवकाई के लिए तैयार करने लिए प्रेरितों, भविष्यवक्ताओं, प्रचारकों, पादरियो शिक्षकों को नियुक्त किया है।